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'खाली कुर्सियां वोट में बदल गईं,' उद्धव को नहीं रास आई महायुति की जीत

उद्धव ठाकरे ने कहा है कि ऐसा 4 महीने में क्या हुआ कि महाराष्ट्र में महायुति को इतने वोट पड़े। यह देश एक पार्टी की ओर आगे बढ़ रहा है।

Uddhav Thackeray

शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे। (तस्वीर- फेसबुक, शिवसेना यूबीटी)

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महाराष्ट्र में महायुति गठबंधन की प्रचंड बहुमत से जीत, उद्धव ठाकरे को रास नहीं आई है। उद्धव ठाकरे ने बीजेपी की जीत से निराश होकर कहा है कि यह देश, एक देश एक चुनाव और एक पार्टी की ओर बढ़ रहा है। पहला जख्म उन्हें जून 2022 में एकनाथ शिंदे ने दिया, दूसरा जख्म विधानसभा चुनावों के नतीजों ने दिया है। महाराष्ट्र की जनता ने उन्हें नकार दिया है। उनके नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को महज 20 सीटें मिलीं, वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 57 सीटें मिली हैं।

जिस एकनाथ शिंदे को वे गद्दार बुला रहे थे, महाराष्ट्र की जनता ने उन्हीं पर मुहर लगा दी। लोकसभा चुनाव के जब नतीजे आए थे तो परिस्थितियां इससे बेहद अलग थीं। ऐसा लगा था कि महाराष्ट्र में अब बीजेपी कमजोर हो जाएगी लेकिन नतीजों ने बीजेपी को और मजबूत बना दिया। वह इस फैसले से इतने हैरान हैं कि उन्होंने मीडिया के सामने कह भी दिया।

उद्धव ठाकरे ने कहा, 'मुझे भरोसा नहीं हो रहा है महाराष्ट्र पर। जिस राज्य ने मुझे कोविड-19 महामारी के दौरान घर का मुखिया माना, वह मेरे साथ ऐसा करेगी। ऐसा कैसे हो सकता है कि केवल 4 महीनों के भीतर वे इतनी ज्यादा सीटें जीत सकते हैं। उन्होंने कहां ऐसे नतीजों के लिए दीप जलाए हैं?'

'खाली कुर्सियां वोटों में बदल गईं'

उद्धव ठाकरे ने कहा, 'लोगों ने हमें सुना, मोदी और शाह को नहीं सुना। लोगों ने कहा कि उन्हें सुनने की जरूरत नहीं है। क्या उन्होंने बिना उन्हें सुने ही वोट दे दिया है। कैसे खाली कुर्सियां वोटों में तब्दील हो गईं?' उद्धव ठाकरे ने कहा, 'कुछ साल पहले जेपी नड्डा ने कहा था कि केवल एक पार्टी होगी। ऐसा लग रहा है कि वे उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। एक देश, एक पार्टी। मैं लोगों से कहना चाहता हूं कि लोग आशा न खोएं।'

क्या EVM में आ गई है खोट?
उद्धव ठाकरे ऐसा नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि ईवीएम इसके लिए दोषी नहीं है। अगर लोगों को लगता है कि उन्होंने ये निर्णय लिया है तो वे इसे स्वीकार करते हैं। 


खाली कुर्सियां वोटों में बदलीं, ऐसा उद्धव को क्यों लगा?
उद्धव ठाकरे का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में भीड़ नहीं होती थी। अमित शाह की रैलियों में भीड़ नहीं होती थी। महा विकास अघाड़ी की रैलियों में भीड़ होती थी लेकिन तब भी महायुति की जीत हुई। महाराष्ट्र में 26 प्रतिशत वोट शेयर के साथ राज्य की सबसे बड़ी पार्टी है। शिवसेना 12 प्रतिशत और एनसीपी 9 प्रतिशत वोट शेयर के साथ उभरी। इस रेस में शिवसेना को केवल 9 प्रतिशत वोट पड़े। जिन मुद्दों पर महाविकास अघाड़ी ने चुनाव लड़ा, उसे लोगों ने खारिज कर दिया।

महा विकास अघाड़ी के तीन सहयोगी दल, एनसीपी (एसपी), कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) हैं। तस्वीर- फेसबुक, शिवसेना यूबीटी)



उद्धव ठाकरे का गद्दार नारा भी बेअसर रहा। राहुल गांधी का जातिगत आरक्षण का मुद्दा काम नहीं आया। माराठा और अल्पसंख्यक वोटरों को शरद पवार नहीं संभाल पाए। जिन-जिन मुद्दों पर महा विकास अघाड़ी ने सवाल उठाए, बीजेपी ने उन्हें भुना लिया। एक हैं तो सेफ हैं और बटेंगे तो कटेंगे जैसे नारों ने असर किया और नतीजे एमवीए के लिए अप्रत्याशित रहे। 

महाराष्ट्र में किस पार्टी को कितना मिला वोट?
उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) ने कुल 89 सीटों पर चुनाव लड़ा था। 20 सीटों हासिल हुईं। माहुयित गठबंधन की पार्टियों ने 236 का आंकड़ा पार कर लिया है। बीजेपी अकेले, अपने दम पर 132 सीटें हासिल की हैं। शिवसेना 80 सीटों पर लड़ी थी, जिसमें 57 सीटों पर जीत मिली। अजीत पवार के नेतृत्व में एनसीपी भी 41 सीटें हासिल करने में कामयाब हुई। महा विकास अघाड़ी की शिवसेना (UBT) 20, कांग्रेस 16 और एनसीपी (शरद पवार) ने सिर्फ 10 सीटों पर सिमट गई है। महा विकास अघाड़ी के पास सिर्फ 49 सीटें ही हैं।


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