पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर राज्य में शराब की दुकानों पर बैन लगाने से मना करने पर सवाल उठाया। साथ ही उनकी नियत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 2024 से जब से उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार आई है तब से ही वह यू-टर्न लेते आए हैं।
इल्तिजा ने सीएम उमर के आरक्षण, उर्दू को सुरक्षा देने, 200 यूनिट बिजली देने, नौजवानों को एक लाख नौकरियां देने से लेकर हाल ही में जम्मू-कश्मीर में शराब की दुकानों पर बैन लगाने को लेकर उनके बयान पर सवाल उठाए हैं। इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री का कहना है कि हिंदू धर्म में शराब पीने पर रोक नहीं है। इसलिए हिंदुओं पर बैन थोपना गलत होगा।
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इल्तिजा ने उमर के बयान पर घेरा
इल्तिजा ने श्रीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि मुख्यमंत्री का शराब की दुकानों पर रोक लगाने से इनकार करना तर्कहीन लगता है, जिसमें उन्होंने कहा है कि ये तो नौजवानों के ऊपर है कि वह शराब पी सकते हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि एक तरफ नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक कश्मीर में नशा मुक्ति का अभियान चला रहे हैं, इस तर्क के हिसाब से तो यहां के सभी ड्रग माफिया आपका तर्क इस्तेमाल कर सकते हैं। इल्तिजा ने कहा कि उमर अब्दुल्ला के दिए गए तर्क का इस्तेमाल करके, ड्रग पेडलर भी कह सकते हैं कि वे लोगों को ड्रग्स लेने के लिए मजबूर नहीं कर रहे हैं।
'कोई धर्म नशा नहीं सिखाता'
सीएम उमर के इस बयान पर कि जम्मू-कश्मीर में गैर मुस्लिम रहते हैं, जिनका धर्म शराब पीने की इजाजत देता है। उनके इस बयान पर इल्तिजा ने कहा कि यह एकदम गलत है क्योंकि किसी का भी धर्म नशा करने की इजाजत नहीं देता है। इस्लाम, हिंदू, सिख और ईसाई कोई भी धर्म चरस- गांजे और शराब के सेवन की इजाजत नहीं देता है।
इल्तिजा मुफ्ती ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यही तर्क सही है, तो फिर गुजरात और बिहार जैसे हिंदू बहुल राज्यों में शराबबंदी कैसे सफलतापूर्वक लागू है। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में बिना किसी बड़े विरोध के शराब पर प्रतिबंध लागू किया गया और वहां की सरकारें इसे प्रभावी ढंग से चला रही हैं।
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मुख्यमंत्री का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर अपनी धर्मनिरपेक्ष पहचान और सामाजिक सौहार्द के लिए जाना जाता है, लेकिन ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर मुख्यमंत्री का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और असंवेदनशील दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने राज्य की बहुसंख्यक आबादी की धार्मिक भावनाओं और संवेदनशीलताओं को नजरअंदाज किया है।
धर्म को ले आए सीएम उमर अब्दुला
उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री उमर अब्दुला इसमें धर्म को ले आए हैं। मैं उन्हें यह कहकर सही करना चाहती हूं कि कोई भी धर्म शराब पीने को बढ़ावा नहीं देता। उमर साहब, आप जम्मू-कश्मीर में शराब पर बैन क्यों नहीं लगा सकते, जैसा गुजरात और बिहार जैसे हिंदू-बहुल राज्यों में है? यह दुख की बात है कि मुस्लिम बहुल कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला लोगों की भावनाओं और संवेदनाओं का सम्मान नहीं करते।'
इल्तिजा मुफ्ती ने आगे कहा, 'मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि वह अपनी ज्यादातर बातों पर यू-टर्न क्यों लेते हैं? नेशनल कॉन्फ्रेंस को बड़ा जनादेश मिला है, उसके 50 विधायक हैं और उमर अब्दुल्ला के लिए जम्मू-कश्मीर में शराब पर बैन लगाने का ऑर्डर लाना 5 मिनट का काम है।'