एक-एक विधायक और समर्थन के लिए परेशान मुख्यमंत्री विजय सी जोसेफ, अब आराम से 5 साल सरकार चला सकते हैं। उन्हें अल्पमत का डर नहीं सताएगा। ऑल इंडिया द्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK) के एक धड़े ने उनके समर्थन का एलान किया है। इस धड़े की अगुवाई सीवी शनमुगम कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि उनके साथ लगभग 30 विधायक हैं।
सीवी षणमुगम ने दावा किया है कि उनके पास पार्टी में बहुमत है। उन्होंने तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की अगुवाई वाली सरकार को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। सीवी षणमुगम ने कहा कि पार्टी के ज्यादातर सदस्यों ने द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) के साथ मिलकर सरकार बनाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। AIADMK की स्थापना ही डीएमके के विरोध में हुई थी।
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सीवी षणमुगम, नेता, AIADMK:-
हम जनता के फैसले को स्वीकार करते हैं। जनता ने विजय को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है। हम सीएम विजय को बधाई देते हैं और उनकी TVK सरकार को पूरा समर्थन देते हैं।
सीवी षणमुगम की चिंता क्या थी?
सीवी षणमुगम ने कहा है कि पिछले 53 साल से पार्टी डीएमके के खिलाफ राजनीति करती आई है। ऐसे में डीएमके के सहारे सरकार बनाना पार्टी को कमजोर कर देगा।
सीवी षणमुगम, नेता, AIADMK:-
अगर हम डीएमके के साथ गठबंधन करते हैं तो AIADMK पार्टी खत्म हो जाएगी। सदस्यों ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसलिए हमने चुनाव जीतने वाली TVK को समर्थन देने का फैसला लिया है।
पालानीस्वामी देखते रहे, बंट गई AIADMK
सू्त्रों के मुताबिक विधायकों की बैठक में बहुमत से प्रस्ताव पास कर दिया गया कि AIDMK अब आगे की सभी चुनाव अकेले लड़ेगी। कोई गठबंधन नहीं होगा। पार्टी को फिर से मजबूत करने की तैयारी की जाएगी।
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अब सीवी षणमुगम के सामने क्या चुनौती है?
षणमुगम ने बताया कि पूर्व मंत्री एसपी वेलुमणि को AIADMK का विधानसभा नेता बनाया गया है, जबकि सी विजयभास्कर को पार्टी व्हिप नियुक्त किया गया है। उन्होंने यह पत्र प्रोटेम स्पीकर को पहले ही सौंप दिया है।
बिखराव क्यों हुआ?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK के 47 उम्मीदवार जीते थे। एके पलानीस्वामी के पास करीब 20-22 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है। सीवी षणमुगम का कहना है कि उनके गुट के पास बहुमत है। दोनों गुटों के बीच बड़ा मतभेद हो गया है। सीवी षणमुगम ने आरोप लगाया कि पलानीस्वामी, डीएमके के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने चाहते थे।
विजय के लिए राहत क्यों है?
TVK पार्टी ने चुनाव में 108 सीटें जीतीं और सबसे बड़ी पार्टी बनी। तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटें हैं। बहुमत के लिए कम से कम 118 सीटें चाहिए। विजय के पास यह आंकड़ा नही है। कांग्रेस, वीसीके, वामपंथी पार्टियों और कुछ स्थानीय पार्टियों की मदद से विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। अब 13 मई को उन्हें विधानसभा में विश्वास मत का सामना करना है।
सीवी षणमुगम के समर्थन के ऐलान से विजय के लिए विश्वास मत आसान हो गया है। उनके गुट के विधायक जल्द ही विजय से मिलकर औपचारिक समर्थन देंगे।