अमेरिका और भारत ने शुक्रवार को व्यापार समझौते की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। दोनों देशों ने एक अंतरिम फ्रेमवर्क जारी किया, जिसमें टैरिफ कम करने, ऊर्जा संबंध मजबूत करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। इसका मकसद वैश्विक सप्लाई चेन को नए सिरे से व्यवस्थित करना है।
दोनों सरकारों ने संयुक्त बयान में कहा कि पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए दोनों देश बातचीत जारी रखेंगे, लेकिन अभी और चर्चा की जरूरत है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत के साथ एक नए व्यापार सौदे की घोषणा की थी।
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ट्रंफ का टैरिफ पर प्लान क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया था कि अमेरिका भारत से आने वाले सामान पर टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करेगा। बदले में भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा और अपने व्यापारिक रुकावटों को कम करेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, क्योंकि उनका कहना था कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध में मदद मिल रही है।
अब वेनेजुएला से भी तेल खरीदेगा भारत
शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर 25 फीसदी टैरिफ हटा दिया, क्योंकि भारत ने इस हफ्ते अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमति जताई है। शुक्रवार के संयुक्त बयान में डील की और जानकारी दी गई।
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भारत को अमेरिकी उत्पादों पर खर्च करने होंगे 500 अरब डॉलर
भारत अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदेगा। इसमें तेल, गैस, कोकिंग कोल, हवाई जहाज और उनके पार्ट्स, कीमती धातु और टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स शामिल हैं। टेक्नोलॉजी में AI के लिए इस्तेमाल होने वाले ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट और डेटा सेंटर के सामान भी हैं।
अमेरिका 18% तो भारत लगाएगा जीरो टैरिफ
भारत, अमेरिका से आने वाले ज्यादातर औद्योगिक सामान और कई खाद्य और कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म या बहुत कम करेगा। इसमें पशु चारे के लिए अनाज, बादाम, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं।
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अमेरिका को भारत क्या बेचता है?
अमेरिका भारत से आने वाले ज्यादातर सामान जैसे कपड़ा, जूते-चप्पल, प्लास्टिक, रबर, रासायनिक, घरेलू सजावट और कुछ मशीनरी पर 18 फीसदी टैरिफ रखेगा। भारत को कुछ खास राहत मिलेगी। हवाई जहाज के पार्ट्स पर अन्य सहयोगी देशों के साथ व्यापार की छूट मिलेगी, ऑटो पार्ट्स के लिए कम टैरिफ की राहत मिलेगी। दवाइयों पर चल रही जांच के आधार पर भारत को जेनेरिक दवाओं और उनके कच्चे माल पर अलग से बातचीत के बाद समझौता किया जाएगा।
पीयूष गोयल, वाणिज्य मंत्री:-
यह समझौता भारतीय निर्यातकों, खासकर किसानों, मछुआरों और छोटे-मध्यम उद्यमों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार को खोल रहा है।
अमेरिकी की सालाना जीडीपी 30 ट्रिलियन है।
व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कब होंगे?
पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा था कि दोनों देश मार्च तक औपचारिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिसके बाद भारत अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ कम करना शुरू करेगा। भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों, मेडिकल डिवाइस और कम्युनिकेशन इंस्ट्रूमेंट पर पुरानी गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर सहमति जताई है। अगले छह महीने में अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और लाइसेंसिंग मानकों को मानने का समझौता पूरा होगा।
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क्या भारत को टैरिफ में और राहत देगा अमेरिका?
अमेरिका ने कहा कि वह आगे की बातचीत में भारत की कम टैरिफ की मांग पर विचार करेगा। दोनों देश संवेदनशील तकनीक पर निर्यात नियंत्रण और चीन जैसी गैर-बाजार नीतियों के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग करेंगे।
अब उम्मीद क्या है?
कई सालों से दोनों देश पूर्ण व्यापार समझौते पर नहीं पहुंच पाए थे। कृषि, डिजिटल व्यापार, मेडिकल डिवाइस और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर विवाद थे। अब उम्मीद जताई जा रही है कि चीन के बढ़ते बाजार की तुलना में यह नया गठजोड़, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे रणनीतिक मामलो में एक होकर अहम फैसला करेंगे।
