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2 लाइन पढ़कर चले गए राज्यपाल, कर्नाटक विधानसभा में मचा हंगामा; 5 बड़ी बातें

कर्नाटक विधानसभा में गुरुवार को खूब हंगामा मचा। राज्यपाल ने सिर्फ दो लाइन का भाषण पढ़ा और इसके बाद वे सदन से चले गए। इस पर कांग्रेस सदस्यों ने कड़ी नाराजगी जताई।

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कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत और सीएम सिद्धारमैया व अन्य। ( Photo Credit: PTI)

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कर्नाटक विधानसभा की संयुक्त बैठक से कुछ ही समय में राज्यपाल थावरचंद गहलोत के जाने पर हंगामा मच गया। गुरुवार को कर्नाटक में विधानसभा और विधानमंडल की संयुक्त बैठक बुलाई गई थी। परंपरा के मुताबिक राज्यपाल को मंत्रिमंडल से अनुमोदित पूरा भाषण पढ़ना था, लेकिन उन्होंने सिर्फ दो लाइन पढ़ी और सदन से जाने पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने हंगामा किया।

 

राज्यपाल ने सदन में हिंदी में सिर्फ इतना पढ़ा, 'मेरी सरकार राज्य के आर्थिक, सामाजिक और भौतिक विकास को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। जय हिंद, जय कर्नाटक।'कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने राज्यपाल को रोकने की कोशिश की। वहीं अन्य कांग्रेस विधायकों ने जमकर नारेबाजी की।  

इन बिंदुओं पर राज्यपाल ने जताई थी आपत्ति

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भाषण के कुछ में बिंदुओं पर केंद्र की नीतियों की आलोचना की गई थी। मनरेगा और फंड के बंटवारे के मुद्दे पर राज्यपाल ने नाराजगी जताई थी। कर्नाटक सरकार ने सोमवार को भाषण का मसौदा राजभवन को भेजा था। राज्यपाल ने 11 आर्टिकल को हटाने को कहा था।इसमें जीएसटी घाटा, सिंचाई निधि में देरी, मनरेगा को विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन-ग्रामीण अधिनियम में बदलने की आलोचना की गई थी।

पांच प्वाइंट्स: किसने-क्या कहा?

  • कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत पर सरकार के भाषण के बजाय अपना खुद का भाषण पढ़ा। सीएम ने कहा, 'हर नए साल में राज्यपाल को विधानसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करना होता है। उनका भाषण कैबिनेट से तैयार किया जाता है। यह संवैधानिक अनिवार्यता है। आज राज्यपाल ने स्वयं का भाषण पढ़ा। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 176 और 163 का उल्लंघन है। इसलिए हम गवर्नर के रवैये के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। हम जांच कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट जाना है या नहीं। सीएम ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने संविधान के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन नहीं किया है। 

 

  • सीएम सिद्धारमैया ने कानून और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल की अगुवाई में एक मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा था, ताकि राज्यपाल को भाषण देने पर राजी किया जा सके। सरकार ने सात विवादास्पद अर्टिकल में तकनीकी मुद्दों को सुलझाने पर सहमति जताई। मगर मरेगा मुद्दे को हटाने से मना कर दिया। अब कर्नाटक सरकार पूरे मामले में वरिष्ठ अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है।

 

  • पूरे विवाद पर कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष यूटी खादर ने कहा, 'संवैधानिक निकाय एक-दूसरे का समर्थन करेंगे। राज्यपाल का कार्यालय एक संवैधानिक निकाय है। राज्यपाल और सरकार के बीच कोई टकराव नहीं है।'

 

  • सूचना एवं जल परिवहन मंत्री प्रियांक खरगे ने पूछा कि अनुच्छेद 176 और 163 का उल्लंघन कौन कर रहा है? राज्यपाल के भाषण में कही गई हर बात तथ्यात्मक है। उसमें एक शब्द भी झूठ नहीं है। लेकिन वे इसे पढ़ना नहीं चाहते। क्या राज्यपाल का कार्यालय भाजपा का दफ्तर बन गया है?

 

  • दूसरी तरफ कानून मंत्री एचके पाटिल ने कहा, 'आज लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन है। संविधान के संरक्षक माने जाने वाले राज्यपाल ने अपना कर्तव्य निभाने में विफल रहे हैं। उन्हें विधानसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करना होगा। उन्होंने संविधान का अपमान किया है। हम उचित कार्रवाई करेंगे।' 

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