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कुंडली में कालसर्प और नाग दोष के बीच अंतर क्या है? जानिए इसके प्रभाव और उपाय

कुंडली में कालसर्प और नाग सर्प दोष सबसे प्रभावी दोष माना दाता है। इन दोषों के प्रभाव और उपाय जानिए।

Kal sarpa and  Nag Dosh

प्रतिकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Gemini

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ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक कालसर्प और नाग दोष सबसे प्रभावी दोषों में माने जाते हैं। माना जाता है कि इन दोषों की वजह से लोगों की किस्मत धीमी पड़ जाती है, साथ ही जीवन में ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह दोष किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की एक खास स्थिति की वजह से बनते हैं। इन दोषों के प्रभाव से डरने के बजाय उपाय अपनाकर इनके प्रभाव से मुक्ति पाई जा सकती है।


कई लोगों को कालसर्प दोष और नाग दोष एक ही लगते हैं, जबकि हकीकत में दोनों दोष बेहद अलग हैं। इन दोषों में अनेक अंतर हैं। अब सवाल उठता है कि कालसर्प दोष और नाग

दोष क्या है, इनके प्रभाव क्या हैं, साथ ही इन दोषों से निजात कैसे पाई जा सकती है।

 

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क्या है कालसर्प दोष?


किसी भी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष की स्थिति तब बनती है, जब राशि के सातों ग्रह जैसे चंद्र, मंगल, बुध, शुक्र, शनि और सूर्य राहु और केतु के बीच आ जाएं। उस स्थिति को कालसर्प दोष कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक कालसर्प दोष की वजह से सभी ग्रहों के सकारात्मक प्रभाव व्यक्ति की किस्मत को पूरी तरह प्रभावित नहीं कर पाते हैं।


जिससे व्यक्ति के करियर में रुकावटें आती हैं। साथ ही व्यक्ति को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। यह दोष खास तौर पर लोगों की लाइफस्टाइल को प्रभावित करता है, जिसमें धन की कमी, बार-बार स्वास्थ्य खराब होना और रात को सपने में सांप दिखाई देने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

 

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कालसर्प दोष से कैसे बचें ?


1.सावन के महीने में रुद्राभिषेक करवाना चाहिए।

2.हर रोज 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें।

3.हर रोज शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, साथ ही सोमवार को दूध चढ़ाएं।
4.गरीब और जरूरतमंद लोगों को अपनी सहूलियत के मुताबिक दान दें।


नाग दोष क्या होता है?


जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु या केतु पहले, पांचवें, आठवें या बारहवें घर में विराजमान हों, तो इस स्थिति में नाग दोष बनता है। इस दोष का प्रभाव व्यक्ति की भावनाओं पर बुरा असर डालता है, जिससे लोगों के प्रेम संबंध और परिवार में मतभेद बने रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक नाग दोष से व्यक्ति की शादी देर से होती है। जिन लोगों की शादी समय पर हो भी जाए, उन्हें जीवनसाथी के साथ विवाद का सामना करना पड़ सकता है।


नाग दोष से कैसे बचा जाए?


नाग दोष के प्रभाव को कम करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर लोग इस दोष के प्रभाव से बच सकते हैं।


1.लगातार 21 दिन तक शिव जी के मंदिर में मंत्र जाप करें।
2.हर रोज शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल या दूध चढ़ाएं।
3.नाग पंचमी के दिन पाठ करें।
4.नाग की प्रतिमा की पूजा करें। इसके लिए चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा बनवाकर उसकी पूजा करें।
5.हर शनिवार को गरीब या जरूरतमंद लोगों को काला तिल दान दें।

 

नोट: यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती।

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