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हरी मिर्च में स्मैक, ड्रग, सूखा नशा..., तस्करी का ऐसा जुगाड़, NCB भी हैरान

सब्जी की दुकानों में आलू के साथ मुफ्त मिलने वाली हरी मिर्च कितनी महंगी हो सकती है? 5 या 10 रुपये में मुफ्त मिलने वाली हरी मिर्च अगर 5 हजार में एक मिलने लगे तो समझ जाइए कुछ झोल है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। AI इमेज। Photo Credit: Sora

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जोधपुर में ड्रग तस्करों ने तस्करी की ऐसा देसी जुगाड़ ढूंढा है, जिससे पुलिस भी अब तक अनजान थी। जूते में, खाने-पीने के सामानों में ड्रग छिपाने की खबरें तो आपने कई बार पढ़ी होंगी, क्या आपने कभी पढ़ा है कि मिर्च में ड्रग छिपाया गया हो। जोधपुर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। तस्करों ने मिर्च के साथ ऐसा प्रयोग किया कि पुलिस को कानो-कान खबर तक नहीं लगी और ड्रग तस्करी का जाल फैलता रहा। 

जोधपुर से हैदराबाद जा रही एक प्राइवेट बस के पार्सल में मेथिलीन डाइऑक्सी मेथैम्फेटा माइन (MDMA) की पुड़िया मिली है। बड़ी मिर्च में ड्रग भरकर बेची जा रही थी। मिर्च को बीच से फाड़ा गया था, फिर उसमें एक सिल्वर पैकेट में भरकर ड्रग पैक किया गया था। अब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो केस की पड़ताल कर रही है।  

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कैसे खुला राज?

28 जनवरी को जोधपुर से हैदराबाद जा रही एक बस में संदिग्ध मिर्च मिली। मिर्च के पार्सल में बड़ी मिर्च रखी गई थी। जब बीच से काटकर उसे देखा गया तो उसमें ड्रग निकला। मिर्च के अंदर सिल्वर पेपर में ड्रग भरा हुआ था। ड्राइवर ने इसका वीडियो बना लिया। 

 

 

हैदराबाद पुलिस ने NCB को बताया 

एक शख्स बस में आया और ड्राइवर से पार्सल मांग लिया। ड्राइवर ने मिर्च में ड्रग होने की बात की तो उसने धमकी दे दी। बोला कि अगर डिलीवर करने के पैसे मिले हैं तो पार्सल भी दे दो। शख्स ने झगड़ा करके पार्सल ले  लिया। बस ड्राइवर ने हैदराबाद पुलिस को इसकी सूचना दे दी। 

 

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NCB ने क्या अपील की है?

NCB जोधपुर ने लोगों से अपील की है कि अगर इस तरह के संदिग्ध मामले नजर आए हैं तो तत्काल NCB हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर लें। एनसीबी का कहना है कि पहले भी खाने-पीने की चीजों में तस्करी की वारदात सामने आई है लेकिन मिर्च में यह पहला मामला है। अगर आपको ड्रग तस्करी से जुड़े अपराध दिखें तो आप 1933 पर कॉल कर सकते हैं। एनसीबी नाम और पहचान सार्वजनिक नहीं करती है। 

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