संजय सिंह, पटना: हाजीपुर-मुजफ्फरपुर रेलखंड पर एक संदिग्ध हाईटेक कैमरा मिलने के बाद रेलवे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। सराय स्टेशन के समीप रेलवे फाटक संख्या-43 सी स्पेशल के पास सिग्नल टावर पर लगाए गए इंटरनेट प्रोटोकॉल कैमरे की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
आशंका जताई जा रही है कि रेलवे ट्रैक, सड़क मार्ग और वीआईपी मूवमेंट की निगरानी के लिए यह कैमरा लगाया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एटीएस और एसटीएफ की टीम जांच में जुट गई है। कैमरा पूरी तरह सोलर सिस्टम से संचालित था और उसमें 4-जी सिम लगा हुआ था। शुरुआती जांच में पता चला कि इसे इंटरनेट के माध्यम से दूर बैठकर ऑपरेट किया जा रहा था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक आइपी एड्रेस की जांच में इसका लिंक कर्नाटक के तटीय क्षेत्र से जुड़ा मिला है, जबकि आतंकी नेटवर्क से संभावित पाकिस्तान कनेक्शन की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि कैमरे के डाटा में कुख्यात आतंकी यासीन भटकल की तस्वीर भी मिली है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
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कैसे अचानक खुला राज?
पूरा मामला तब सामने आया जब एक दिन पहले हरियाणवी भाषा बोलने वाला एक संदिग्ध युवक समपार फाटक पर पहुंचा। उसने खुद को किसी एनजीओ से जुड़ा व्यक्ति बताया और रेलवे सिग्नल टावर पर कैमरा फिट कर वहां से निकल गया। युवक की गतिविधि पर कर्मचारी को शक हुआ। उसने तुरंत इसकी सूचना स्टेशन मास्टर मनोज कुमार को दी। स्टेशन मास्टर ने बिना देर किए आरपीएफ को जानकारी दी, जिसके बाद मामला जीआरपी हाजीपुर और मुजफ्फरपुर तक पहुंचा। पहले स्तर पर जीआरपी के एक सब-इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे और कैमरे को उतरवाकर सुरक्षित रखा गया।
रेल डीएसपी सोनपुर सहकार खान के नेतृत्व में जब गहन जांच शुरू हुई तो मामला बेहद गंभीर नजर आया। कैमरे को तकनीकी जांच के लिए मुजफ्फरपुर जीआरपी को सौंप दिया गया। रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों को भी जांच में शामिल किया गया है।
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आधुनिक तकनीक पर आधारित है कैमरा
जांच एजेंसियों के अनुसार यह कैमरा अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है और रात के अंधेरे में भी साफ रिकॉर्डिंग करने में सक्षम है। कैमरा मूवेबल था, यानी इसे दूर बैठे व्यक्ति द्वारा मोबाइल फोन से घुमाकर अलग-अलग दिशा में संचालित किया जा सकता था। पुलिस ने कैमरे से करीब एक घंटे की रिकॉर्डिंग भी निकाली है। फुटेज में रेलवे ट्रैक के साथ-साथ सड़क मार्ग की गतिविधियां भी रिकॉर्ड मिली हैं।
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि यह कैमरा किसी बड़े आतंकी हमले, रेलवे ट्रैक की रेकी, वीआईपी मूवमेंट की निगरानी अथवा हत्या जैसी आपराधिक साजिश के उद्देश्य से लगाया गया हो सकता है। इस एंगल से भी जांच की जा रही है कि कहीं संवेदनशील रेलखंड को निशाना बनाने की तैयारी तो नहीं थी।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने शुरू की जांच
शुक्रवार देर शाम एटीएस की तीन सदस्यीय टीम और एसटीएफ के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और जांच शुरू की। पूर्व मध्य रेलवे के आरपीएफ आईजी अमरेश कुमार तथा रेल एसपी बीणा कुमारी को भी पूरे मामले से अवगत कराया गया है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, जिससे कैमरा लगाने वाले संदिग्ध युवक की पहचान हो सके।
रेल एसपी बीणा कुमारी ने कहा कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। तकनीकी और सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से कैमरे के नेटवर्क, सिम और ऑपरेटिंग सिस्टम की पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल पूरे रेलखंड पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।