खराब लाइफस्टाइल की वजह से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इसका असर हमारी नींद पर भी पड़ता है। आपने देखा होगा कई लोगों को खर्राटे लेने की समस्या होती हैं। महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को खर्राटे लेने की समस्या होती है।
कभी-कभी खर्राटे लेना आमतौर पर कोई गंभीर समस्या नहीं है। यह सिर्फ आपके पार्टनर के लिए खराब नहीं है बल्कि नींद की क्वॉलिटी भी खराब होती है। खर्राटे लेने की वजह से ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
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क्या होता है स्लीप एपनिया?
स्लीप एपनिया में व्यक्ति को सोते समय ठीक से सांस नहीं आती है या रुकती है जिसकी वजह से खर्राटे आते है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज की नींद पूरी नहीं होती है जिससे वह दिन भर थका हुआ महसूस करते हैं।
खर्राटे लेने की वजह से बार-बार आपकी नींद टूटती है। इसके अलावा हार्ट पर प्रभाव पड़ता है। दरअसल स्लीप एपनीया से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और इस वजह से हार्ट अटैक या स्ट्रोक आने का खतरा बढ़ जाता है।
खर्राटे लेने के मुख्य कारण क्या हैं?
- कोई व्यक्ति खर्राटे तब लेता जब नाक और मुंह से हवा को पास होने में दिक्कत महसूस होती है।
- नाक में ब्लॉकेज होना
- कुछ लोग केवल एलर्जी के मौसम में या साइनस संक्रमण होने पर ही खर्राटे लेते हैं। इसके अलावा नाक से जाने वाले वायुमार्ग में ब्लॉकेज होता है।
- जींभ और गले की मांसपेशियों की टोन खराब होना- जब जींभ और गले की मांस पेशिया बहुत ज्यादा रिलेक्स होती है तब वायुमार्ग सिकुड़ जाता है। कुछ बच्चों में बड़े टॉन्सिल और एडेनोइड्स होते हैं जिसके कारण वे खर्राटे लेते हैं।
- शराब और नशीले पदार्थ का सेवन- अधिक मात्रा में शराब और नशीले पदार्थ का सेवन करने से गले और जींभ की मांस पेशिया बहुत रिलेक्स हो जाती है जिसके कारण खर्राटे आते हैं।
- कम नींद लेने की वजह से भी खर्राटे आ सकते हैं।
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खर्राटे को ठीक करने का इलाज क्या है?
लाइफस्टाइल में बदलाव- डॉक्टर आपसे वजन घटाने, धूम्रपान छोड़ने और शराब छोड़ने को कहता है।
हमेशा करवट लेकर सोएं। कभी भी पीठ के बल न सोएं।
व्यायाम करें।
मशीन भी आती है- आप खर्राटों को कम करने के लिए मशीन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जिसे आपको रात को सोने से पहले लगाना है। इसके अलावा कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी भी करनी पड़ सकती है। डॉक्टर आपकी स्लीप साइकिल के बारे में पूछेगा। इसके बाद एक्स रे, एमआरआई स्कैन और सीटी स्कैन करेगा ताकि कारण का पता चल सकें।
