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कौन हैं कोनेरू हम्पी, जो दूसरी बार बनीं वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियन

कोनेरू हम्पी ने वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप 2024 का खिताब जीत लिया है। उन्होंने 2019 में भी इस टाइटल को अपने नाम किया था।

Koneru Humpy

कोनेरू हम्पी। (फोटो - International Chess Federation/X)

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भारत की कोनेरू हम्पी ने वर्ल्ड रैपिड चैस चैंपियनशिप 2024 का टाइटल जीत लिया है। न्यूयॉर्क में आयोजित इस टूर्नामेंट के 11वें राउंड में हम्पी ने रविवार को इंडोनेशिया की इरीन खरिस्मा सुखिंदर को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। हम्पी ने दूसरी पारी वर्ल्ड रैपिड चेस चैंपियनशिप का टाइटल जीता है। इससे पहले वह साल 2019 में मास्को में खेले गए टूर्नामेंट में चैंपियन बनी थीं।


कोनेरू हम्पी 2023 में समरकंद रैपिड चैंपियनशिप में संयुक्त रूप से टॉप पर रही थीं। हालांकि उन्हें टाई-ब्रेकर में हार का सामना करना पड़ा था। हम्पी इस साल सितंबर में हंगरी के बुडापोस्ट में हुए चेस ओलंपियाड में निजी कारणों से हिस्सा नहीं ले सकी थीं। भारत ने चेस ओलंपियाड में ओपन और विमेंस कैटेगरी में एतिहासिक गोल्ड जीता था। इतना बड़ा मौका चूकने के बाद उन्होंने रैपिड टाइटल जीतकर साल का सुखद अंत किया।

 

हम्पी की जीत लाखों लोगों के लिए प्रेरणा

 

भारतीय चेस फेडरेशन के अध्यक्ष नितिन नारंग ने कोनेरू हम्पी की जीत को देश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने ट्वीट कर हम्पी को जीत की बधाई भी दी। नितिन नारंग ने कहा कि हम्पी की जीत लाखों लोगों को प्रेरित करेगी।

 

 

पिता ने दी हम्पी को ट्रेनिंग

 

कोनेरू हम्पी ने ग्रैंड मास्टर बनने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी हैं। वह नेशन बॉयज टाइटल अपने नाम कर चुकी हैं। हम्पी ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी थीं। उनके पिता अशोक कोनेरू ने उन्हें ट्रेनिंग दी है। अशोक भी चेस खेलते थे। बेटी के चेस के सपनों को साकार करने के लिए उन्होंने प्रोफेसर की नौकरी छोड़ दी थी। पिता की मेहनत रंग लाई और हम्पी 6-7 साल की उम्र में ही स्टेट चैंपियन बन गईं। इसके बाद उन्होंने अंडर-12, 14, 16 की नेशनल चैंपियनशिप जीती।

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