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नवनीत सहगल के इस्तीफा क्यों? समझिए पूरा मामला

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

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एक ऐसे ही ऑफिसर थे जिनके बारे में कहा जाता था कि वे हर सरकार के फेवरेट बन गए थे। इतने फेवरेट कि एक समय वे उत्तर प्रदेश सरकार के 12 डिपार्टमेंट के इंचार्ज थे। पहले वे मायावती के भरोसेमंद थे। फिर वे अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट्स के इंचार्ज बन गए। और जब BJP सरकार आई, तो Covid के दौरान योगी सरकार के मीडिया मैनेजमेंट की ज़िम्मेदारी भी उन्हें सौंप दी गई। Covid संभालने के बाद उन्हें स्पोर्ट्स पॉलिसी का ड्राफ्ट बनाने की ज़िम्मेदारी दी गई। और जब वे रिटायर हुए, तब भी उनके पास काम आता रहा — उन्हें प्रसार भारती का डायरेक्टर बना दिया गया। यहाँ तक तो सब ठीक था। लोग कहते थे, “काश हमारी किस्मत भी उनकी तरह पलट जाती।”

लेकिन किस्मत ने ऐसा पलटा खाया कि रातों-रात उन्हें सरकार ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब पूरी लुटियंस दिल्ली में यह चर्चा है कि असली टारगेट कोई और था; वे तो बस कोलेटरल डैमेज थे। हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश कैडर के रिटायर्ड IAS ऑफिसर नवनीत सहगल की, जिनके बारे में कहा जाता था कि चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो, सहगल साहब सबके पसंदीदा बने रहते हैं। तो सवाल उठता है: वही नवनीत सहगल जिन्हें तीन साल के लिए प्रसार भारती का डायरेक्टर बनाया गया था — उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा क्यों दे दिया, और उनका इस्तीफा तुरंत क्यों स्वीकार कर लिया गया?

 

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