गुजरात में एक बड़े बच्चा चोरी गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पुलिस ने इस मामले में दो महिला एजेंट समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जो एक बड़े इंटरस्टेट रैकेट का हिस्सा बताए जा रहे हैं। इनमें दो मुख्य महिला एजेंट शामिल हैं जो मुरुगन गैंग से जुड़ी बताई जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने इस मामले में एक ऐसे व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया है जिसने अपनी नवजात बेटी को ही बेच दिया है। इस कार्रवाई के बाद इस मामले में अब तक कुल 10 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
बनासकांठा की लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) ने एक बड़े बच्चा तस्करी गिरोह की जांच करते हुए यह गिरफ्तारियां की हैं। एलसीबी की टीम ने इस गिरोह के नेटवर्क को ट्रैक करते हुए तेलंगाना तक पहुंच बनाई और वहां से दो रानी और शिवरानी नाम की दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि दोनों महिलाएं एक ही इलाके की रहने वाली हैं।
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आरोपियों ने बताए थे नाम
पुलिस ने बताया कि इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों से पूछताछ के दौरान रानी और शिवरानी के नाम सामने आए थे। इसके बाद पुलिस ने निगरानी के जरिए दोनों को गिरफ्तार कर लिया। जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह खास तौर पर उन दंपतियों को निशाना बनाता था जो संतान नहीं होने की वजह से परेशान रहते थे। खासकर हैदराबाद के आईवीएफ सेंटर आने वाले ऐसे जोड़ों को टारगेट किया जाता था और उन्हें बच्चे दिलाने का झांसा दिया जाता था। उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त करता था।
कैसे काम करता था गिरोह?
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह काफी संगठित तरीके से काम करता था। सबसे पहले ऐसे परिवारों की पहचान की जाती थी जिनके बच्चे नहीं होते थे या जो संतान के लिए परेशान रहते थे। इसके लिए आईवीएफ सेंटर्स में जाने वाले लोगों पर नजर रखी जाती थी। इसके बाद उन्हें बच्चा दिलाने का भरोसा दिया जाता था। दूसरी तरफ गरीब और कमजोर परिवारों से नवजात बच्चों को लिया जाता था। कई बार आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर या धोखे से बच्चों को लिया जाता था।
इसके बाद इन बच्चों को मोटी रकम लेकर जिन लोगों के पास बच्चे नहीं होते हैं उन्हें बेच दिया जाता था। इस पूरे नेटवर्क में कई एजेंट और बिचौलिये शामिल होते थे, जो अलग-अलग राज्यों में फैले हुए थे। पुलिस को शक है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई राज्यों में इसका नेटवर्क फैला हुआ है।
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बड़े गिरोह का शक
पुलिस ने इस मामले में लगातार छापेमारी और जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आगे और बड़े खुलासे हो सकते हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य लोगों की पहचान की जा रही है, जो इस रैकेट से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह के जरिए अब तक कितने बच्चों की खरीद-फरोख्त की गई है और किन-किन राज्यों में यह नेटवर्क फैला हुआ है। इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा और उन्हें उनके असली परिवार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।