उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विधायक पूजा पाल को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। समाजवादी पार्टी से निष्कासित होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के करीब मानी जा रहीं पूजा पाल को मंत्री बनाए जाने की उम्मीद थी लेकिन अंतिम समय में उनका नाम सूची से बाहर हो गया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि BJP ने फिलहाल उन्हें साइडलाइन कर दिया है।
पूजा पाल लंबे समय से BJP और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में बयान देती रही हैं। राज्यसभा चुनाव में BJP के पक्ष में मतदान करने के बाद उनके पार्टी में शामिल होने और सरकार में अहम जिम्मेदारी मिलने की अटकलें और तेज हो गई थीं।
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10 मई को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में छह नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जानी थी। राजनीतिक हलकों में पूजा पाल का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा था। सुत्रों के मुताबिक अंतिम समय में उनका नाम हटा दिया गया। इसके बाद BJP के अंदरूनी समीकरणों और राजनीतिक रणनीति को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि पूजा पाल ने इस पूरे मामले पर शांत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी मंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं थी और जनता की सेवा उनके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
BJP ने पूजा पाल को क्यों किया साइडलाइन?
BJP सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय संतुलन को सबसे ज्यादा महत्व दिया। खासकर पिछड़ा वर्ग और दलित समुदाय के प्रतिनिधित्व पर विशेष ध्यान दिया गया। इसी सामाजिक और राजनीतिक संतुलन के कारण कई नामों पर अंतिम समय में फिर से विचार किया गया और पूजा पाल का नाम लिस्ट से बाहर हो गया।
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सूत्रों का कहना है कि BJP के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने दूसरे दलों से आए नेताओं को सीधे मंत्री बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी। इसे लेकर संगठन और सरकार के स्तर पर कई दौर की चर्चा हुई। अंदरूनी विरोध और खींचतान को भी पूजा पाल के मंत्री न बनने की बड़ी वजह माना जा रहा है।
पूजा पाल कौशांबी जिले की चायल विधानसभा सीट से विधायक हैं। इसी जिले से उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी आते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक ही जिले से पहले से डिप्टी सीएम होने के कारण भी पार्टी ने नया मंत्री बनाने में सावधानी बरती। पार्टी के भीतर यह तर्क दिया गया कि कौशांबी को पहले से सरकार में बड़ा प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। यही वजह रही कि पूजा पाल का नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो सका।