अक्सर आप कच्चा तेल या क्रूड ऑयल शब्द खूब सुनते होंगे। जब आप अखबार, टीवी या मोबाइल पर तेल से जुड़ी खबरें देखते हैं तब भी इसी की बात होती है। डीजल और पेट्रोल महंगा या सस्ता होता है तब भी इसी की बात होती है। यह वही कच्चा तेल है जो तेल के कुंओं से निकलता है और इसे निकालने वाली कंपनियों सीधे उन कंपनियों को इसे बेच देती हैं जो इसे साफ कर सकती हैं। ये कंपनियां जब इसी कच्चे तेल को साफ करती हैं तो उसी में से डीजल, पेट्रोल और केरोसिन जैसे तमाम तेल निकलते हैं। अब यहां आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जो भारत तेल उत्पादन के मामले में टॉप 10 में कहीं नहीं आता, वही भारत कच्चे तेल को रिफाइन करने यानी साफ करने के मामले में नंबर 4 पर आता है। यह काम करने वाली कंपनियां कितना कमा लेती हैं आज हम वही समझने वाले हैं।

 

भारत में रिलायंसं के पास कई रिफाइननिंग फैक्ट्रियां हैं। रिलायंय के अलावा इंडियन ऑयल, एस्सार, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, चेन्नई पेट्रोलियम और कई अन्य कंपनियां भी रिफाइनिंग का काम करती हैं। ये कंपनियां ही सीधे तौर पर दूसरे देशों से कच्चे तेल खरीदते हैं। कुछ कंपनियां जमीन या समुद्र में मौजूद कुओं से तेल निकालने का ठेका भी लेती हैं और तेल निकालकर बेचती भी हैं। हम फिलहाल के लिए सिर्फ उन कंपनियों का जिक्र कर रहे हैं जो भारत में तेल साफ करती हैं यानी कच्चे तेल को रिफाइन करके उनके बाय प्रोडक्ट तैयार करती हैं।

1 बैरल से समझिए पूरा गणित

 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जो कच्चा तेल मिलता है वह बैरल के हिसाब से मिलता है। एक बैरल की कीमत लगभग 70 से 90 डॉलर के बीच होती है। एक बैरल में 159 लीटर तेल होता है। अब अगर हम 80 डॉलर के हिसाब से लें तो आज की तारीख में एक बैरल तेल की कीमत लगभग 7200 रुपये होगी। अब एक बैरल में 159 लीटर तेल हुआ तो एक लीटर कच्चे तेल की कीमत लगभग 45 रुपये हुई। आपको डीजल-पेट्रोल 90 से 100 रुपये तक में मिलता है। इसकी वजह यही है कि हम जिस तेल की कीमत बता रहे हैं वह कच्चा तेल है यानी उसका इस्तेमाल आप अपनी गाड़ी में नहीं कर सकते हैं।

 

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कच्चे तेल को इस्तेमाल करने के लिए उसे रिफाइन करना होता है यानी साफ करना होता है। यही काम करने के लिए बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां लगाई जाती हैं। मोटे तौर पर ऐसे समझिए कि एक तरफ से कच्चे तेल को डाला जाएगा तो अलग-अलग तापमान पर इसी तेल से डीजल, पेट्रोल, गैसोलीन, पेट्रोलियम आदि उत्पाद निकलते हैं। अब यही रिफाइनिंग कंपनियां कुछ प्रोडक्ट खुद बेचती हैं तो कुछ प्रोडक्ट इनसे लेकर दूसरी कंपनी बेचती हैं।

कितनी होती है कमाई?

 

कच्चे तेल के एक बैरल में 159 लीटर तेल होता है लेकिन जब इसे साफ किया जाता है तो यह मात्रा बढ़ जाती है। एक बैरल तेल से लगभग 170 लीटर तक पेट्रोलियम प्रोडक्ट निकलते हैं। इसमें 72 से 78 लीटर तक पेट्रोल, 38 से 46 लीटर तक डीजल, 15 से 19 लीटर जेट फ्यूल, 8-10 लीटर LPG गैस और 20-23 लीटर अन्य उत्पाद निकलते हैं। रोचक बात है कि इसमें से सारे उत्पादों को ये कंपनियां बेच लेती हैं।

 

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कंपनियों जब एक बैरल तेल को रिफाइन करती हैं तो उनका खर्च 4 से 5 डॉलर यानी 400 से 450 रुपये के बीच आता है। प्रति लीटर के हिसाब से इसे देखा जाए तो 3 से 4 रुपये का ही खर्च आता है। ट्रांसपोर्टेशन और अन्य चीजों पर कंपनियों का खर्च 8 से 10 रुपये प्रति लीटर होता है। वहीं, डीलर्स का कमीशन 3-4 रुपये प्रति लीटर होता है और रिफाइनरी कंपनियां खुद का भी कमीशन कमाती हैं। प्रति लीटर इन कंपनियों का कमीशन 4 से 6 रुपये प्रति लीटर तक होता है।

 

बीते कुछ साल में यह देखा गया है कि रूस और यूक्रेन के युद्ध के चलते कई देशों की निर्भरता भारत पर बढ़ी है। भारतीय तेल कंपनियों ने इस मौके का जबरदस्त फायदा उठाया है। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदा और कई देशों को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया। डेटा और विश्लेषण पर काम करने वाली एजेंसी Kpler ने पिछले साल अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि साल 2025 के सिर्फ 6 महीनों में ही भारत ने 23.1 करोड़ बैरल तेल का निर्यात किया।

 

कुल निर्यात में रिलायंस की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत की थी। दुनिया के देशों को देखा जाए तो अमेरिका में हर दिन 1.8 करोड़ बैरल प्रति दिन के हिसाब से तेल की रिफाइनिंग की जा सकती हैं। वहीं, भारत 46 लाख बैरल प्रति दिन की क्षमता के साथ चौथे नंबर पर है। दूसरे नंबर पर चीन 1.5 करोड़ बैरल प्रति दिन और रूस 64 लाख बैरल प्रति दिन की क्षमता के साथ तीसरे नंबर पर है।  

 

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कंपनियां कितना कमाती हैं?

 

साल 2025 के आखिरी तीन महीनों में भारत की सरकारी कंपनियों यानी इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL ने 23,743 करोड़ का मुनाफा कमाया। वहीं, साल 2024 की आखिरी तिमाही में इन्हीं कंपनियों का मुनाफा 10,545 करोड़ रुपये था। इसकी वजह यह थी कि कच्चा तेल सस्ता मिल रहा था और रिफाइनिंग मार्जिन ज्यादा मिल रहा था। ICICI सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल का जो मार्जिन पिछले साल 3 डॉलर प्रति बैरल था वह 2025 में 12.2 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। इसी तरह BPCL का मार्जिन 5.6 डॉलर से बढ़कर 13.3 डॉलर और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का मार्जिन 6 डॉलर से बढ़कर 8.9 डॉलर तक पहुंच गया था।

क्या-क्या बेचता है भारत?

 

भले ही भारत में तेल के कुएं कम हैं लेकिन कच्चे तेल को साफ करके भारत कई सारी चीजें बेचता है। सिंगापुर, UAE और पूर्वी अफ्रीका के देश भारत के हाई स्पीड डीजल खरीदते हैं। मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के देश भारत से गैसोलीन या पेट्रोल खरीदते हैं। तमाम एयरलाइन कंपनियां भारत से ही जेट फ्यूल यानी हवाई जहाज वाला तेल खरीदते हैं। जापान, साउथ कोरिया और यूरोपियन यूनियन के देश भारत से नैफ्था (पेट्रोकेमिकल), चीन और जापान पेट्रोलियम कोक और मिडिल ईस्ट के देश भारत के लुब्रिकेंट खरीदते हैं।

 

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भारत में आप हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और रिलायंस के पेट्रोल पंप से डीजल-पेट्रोल खरीदते हैं। इन सभी कंपिनयों के पास खुद की रिफाइनरी हैं और इनका प्रमुख काम कच्चे तेल को रिफाइन करना ही है। इनमें से कई कंपनियां भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी काम करती हैं।