तमिलनाडु में बहुमत से 10 सीटें दूर रह गई तमिलागा वेट्री कझगम (TVK) ने कांग्रेस से समर्थन मांगा था। विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने अब जोसेफ विजय की पार्टी का समर्थन करने का एलान कर दिया है। कांग्रेस ने कहा है कि वह एक शर्त पर TVK का समर्थन करने को तैयार है कि इस गठबंधन में कोई 'सांप्रदायिक ताकत' शामिल नहीं होगी। उधर सत्ता से बाहर हुई द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) ने कांग्रेस के इस कदम को विश्वासघात बताया है। डीएमके नेताओं का कहना है कि कांग्रेस पांच सीटें भी सिर्फ DMK की वजह से ही जीत पाई है।
तमिलनाडु में कांग्रेस के इनचार्ज गिरीश चोडनकर ने एक लेटर जारी करके कहा है कि विजय ने औपचारिक रूप से कांग्रेस से समर्थन मांगा है और कांग्रेस इस पर तैयार है। इससे पहले, मंगलवार रात को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने एक मीटिंग की थी और इस मीटिंग में ही संकेत दे दिए गए थे कि TVK को समर्थन दिया जाएगा। हालांकि, अंतिम फैसला और औपचारिक एलान की जिम्मेदारी तमिलनाडु के नेताओं और प्रभारी पर छोड़ी गई थी।
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कांग्रेस की शर्त क्या है?
कांग्रेस की ओर से जारी किए गए लेटर में कहा गया है कि तमिलनाडु के लोगों और खासकर युवाओं ने एक स्पष्ट बहुमत दिया है और वे सेक्युलर, प्रगतिवादी और जनहितवादी सरकार चाहते हैं। कांग्रेस का कहना है कि वह देश में सेक्युलर, प्रगतिवादी और जनहितवादी सरकार की पक्षधर है और जनता की राय का सम्मान करना सबकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। इसलिए कांग्रेस विधायक दल ने यह फैसला लिया है कि वह सरकार बनाने के लिए TVK को पूरा समर्थन देगी।
कांग्रेस ने अपनी शर्त में कहा है, 'हमारा समर्थन इस शर्त पर है कि TVK किसी भी ऐसी सांप्रदायिक ताकत को इस गठंबधन में शामिल नहीं करेगी जो देश के संविधान में भरोसा नहीं रखती।' कांग्रेस ने यह भी कहा है कि यह गठबंधन तमिलनाडु में पेरुनथलैवर कामराज यानी के कामराज के दिनों जैसी खुशहाली लाने का काम करेगा। साथ ही, पेरियार के सामाजिक न्याय और डॉ. आंबेडकर के संवैधानिक आदर्शों पर चलने का काम करेगा।
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साथ ही, यह भी कहा गया है कि आपसी सम्मान और पर्याप्त हिस्सेदारी पर आधारित इस गठबंधन में जिम्मेदारी में भी साझेदारी होगी। कांग्रेस का कहना है कि यह गठबंधन सिर्फ यह सरकार बनाने के लिए नहीं बल्कि भविष्य के स्थानीय निकाय चुनाव, लोकसभा और राज्यसभा के लिए भी होगा।
क्या है विधानसभा का गणित?
तमिलनाडु में विधानसभा की कुल 234 सीटें हैं। इस तरह बहुमत के लिए कुल 118 सीटें चाहिए। TVK को सबसे ज्यादा 108 सीटों पर जीत मिली है। हालांकि, फिलहाल के लिए प्रभावी संख्या 107 ही होगी क्योंकि विजय जोसेफ दो सीटों से जीते हैं और उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ेगी। दूसरे नंबर पर डीएमके है जिसके कुल 59 विधायक जीते हैं। अब विजय ने डीएमके के ही खिलाफ अपना अभियान खड़ा किया तो उसके साथ जाने का सवाल तो नहीं है।
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AIADMK के 47 विधायक जीते हैं और एनडीए का हिस्सा पीएमके को 4 और बीजेपी को एक सीट पर जीत मिली है। AIADMK से भी टीवीके नेताओं से बातचीत की है और चर्चा है कि AIADMK में टूट भी हो सकती है। हालांकि, कांग्रेस के रुख से संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस को साथ रखना है तो AIADMK को बाहर रखना होगा क्योंकि वह एनडीए का हिस्सा है।
अब विजय को कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिलने के बाद, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के दो, सीपीआई के 2, सीपीएम के दो और VCK के दो विधायकों का समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस तरह विजय के समर्थन में 107+5+2+2+2+2=120 विधायक हो जाएंगे और वह आराम से बहुमत हासिल कर लेंगे। चर्चा यह भी है कि कांग्रेस को कुछ मंत्रालय भी मिल सकते हैं और बाकी के दल बाहर से ही समर्थन दे सकते हैं।