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गुजरात में दलित दूल्हे की 'घुड़चढ़ी' के लिए 145 पुलिसकर्मी बने बाराती

मुकेश पारेचा ने किसी अप्रिय घटना की आशंका के चलते अपनी शादी में के लिए स्थानीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और पुलिस से सुरक्षा मांगी थी।

Gujarat dalit groom

प्रतीकात्मक तस्वीर।

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आजादी के 78 साल बाद भी देश में दलितों की हालत कुछ सुधरी नहीं है। आज भी देश में की जगहें ऐसी हैं जहां दलित दूल्हों को घोड़े पर नहीं चढ़ने दिया जाता। ऐसा ही मामला गुजरात के बनासकांठा जिले से सामने आया है। यहां दलित वकील मुकेश परेचा ने घोड़ी पर बैठकर अपनी शादी की बारात निकाली। इलाके में किसी दलित परिवार में घुड़चढ़ी का यह पहला मौका था।

 

मुकेश परेचा ने अपनी शादी में घुड़चढ़ी तो जरूर की, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए 145 पुलिसकर्मी मौजूद रहे। यह बारात बनासकांठा के पालनपुर तहसील के गदलवाड़ा गांव से निकल रही थी। इस शादी का दृश्य किसी भी सामान्य शादी से अलग था, क्योंकि इनकी शादी में बाराती से ज्यादा पुलिसकर्मी थे।

 

जिग्नेश मेवाणी और पुलिस से मांगी सुरक्षा

 

पेशे से वकील मुकेश पारेचा ने किसी अप्रिय घटना की आशंका के चलते अपनी शादी में के लिए स्थानीय विधायक जिग्नेश मेवाणी और पुलिस से सुरक्षा मांगी थी। उन्होंने कहा, 'हमारे गांव में, अनुसूचित जाति के लोगों ने कभी घुड़चढ़ी नहीं किया है। मैं घुड़चढ़ी करने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा। किसी अप्रिय घटना की पूरी संभावना है। आपसे अनुरोध है कि हमें पुलिस सुरक्षा प्रदान करें।'

 

पुलिस अफसर हुए शामिल

 

गढ़ पुलिस थाने के इस्पेक्टर एम वसावा ने कहा, 'हमने तीन सब-इस्पेक्टर और एक इस्पेक्टर सहित 145 कर्मियों का बंदोबस्त तैनात किया था। बारात शांतिपूर्ण तरीके से निकाली गई।' खुद जिग्नेश मेवाणी भी पुलिस अफसरों के साथ बारात में शामिल हुए।

 

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सुरक्षा के बाद भी पत्थरबाजी

 

वहीं, बनासकांठा जिला कोर्ट में वकालत करने वाले पारेचा ने कहा, 'शादी की बारात पुलिस सुरक्षा में निकाली गई। मैं घोड़े पर सवार था, इसलिए कुछ नहीं हुआ। लेकिन जब मैं घोड़े से उतरा और बारात के पीछे-पीछे अपनी कार में बैठा और मुश्किल से 500 मीटर की दूरी तय की, तो किसी ने हमारी गाड़ी पर पत्थर फेंका।'

 

उन्होंने कहा कि वो एक-दो दिन में पत्थरबाजी की घटना की पुलिस में शिकायत देंगे।

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