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लॉटरी से बना दिया प्रिंसिपल, गृह विज्ञान की टीचर को मिला कॉमर्स कॉलेज

बिहार की राजधानी पटना में पांच कॉलेजों में प्रिसिंपल की नियुक्ति लॉटरी सिस्टम के जरिए की गई। इन नियुक्तियों पर अब विवाद हो गया है।

Arif Mohammad Khan

आरिफ मुहम्मद खान, Photo Credit: @VijayKrSinhaBih

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बिहार की राजधानी पटना में एक अजब कारनामा हुआ है। पटना कॉलेज के प्रिंसिपल का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया गया। इस लॉटरी सिस्टम के जरिए होम साइंस की टीचर कॉमर्स कॉलेज की प्रिसिंपल बन गईं। इस नियुक्ति को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है। लोग कॉलेज के प्रिसिंपल के पद पर नियुक्ति के लिए इस्तेमाल किए गए लॉटरी सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं। कुछ लोग इस नियुक्ति को सही भी बता रहे हैं। विवाद बढ़ा तो बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को खुद सफाई देनी पड़ी है।

 

बिहार में लॉटरी सिस्टम के जरिए पांच कॉलेजों के प्रिसिंपल का चयन किया गया है। कॉलेजों के प्रिसिंपल की नियुक्ति का फैसला राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के आदेश पर लिया गया है। लॉटरी सिस्टम को अपनाने के पीछे कॉलेजों के प्रिसिंपल की नियुक्ति में होने वाली गड़बड़ी को मुख्य कारण बताया गया है। प्रिंसिपल की नियुक्ति को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थी जिसके बाद लॉटरी के जरिए प्रिसिंपल का चयन करने का फैसला किया गया।

 

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राज्यपाल ने फैसले का बचाव किया

बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के फैसले पर ही लॉटरी सिस्टम से प्रिसिंपल को चुनने का फैसला किया गया। राज्यपाल ही विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं और उन्होंने गुरुवार को इस सिस्टम का बचाव किया। उन्होंने कहा, 'हमने एक ऐसी प्रणाली अपनाई है, जिसमें प्रिसिंपल की नियुक्ति व्यक्तिगत पसंद-नापसंद या किसी के निर्देश से नहीं होती है।' राज्यपाल ने इस प्रक्रिया के बचाव में कहा कि पिछली बार इस तरह की नियुक्ति में कई शिकायतें मिली थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह सिस्टम अपनाया गया है। यह पूरी प्रक्रिया तीन सदस्यीय कमेटी की देखरेख में की गई है।

किन कॉलेजों को मिले प्रिसिंपल?

बुधवार को पटना विश्वविद्यालय के पांच कॉलेजों में प्रिंसिपल नियुक्त किए गए हैं। इन सभी की नियुक्ति लॉटरी सिस्टम के जरिए की गई है। इनमें नागेंद्र प्रसाद वर्मा को मगध महिला कॉलेज का प्रिसिंपल बनाया गया है। एक पुरुष को महिला कॉलेज का प्रिसिंपल बनाने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। अनिल कुमार केमिस्ट्री पढ़ाते हैं लेकिन उन्हें पटना कॉलेज का प्रिंसिपल बनाया है जो आर्ट्स के लिए मशहूर है। अलका जो गृह विज्ञान पढ़ाती हैं और पटना साइंस कॉलेज की प्रिंसिपल हैं। सुहेली मेहता को कॉमर्स कॉलेज का प्रिसिंपल बना दिया गया है लेकिन वह गृह विज्ञान पढ़ाती हैं। इनके अलावा योगेंद्र कुमार वर्मा को पटना लॉ कॉलेज का प्रिंसिपल बनाया गया है। 

 

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राजनीतिक दल क्या बोले?

इस फैसले पर कई लोगों ने प्रश्न उठाए हैं क्योंकि लॉटरी सिस्टम में प्रिसिंपल बनाने के लिए योग्यता का ध्यान नहीं रखा गया। राज्यपाल के इस फैसले पर कई राजनीतिक दलों ने भी आपत्ति जताई है। CPI(M) के विधायक अजय कुमार ने कहा, 'होम साइंस के प्रोफेसर ह्यूमैनिटीज डिपार्टमेंट कैसे संभाल सकते हैं। इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि शिक्षा सरकार की प्राथमिकता नहीं है।'

 

कई गैर राजनीतिक लोग भी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। हालांकि, राज्य की सत्ता पर काबिज जनता दल (यू) ने राज्यपाल के इस फैसले का बचाव किया है। जेडीयू के MLC नीरज कुमार ने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। यह फैसला विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (राज्यपाल) की तरफ से लिया गया है और राज्य सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

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