पूर्व मंत्री, DCP गिरफ्तार, अवैध टोल पर रोक, बंगाल में शुभेंदु ने क्या बदला?
शुभेंदु अधिकारी 6 दिन पहले ही पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने हैं लेकिन इतने कम समय में ही वह केंद्र की सरकार और बीजेपी के एजेंडे को बंगाल में लागू करते दिखने लगे हैं।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, Photo Credit: PTI
पश्चिम बंगाल के चुनाव में इस बार भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली और शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने। 9 मई को शपथ लेने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार के कई फैसलों को पलटा और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। गिरफ्तार किए गए लोगों में ममता बनर्जी के करीबी और पूर्व मंत्री सुजीत बोस और कोलकाता पुलिस के डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास का नाम शामिल है। शुभेंदु सरकार ने बंगाल में आयुष्मान योजना लागू करने, जनगणना शुरू करने, अवैध रूप से चलने वाले टोल बंद करने और खुले में जानवरों को काटने पर रोक लगाने जैसे फैसले लिए हैं।
एक तरफ जहां ममता के करीबी रहे सुजीत बोस और शांतनु सिन्हा बिस्वास गिरफ्तार हुए हैं तो ममता की एक और करीबी नंदिनी चक्रवर्ती को नई पोस्टिंग मिल गई है। चुनाव के दौरान नंदिनी चक्रवर्ती को उनके पद से हटा दिया गया था। वह पूर्व में चीफ सेक्रेटरी भी रही हैं। अब उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में विकास कार्यों की प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर बनाया गया है। भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर की जाने वाली बाड़बंदी के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) समन्वय और जमीन ट्रांसफर का करने का जिम्मा नंदिनी को ही दिया गया है। बता दें कि 15 मार्च को चुनाव का एलान होने के कुछ घंटे बाद ही नंदिनी को उनके पद से हटा दिया गया था।
ममता के करीबियों पर गिरी गाज
अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोलकाता पुलिस के उपायुक्त (डीसीपी) शांतनु सिन्हा विश्वास को कथित धोखाधड़ी और जबरन वसूली से जुड़े मामले में गिरफ्तार कर लिया है। एक अधिकारी ने बताया कि कोलकाता में ईडी के ऑफिस में 10 घंटे से ज्यादा की पूछताछ के बाद शांतनु को गिरफ्तार किया गया। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'सोना पप्पू नेटवर्क से जुड़े कथित रूप से भूमि हड़पने, जबरन वसूली और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में शांतनु सिन्हा विश्वास से पूछताछ की गई। उन्होंने बार-बार सीधे जवाब देने से परहेज किया और जांच में सहयोग नहीं किया।'
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उन्होंने कहा, 'इकट्ठा किए गए सबूतों और पूछताछ के दौरान उनके आचरण के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।' बता दें कि वर्तमान में कोलकाता पुलिस के सुरक्षा नियंत्रण विभाग में तैनात शांतनु सिन्हा विश्वास आधिकारिक व्यस्तताओं का हवाला देते हुए कई बार समन की अवहेलना करने के बाद एजेंसी के समक्ष पेश हुए। ईडी ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया था। अधिकारियों ने बताया कि धोखाधड़ी के मामले के संबंध में व्यवसायी जय कामदार के साथ उनके कथित संबंधों की जांच की जा रही है, जिन्हें सोना पप्पू का करीबी माना जाता है। उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान शांतनु विश्वास के सामने जांच के दौरान बरामद की गई कई व्हाट्सएप चैट भी पेश की गईं। कालीघाट पुलिस थाने के पूर्व प्रभारी अधिकारी रहे शांतनु सिन्हा विश्वास कई मामलों में जांच के दायरे में हैं।
इससे पहले ईडी ने ही नगर निगम की भर्ती में हुए घोटाले का आरोप में टीएमसी के नेता और पूर्व मंत्री सुजीत बोस से भी पूछताछ की थी और उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। ईडी ने उनके बारे में भी कहा था कि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और उनके बयान मेल नहीं खा रहे थे। गौरतलब है कि चुनाव के दौरान भी ईडी ने सुजीत बोस को समन भेजा था लेकिन वह ईडी के सामने पेश नहीं हुए।
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आरोप है कि साउत दमदम नगर निगम में 329 अयोग्य उम्मीदवारों को गलत तरीके से नौकरी दी गई। यह भी कहा गया है कि जिन लोगों को इंटरव्यू में 0 नंबर मिले उन्हें भी नौकरी दे दी गई। इस के में नगर निगम के तत्कालीन चेयरमैन पांचू रॉय के खिलाफ सीबीआई ने जांच की थी और वह चार्जशीट भी दायर की थी। बता दें कि सुजीत बोत इस बार अपनी विधानसभा सीट बिधाननगर से चुनाव हार गए। इससे पहले वह 2009 से यहां से जीतते आ रहे थे।
केंद्र की योजनाएं बंगाल में लागू
शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पहली कैबिनेट में ही फैसला लिया था कि अब पश्चिम बंगाल में भी केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना लागू होगी। इसके अलावा, बांग्लादेश बॉर्डर पर बाड़बंदी करने के लिए BSF को जमीन देने का फैसला लिया गया। शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा था कि अगले 45 दिन में जमीन देने का काम पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि ममता बनर्जी की सरकार ने संविधान का उल्लंघन करते हुए भारतीय न्याय संहिता को ही बंगाल में लागू नहीं किया था। अब इसे भी बंगाल में लागू किया जाएगा।
इसके अलावा, केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं को बंगाल में लागू करने, स्कूल की नौकरियों में पांच साल की छूट देने और बंगाल के अधिकारियों को केंद्र सरकार की ट्रेनिंग दिलाने का भी फैसला लिया गया है। शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई गड़बड़ियों की जांच के लिए एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी भी बनाई जाएगी।
अवैध टोल बंद करने का आदेश
BJP लगातार आरोप लगाती रही थी कि टीएमसी के लोग बंगाल में कई जगहों पर अवैध टोल नाके लगाते हैं और लोगों से पैसे वसूलते हैं। अब पश्चिम बंगाल सरकार ने आदेश जारी किया है कि बिना अनुमति के चल रहे ऐसे सभी टोल गेट, ड्रॉप गेट और बैरिकेड को तुरंत हटाया जाए। साथ ही, यह भी कहा गया है कि अगर किसी ने दोबारा ऐसे गेट लगाए तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। यह भी कहा गया है जो कानूनी तौर पर मान्य टोल गेट हैं उनकी एक लिस्ट भी तैयार की जाएगी और वे कब तक के लिए मान्य हैं इसका भी पता लगाया जाए।
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सरकार ने वैध और अवैध दोनों तरह के टोल गेट की जानकारी मांगी है। यह लिस्ट आने के बाद ही आगे का कदम उठाया जाएगा। कहा जा रहा है कि आने वाले समय में इस तरह के अवैध टोल गेट चलाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है ताकि वे दोबारा ऐसा करने की कोशिश न करें।
BJP का अजेंडा लागू कर रहे शुभेंदु अधिकारी
इन फैसलों के अलावा शुभेंदु अधिकारी की सरकार बीजेपी के 'हिंदुत्ववादी' एजेंडे को भी धार देने में जुट गई है। सभी स्कूलों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य कर दिया गया है और धर्म स्थलों पर बजाए जाने वाले लाउडस्पीकर पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, राज्य सरकार ने एक आदेश जारी किया है जिसके मुताबिक, खुले में जानवरों को काटने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, यह भी कहा गया है कि जानवरों को काटने के लिए सर्टिफिकेट की जरूरत होगी। बिना सर्टिफिकेट के जानवरों को काटने पर कानूनी कार्रवाई की बात भी कही गई है।
अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए बीजेपी सरकार ने आदेश दिया है कि 2021 के चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े मामलों को फिर से खोला जाए और उनकी जांच की जाए। साथ ही, अभिषेक बनर्जी समेत तमाम नेताओं की सुरक्षा में भी कटौती की गई है। हालांकि, ममता बनर्जी की सुरक्षा में कोई कमी नहीं की गई है।
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