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एक फ्लैट में 300 बिल्लियां, बदबू से परेशान पड़ोसी, फिर हुई रेड...

पुणे नगर निगम ने कहा है कि बिल्लियों को 2 दिनों के भीतर रिलीज कर दिया जाए। नगर निगम ही उनकी देख-रेख करेगा।

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AI Generated Image. (Photo Credit: Meta AI)

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महाराष्ट्र के पुणे के मार्वल बाउंटी सोसायटी के एक फ्लैट में 300 बिल्लियां पाई गई हैं। पड़सी लगातार आ रही बदबू और आवाजों से परेशान हो गए थे। उन्होंने नगर निगम PMC से शिकायत की। जब नगर निगम के अधिकारी रेड के लिए मौके पर पहुंचे तो वे भौचक्के रह गए। 

फ्लैट में करीब 300 बिल्लियां थीं। पुलिस ने रेड के बाद कहा कि फ्लैट का मालिक बीमार बिल्लियों का इलाज करता था। वह उन्हें पकड़कर लाता, इलाज करता और छोड़ देता। लगातार बिल्लियों की बढ़ती आबादी की वजह से सोसायटी में बदबू फैली और लोग परेशान होने लगे।

पुणे नगर निगम ने बिल्लियों को का रेस्क्यू किया है। उन्हें वन विभाग को सौंपा जाएगा। 

क्या हुआ जब रेड करने पहुंची पुलिस?
पुलिस ने कहा कि फ्लैट मालिक सिर्फ बिल्लियों का इलाज कर रहा था। वह आवारा बिल्लियों को पकड़ता, उन्हें ठीक करता फिर छोड़ देता। मोहल्ले में फैल रही गंदगी की वजह से पड़ोसियों को इस पर ऐतराज हुआ और उन्होंने शिकायत दी। 

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इंस्पेक्टर नीलेश जगदले ने कहा, 'मार्वल बाउंटी सोसाइटी में एक अपार्टमेंट का मालिक अक्सर आवारा बिल्लियों को घर लाता था और जब बिल्लियां स्वस्थ हो जाती थीं तो उन्हें छोड़ देता था। इस वजह से अपार्टमेंट में कई बिल्लियां जमा हो गई थीं। गंदगी पैदा हो गई थी, जिसकी वजह से पड़ोसी परेशान हो गए थे।' 

'दो दिन में हो जाएगा बिल्लियों का रेस्क्यू'

पुलिस अधिकारी ने कहा, 'फ्लैट का मालिक 9वें फ्लोर पर रहता है। उसने कई बिल्लियां पाली थीं। उनकी वजह से दुर्गंध आती थी। शिकायत के बाद एक टीम ने वहां का दौरा किया। बिल्लियों को शिफ्ट करने के लिए नोटिस भेजा। उसे दो दिनों के भीतर फ्लैट से बिल्लियों को खाली करने के लिए कहा गया है।' 

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पुलिस अधिकारी ने कहा, 'पड़ोसियों ने नगर निगम को फोन किया। नगर निगम के अधिकारी फ्लैट पर पहुंचे। उन्होंने सर्वे किया। मालिक से कहा कि दो दिनों के भीतर बिल्लियों को छोड़ दे। अभी तक केस नहीं दर्ज किया गया है। हम कानूनी एक्शन लेने के लिए अपने सीनियर अधिकारियों और निगम अधिकारियों से चर्चा करेंगे। बिल्लियों को नगर निगम अपने कब्जे में लेगा। उन्हें बचाया जाएगा।' 

पड़ोसी क्या चाहते हैं?
पड़ोसियों का कहना है कि सिविल सोसायटी में इस तरह जानवरों को इकट्ठा करना ठीक नहीं है। पशुओं को इलाज के लिए अस्पताल लेकर जाना चाहिए, न कि सोसायटी के अंदर लाना चाहिए।

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