अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने सोमवार को गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी पर लगे आपराधिक फ्रॉड के सभी आरोपों को हमेशा के लिए वापस ले लिया है। न्यूयॉर्क की अदालत में चल रहे इस बड़े मामले को अब पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने कहा कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

अदाणी ग्रुप से जुड़ी अमेरिका की कई जांचें पिछले कुछ दिनों में बंद हो गई हैं। इससे पहले गौतम अदाणी के वकील रॉबर्ट गिफ्रा जूनियर ने एक प्रेजेंटेशन में बताया था कि अदाणी 10 अरब डॉलर अमेरिका में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन चल रहे मुकदमों की वजह से यह संभव नहीं हो पा रहा था।

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अदाणी ग्रुप ने भरा 27.5 करोड़ डॉलर का जुर्माना

अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) ने अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) के साथ भी सेटलमेंट कर लिया है। कंपनी ने ईरान प्रतिबंधों के उल्लंघन के मामले में 27.5 करोड़ डॉलर का जुर्माना भर दिया है। यह राशि अधिकतम संभावित जुर्माने से कम है। कंपनी ने आरोप स्वीकार नहीं किए हैं। 

LPG डील क्या थी, जिससे खफा था अमेरिका?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल के मुताबित अदाणी एंटरप्राइजेज ने साल 2023 से 2025 के बीच दुबई के एक व्यापारी से लिक्विड पेट्रोलियम गैस खरीदी, जो असल में ईरान से आ रही थी। अमेरिका ने कंपनी को कई खतरे के संकेत भेजे थे लेकिन उचित जांच नहीं की गई। इस दौरान अमेरिकी बैंकों के जरिए करीब 19 करोड़ 21 लाख डॉलर के भुगतान किए गए।

अदाणी ग्रुप ने क्या कदम उठाए हैं?

OFAC ने कंपनी के सहयोग और सुधारात्मक कदमों को ध्यान में रखते हुए जुर्माने की राशि कम कर दी। अदाणी समूह ने पहले ही LPG का आयात बंद कर दिया है और अपनी सैंक्शंस कंप्लायंस नीति को मजबूत किया है।

अब आगे क्या? 

अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भी गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ अंतिम सहमति वाले फैसले पास कर दिए हैं। गौतम अदाणी को 60 लाख डॉलर और सागर अदाणी को 1.2 करोड़ डॉलर का सिविल पेनल्टी भरना होगा।

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आरोपों पर अदाणी ग्रुप ने क्या कहा है?

अदाणी समूह ने सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वह कानून का पूरी तरह पालन करता है। इस फैसले के बाद अदाणी ग्रुप अब अमेरिका में नए निवेश की राह पर आगे बढ़ सकता है।

क्या अब दोबारा खुल सकता है केस?

अमेरिकी न्याय विभाग ने सोमवार को गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप हमेशा के लिए वापस ले लिए हैं। न्यूयॉर्क में चल रहा बड़ा फ्रॉड का केस अब पूरी तरह बंद हो गया है। कोर्ट में दाखिल एक याचिका में अमेरिकी सरकार ने कहा कि अब इस मामले में और समय और संसाधन खर्च नहीं करना चाहती। अदालत ने स्थायी रूप से केस खारिज कर दिया। इसका मतलब है कि अब यह केस दोबारा कभी नहीं खोला जा सकता।

किस मामले में फंसा था अदाणी समूह?

साल 2024 के अंत में अमेरिका ने अदाणी और उनके सहयोगियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने, भारतीय अधिकारियों को 265 मिलियन डॉलर यानी लगभग 2,200 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी, जिससे उन्हें सोलर पावर प्रोजेक्ट के ठेके मिल सकें। अमेरिकी निवेशकों और बैंकों से इसकी जानकारी छुपाई गई। 



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ईरान LPG डील केस में क्या हुआ?

अदाणी एंटरप्राइजेज ने अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के साथ 27.5 करोड़ डॉलर का समझौता किया। कंपनी पर आरोप था कि उसने ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन किया और ईरानी गैस खरीदी। कंपनी ने सहयोग किया और जुर्माना भर दिया।

क्यों अमेरिका ने वापस लिया केस?

अमेरिकी जांचकर्ताओं को पर्याप्त सबूत नहीं मिले। अमेरिका से सीधा जुड़ाव भी कम था। अदाणी समूह की ओर से अमेरिका के टॉप वकीलों की टीम ने कई महीनों तक मजबूत दलीलें दीं। अदाणी के वकील रॉबर्ट गिफ्रा ने मेहनत की। वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भी वकील हैं। उन्होंने कहा कि इस केस में न तो ठोस सबूत थे और न ही अमेरिकी अदालत में इसे चलाने का अधिकार था। गौतम अदाणी पहले ही अमेरिका में 10 अरब डॉलर का निवेश करने और 15,000 नौकरियां देने ऐलान कर चुके हैं। यह फैसला अदाणी समूह के लिए बड़ी राहत है। यह केस, उनकी कंपनी के भविष्य से जुड़ा था। अब यह हमेशा के लिए बंद हो गया है।