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POCSO एक्ट में आएगी 'रोमियो-जूलियट क्लॉज'?

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

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आपने रोमियो और जूलियट के बारे में सुना होगा। परिवार की दुश्मनी के कारण बर्बाद हुए बदनसीब प्रेमी। सदियों बाद, उनका नाम भारत के सुप्रीम कोर्ट में गूंज रहा है! एक ऐतिहासिक टिप्पणी (जनवरी 2026) में, SC ने केंद्र सरकार से POCSO एक्ट में एक "रोमियो-जूलियट क्लॉज़" लाने का आग्रह किया ताकि आपसी सहमति से बने किशोर रिश्तों को कानून के गलत इस्तेमाल से बचाया जा सके। अब क्यों? POCSO (सहमति की उम्र 18) का इस्तेमाल परिवारों द्वारा टीन कपल्स के खिलाफ हथियार के तौर पर किया जा रहा है। 


आंकड़े बताते हैं कि कुछ राज्यों में 24% मामलों में आपसी सहमति से बने टीन रोमांस शामिल हैं, जिनमें से ज़्यादातर माता-पिता द्वारा दर्ज किए गए हैं। शामली, UP का एक असली मामला – उम्र के सबूत, जमानत और गलत इस्तेमाल पर बहस छिड़ गई। रोमियो-जूलियट क्लॉज़ क्या कर सकता है? आपसी सहमति से बने टीन रोमांस उम्र का कम अंतर (आमतौर पर 2-5 साल) + सच्ची सहमति → कोई आपराधिक मामला नहीं।  यह बाल संरक्षण को कमजोर किए बिना किशोरों के बीच प्राकृतिक आकर्षण की रक्षा करता है। इसी तरह के कानून पहले से ही USA (43 राज्यों), कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों में मौजूद हैं।

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