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टीम इंडिया के अंडर-19 कप्तान मोहम्मद अमान के संघर्ष की दास्तां

मोहम्मद अमान की मां कोविड काल में चल बसी थीं। 2022 में उन्होंने ट्रक ड्राइवर पिता को भी खो दिया। जानिए सहारनपुर की गलियों से निकलकर भारतीय अंडर-19 टीम के कप्तान बनने तक का उनका सफर।

Mohammad Amaan Under 19 Captain

मोहम्मद अमान। (फोटो - ACC/X)

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UAE में खेले जा रहे अंडर-19 एशिया कप में भारतीय टीम की कमान मोहम्मद अमान के हाथों में है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले अमान मीडिल ऑर्डर के बेहतरीन बल्लेबाज हैं। उन्होंने 2 दिसंबर को जापान के खिलाफ नाबाद शतकीय पारी खेली, जिसकी बदौलत टीम इंडिया ने 211 रन के विशाल अंतर से जीत दर्ज की। मोहम्मद अमान पहली बार पिछले सितंबर में चर्चा में आए थे, जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीम के खिलाफ 3 वनडे मैचों की सीरीज के लिए भारत का कप्तान बनाया गया था। 18 साल के इस क्रिकेटर की कहानी जब सामने आई, तो सभी को हिलाकर रख दिया था। उनका भारतीय टीम तक का सफर किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। 

 

16 की उम्र में सिर से उठा माता-पिता का साया

 

मोहम्मद अमान एक बेहद सामान्य परिवार से आते हैं। उनकी मां सायबा हाउस वाइफ थीं और पिता मेहताब ट्रक चलाकर परिवार का पेट पालते थे। कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में उनकी मां दुनिया को अलविदा कह गईं। इसके दो साल बाद ही उनके पिता का भी निधन हो गया। अब तीन छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी अमान पर आ गई। 

 

उस दौर को याद करते हुए अमान बीबीसी हिंदी से कहते हैं, 'मैं तब पूरी तरह टूट गया था। सच में ऐसा लगा जैसे मैं एक ही दिन में, एकदम से बड़ा हो गया। पापा जब तक थे घर की जिम्मेदारियों का कुछ पता ही नहीं था। मेरे तीन भाई-बहन हैं, मैं सबसे बड़ा हूँ। अब मुझे सोचना था कि घर कैसे चलेगा और कुछ समझ नहीं आ रहा था।'

 

(फोटो - Instagram/mohammad.amaan_7)

 

पिता की मौत के 3-4 दिन बाद ही उन्हें अंडर-19 वीनू मांकड़ ट्रॉफी के लिए यूपी कैंप के लिए बुलावा आया। अमान के करीबी लोगों ने कहा कि जा, वहां अच्छा खेल, तब कुछ ठीक हो सकता है। लेकिन अमान कैंप में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए। 

 

अमान कहते हैं, 'वापस आया तो वही सब देखा। भाई-बहन हैं, घर में खाना भी बनना है। सोच लिया कि अब क्रिकेट छोड़ दूंगा। घर चलाना है तो पैसे कमाने होंगे। लेकिन तब मेरे कोच राजीव गोयल और बड़े भाई अकरम सैफी ने हर तरह से मेरी मदद की।'

 

भूखे पट गुजारी रातें

 

एक समय ऐसा भी था कि मोहम्मद अमान को भूखे पेट सोना पड़ता था। इस बारे में वह अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से कहते हैं, 'भूख से बड़ा कुछ नहीं है। मैं अब अपना खाना कभी बर्बाद नहीं करता क्योंकि मुझे पता है कि इसे कमाना कितना मुश्किल है। जब कानपुर में यूपीसीए के आयु वर्ग के ट्रायल होते थे, तो मैं ट्रेन के जनरल डिब्बे में सफर करता था, शौचालय के पास बैठता था। अब, जब मैं फ्लाइट से सफर करता हूं और किसी अच्छे होटल में ठहरता हूं, तो मैं बस भगवान का शुक्रिया अदा करता हूं।'


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