संजय सिंह, पटना: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की सीमाओं पर भी दिखने लगा है। संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए भारत–नेपाल सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। केंद्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट घोषित किया गया है और सुरक्षा बलों को हर गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से सटी करीब 137 किलोमीटर लंबी भारत–नेपाल सीमा को सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यहां आने-जाने वाले लोगों और वाहनों की सघन जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात का फायदा उठाकर संदिग्ध तत्व या विदेशी नागरिक खुले बॉर्डर के जरिए भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर सकते हैं।
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हर आवाजाही पर नजर
रक्सौल, आदापुर और छौड़ादानो जैसे सीमावर्ती इलाकों में चौकसी काफी बढ़ा दी गई है। ये क्षेत्र नेपाल के पर्सा, बारा और रौतहट जिलों से जुड़े हुए हैं, जिससे इनकी संवेदनशीलता और बढ़ जाती है। प्रमुख चेकपोस्टों पर वाहनों की गहन तलाशी ली जा रही है और नियमित गश्त भी तेज कर दी गई है। सुरक्षा बलों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न किया जाए।
भारत–नेपाल के बीच खुली सीमा लंबे समय से तस्करी और अवैध गतिविधियों के लिए चुनौती बनी हुई है। मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी और अवैध घुसपैठ के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में मौजूदा अंतरराष्ट्रीय तनाव ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है। एजेंसियां अब आपसी समन्वय के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रही हैं, ताकि किसी भी खतरे को समय रहते रोका जा सके।
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रक्सौल बना घुसपैठ का हॉटस्पॉट
पिछले साल रक्सौल क्षेत्र में कई विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने इस इलाके को और संवेदनशील बना दिया है। साल 2025 में अलग-अलग मामलों में चीनी, इराकी, बांग्लादेशी, सूडानी और बोलिवियाई नागरिकों को अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि यह इलाका विदेशी घुसपैठ के लिहाज से बेहद अहम और संवेदनशील है।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि सभी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। फिलहाल, सीमा पर हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि देश की सुरक्षा में कोई चूक न हो।