संजय सिंह, पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने ही सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी लाइन से बाहर जाने की कीमत चुकानी पड़ेगी। बांका से JDU सांसद गिरधारी यादव की लोकसभा सदस्यता अब खतरे में पड़ती नजर आ रही है।
JDU संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामत ने लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक नोटिस देकर गिरधारी यादव को अयोग्य घोषित करने की मांग की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब पार्टी पहले से ही उनके आचरण से नाराज चल रही थी।
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क्या है पूरा विवाद?
JDU का आरोप है कि गिरधारी यादव लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। सबसे बड़ा विवाद तब सामने आया जब उन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ जाकर विपक्षी दल के उम्मीदवार के लिए प्रचार किया। दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में उनके बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन ने बेलहर सीट से चुनाव लड़ा लेकिन JDU के टिकट पर नहीं, बल्कि RJD के उम्मीदवार के रूप में। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब गिरधारी यादव ने खुले तौर पर अपने बेटे के पक्ष में प्रचार किया, जो अप्रत्यक्ष रूप से JDU के समर्थन के बराबर माना गया।
JDU ने इसे अनुशासनहीनता का गंभीर मामला माना है। पार्टी का कहना है कि एक सांसद का विपक्षी दल के लिए प्रचार करना न केवल अनुचित है, बल्कि पार्टी की विचारधारा और गठबंधन धर्म के भी खिलाफ है। हालांकि, इस चुनाव में उनके बेटे को करीब 37 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने गिरधारी यादव की राजनीतिक स्थिति को कमजोर कर दिया।
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SIR विवाद भी बना कारण
गिरधारी यादव का एक बयान भी पार्टी को रास नहीं आया। उन्होंने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे 'तुगलकी फरमान' तक कह दिया था। यह बयान उन्होंने ऐसे समय दिया जब JDU, NDA का हिस्सा है, जिससे पार्टी नेतृत्व असहज हो गया। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्हें खुद अपना नाम वोटर लिस्ट में अपडेट कराने में 10 दिन लग गए। पार्टी ने इसे सार्वजनिक रूप से सरकार और सिस्टम पर सवाल खड़ा करने के रूप में देखा।
हाल के दिनों में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी साफ दिखाई दी। नीतीश कुमार की 'समृद्धि यात्रा' के दौरान बांका में उन्हें मंच पर जगह नहीं दी गई, जिसे राजनीतिक संकेत माना गया। अब फैसला लोकसभा अध्यक्ष के हाथ में है। यदि नोटिस पर कार्रवाई होती है और गिरधारी यादव अयोग्य घोषित किए जाते हैं तो यह JDU के भीतर अनुशासन बनाए रखने का बड़ा उदाहरण बन सकता है।