पाकिस्तान के साथ पंजाब के तरनतारन, अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट, फिरोजपुर और फाजिल्का जिले की सीमा लगती है। अटारी-वाघा बोर्डर के जरिए भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार जारी रहा लेकिन समय-समय पर पैदा हुए हालातों के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार पर काफी असर पड़ा है। अब एक बार फिर इस रूट से व्यापार शुरू करने की मांग उठने लगी है। पंजाब से आम आदमी पार्टी के सासंद, शिरोमणी अकाली दल और शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) इस रूट को खोलने की मांग कर रहा है। शिरोमणी अकाली दल (अमृतसर) तो जल्द ही अमृतसर में 'बॉर्डर खोलो' रैली करने जा रहा है।
पंजाब से आम आदमी पार्टी के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने उत्तर भारत के किसानों की इनकम बढ़ाने के लिए वाघा बोर्डर खोलने की मांग की है। मंगलवार को उन्होंने संसद में कहा कि अमृतसर-लाहौर रूट बंद होने से किसानों को बनते लाभ से वंचित किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर यह रूट खुल जाता है तो पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की आर्थिक स्थिति बदल सकती है।
यह भी पढ़ें: कांग्रेस को छोड़ना होगा 24 अकबर रोड बंगला, सरकारी आदेश पर कार्यकर्ता भड़क गए
शिरोमणि अकाली दल ने भी की मांग
पंजाब में लंबे समय तक शासन कर चुकी पार्टी शिरोमणी अकाली दल भी इस रूट को खोलने की मांग कर रही है। पार्टी के मुखिया सुखबीर बादल ने एक रैली में कहा कि बॉर्डर बंद होने से सीमावर्ती क्षेत्र में व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने वादा किया कि अगर पंजाब में उनकी सरकार बनती है तो वह वाघा और फाजिल्का बॉर्डर को फल, सब्जियों और अन्य वस्तुओं के मध्य एशियाई देशों को निर्यात के लिए खोलेंगे। उन्होंने कहा कि इस निर्यात से अमृतसर अंतरराष्ट्रीय व्यापार का केंद्र बन जाएगा और पूरे क्षेत्र को इसका लाभ मिलेगा।
जल्द होगी बड़ी रैली
शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) ने भी वाघा बॉर्डर के जरिए व्यापार शुरू करने की मांग की है। पार्टी अध्यक्ष सिमरनजीत सिंह मान ने लोगों को इकट्ठा करने के लिए 28 मार्च को अटारी-वाघा बॉर्डर पर एक बड़ी 'बॉर्डर खोलो' रैली की घोषणा की है। सिमरनजीत सिंह मान ने बताया कि उन्होंने पंजाब में किसानों, व्यापारियों और आम लोगों से इस रैली में शामिल होने के लिए कहा है। उन्होंने इस बोर्डर के खुलने से होने वाले फायदों को मीडिया के सामने रखा।
इस रूट के जरिए कितना व्यापार होता है?
भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। 2025 में पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बहुज ज्यादा बढ़ गया था और इसका असर दोनों देशों के बीच जारी व्यापार पर हुआ। अटारी-वाघा बॉर्डर व्यापार के लिए अहम है क्योंकि यह पंजाब में अमृतसर से 28 किलोमीटर और पाकिस्तान के लाहौर से 24 किलोमीटर की दूरी पर है। दोनों देशों के बीच व्यापार का यह एकमात्रा जमीनी रास्ता है। लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2018-19 में इस रूट से 4,370.78 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था, जो 2022-23 में घटकर 2,257.55 करोड़ रुपये रह गया। 2023-24 में इसमें उछाल आया और व्यापार बढ़कर 3,886.53 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, 2025 में पहलगाम हमले के बाद यह पूरी तरह से बंद हो गया।
यह भी पढ़ें: पिछले 10 सालों में 11 एयरलाइंस बंद, कहां आई दिक्कत? जानिए वजह
किन चीजों में होता था व्यापार?
आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रास्ते से भारत से सोयाबीन, पोल्ट्री फीड, सब्जियां, लाल मिर्च, प्लास्टिक दाना और प्लास्टिक यार्न जैसी चीजें निर्यात होती थीं। इसके अलावा, पंजाब से स्ट्रॉ रीपर्स यानी कृषि उपकरण भी पाकिस्तान को भेजे जाते थे, जो वहां के किसानों के लिए महत्वपूर्ण थे। वहीं, ड्राई फ्रू्ट्स, ड्राई डेट्स, जिप्सनम, सीमेंट, ग्लास, रॉक सॉल्ट और हर्ब्स पाकिस्तान से आयात की जाती थीं। ट्रांसपोर्टर, पोर्टर, दुकानदार, और छोटे व्यापारी इस रूट पर निर्भर थे।