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अल्मोड़ा में है 1100 साल पुराना कटारमल मंदिर, सूर्यदेव की होती है पूजा

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक्स अकाउंट पर कटारमल सूर्य मंदिर का वीडियो शेयर किया है। इस मंदिर का निर्माण कत्यूरी राजवंश के शासक ने किया था।

katarmal sun temple

कटारमल मंदिर (Photo Credit: Uttarakhand Tourism)

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उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। इस जगह को लोग धरती का स्वर्ग भी मानते हैं। यहां पर कई बड़े बड़े मंदिर है जिसके दर्शन करने पर्यटक साल भर आते हैं। हाल ही में राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर कटारमल सूर्य मंदिर का वीडियो शेयर किया है। यह सालों पुराना मंदिर है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

 

कत्यूरी राजवंश ने कटारमल में सूर्य मंदिर बनवाया है जो अल्मोड़ा में स्थित है। यह मंदिर अद्भुत कला का अनुपम उदाहरण है। आइए इस मंदिर से जुड़ी जरूरी बातों के बारे में जानते हैं।

 

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सूर्यदेव को समर्पित है कटारदमल मंदिर

बड़ादित्या के नाम से कटारमल मंदिर प्रसिद्ध है। यह मंदिर भगवान सूर्य देव को समर्पित है। इस मंदिर को 9वीं सदी के शासक राजा कटारमल्ला ने बनवाया था। इस मंदिर के अलावा यह 45 और मंदिर हैं जो भगवान शिव, देवी पार्वती, लक्ष्मण और भगवान विष्णु को समर्पित है। जब इस मंदिर पर सूर्य की किरण पड़ती है तो इसकी खूबसूरती देखने लायक होती है।

 

कटारमल मंदिर पहाड़ी इलाके में स्थित है। यह जगह बहुत शांत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। इस मंदिर की बनावट पत्थरों से की गई है और इसमें लकड़ी की नक्काशी की गई है। मंदिर के गर्भ गृह में नागर शैली की नकाशी देखने को मिलेगी।  इस मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। यह मंदिर ओडिशा के कोणार्क मंदिर के बाद दूसरे स्थान पर आता है। 

 

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कैसे पहुंचे कटारमल मंदिर

यह मंदिर अल्मोड़ा से 19 किलोमीटर दूर है। यहां तक पहुंचने के लिए आपको पहले सड़क मार्ग से कोसी गांव जाना होगा और वहां से 1 से 2  किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।

कौन थे कत्यूरी राजवंश

कत्यूरी राजवंश उत्तर भारत का शक्तिशाली राजवंश था जिसने 700 से 1200 ईस्वी तक उत्तराखंड और आसपास के पहाड़ी इलाकों पर शासन किया। शुरुआत में उनकी राजधानी जोशीमठ थी बाद में बैजनाथ (जो उस समय काट्यूरी कहलाता था) को बनाया गया। कत्यूरी शासकों ने बहुत से मंदिरों का निर्माण करवाया था जिसमें बैजनाथ, जागेश्वर और द्वाराहाट जैसे मंदिर है जो उनकी सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। ये वंश उत्तराखंड के इतिहास का एक अहम हिस्सा है। 

 

 

 

 


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