अमेरिका और भारत ने 6 फरवरी, 2026 को व्यापार समझौते की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए एक समझौते पर मुहर लगा दी। दोनों देशों ने अंतरिम फ्रेमवर्क जारी करके टैरिफ कम करने, ऊर्जा संबंध मजबूत करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात कही है। इसका दोनों देश पालन करेंगे।

 

इस समझौते के मुताबिक, भारत ने अगले पांच सालों में अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर का सामान आयात करने पर सहमति जता दी है। मगर, भारत की सहमति सिर्फ भारतीय कंपनियों की ऑर्डर देने की काबिलियत पर ही नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि अमेरिकी सप्लायर कितनी जल्दी मांग पूरी करेंगे।

 

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पिछले साल 45.5 बिलियन डॉलर का सामान खरीदा

आंकड़ों के अनुसार, भारत ने पिछले साल अमेरिका से 45.5 बिलियन डॉलर का सामान आयात किया था। चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में, भारत ने तकरीबन 40 बिलियन डॉलर का सामान आयात किया था। इसमें लगभग 11 बिलियन डॉलर के क्रूड और पेट्रोलियम प्रोडक्ट शामिल थे। कच्चा तेल का आयात पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 35% ज्यादा थे। इसके अलावा हमने 2.7 बिलियन डॉलर का कोयले और कोक आयात किया।

तेजी से खरीदे जाएंगे ये सामान

भारत सरकार के अधिकारियों का कहना है कि यह ऐसे प्रोडक्ट सेगमेंट हैं जिनमें तुरंत बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। दरअसल, भारत रूस सहित दूसरे देशों से कच्चा तेल आयात करने की जगह अमेरिका से आयात करेगा। इसके अलावा, भारतीय तेल कंपनियों ने पहले ही अधिक LNG सोर्स करने के लिए एक एग्रीमेंट साइन कर लिया है।

 

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इंडोनेशियाई की जगह अमेरिका से खरीदारी

इसी तरह से भारत इंडोनेशियाई कोकिंग कोल की जगह अमेरिका से कोकिंग कोल का आयात कर सकता है। अधिकारी ने कहा, 'पहले साल में आयात में 100 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी नहीं हो सकती है, लेकिन यह उस दिशा में बढ़ेगा।' केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह भारतीय आयातकों और अमेरिकी विक्रेताओं पर निर्भर है कि वे उन सामानों पर काम करें जिनका आयात बढ़ाना है।

 

गोयल ने कहा, 'यह उन पर निर्भर है कि वे ऐसा ऑफर दें जिसे (भारत में) खरीदार मना न कर सकें। साथ ही चिप्स, सेमीकंडक्टर और हवाई जहाज और कंपोनेंट्स जैसे हाई-टेक प्रोडक्ट्स इस लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करेंगे।' दरअसल, भारतीय खरीदारों के लिए, पिछले ऑर्डर को देखते हुए बोइंग जैसे सप्लायर्स की सामान एक्सपोर्ट करने की क्षमता के मामले में एक चुनौती होगी।