logo

ट्रेंडिंग:

मिडिल ईस्ट संकट से टूटा बाजार, होली पर निवेशकों के 10 लाख करोड़ डूबे

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के खतरों ने भारतीय शेयर बाजार और रुपये को बड़ा झटका दिया है, जिससे दो दिनों में निवेशकों की भारी नुकसान हुआ है।

Representative Image

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Social Media

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर भारत के स्टॉक मार्केट पर दिखने लगा है। 4 मार्च होली के दिन रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 92 के पार निकल गया, वहीं शेयर बाजार में मचे हड़कंप के कारण पिछले दो दिनों में निवेशकों के करीब 9.7 लाख करोड़ रुपये डूब गए हैं।

 

बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल की सप्लाई रुकने का डर और विदेशी निवेशकों का बड़ी मात्राा में शेयर का बेचना है। जानकारों का मानना है कि अगर यह लड़ाई लंबी खिंची, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है।

 

यह भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारतीय चाय पर असर, क्या चीन फायदा उठाएगा?

रुपये की गिरावट

होली के दिन यानी बुधवार 4 मार्च को रुपया में करीब 68 पैसे की बड़ी गिरावट देखी गई जिससे यह 92.17 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले जनवरी 2026 में रुपया 91.99 के स्तर तक गिरा था। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है इसलिए डॉलर महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

शेयर बाजार की हालत

युद्ध की खबरों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स करीब 1,710 अंक टूटकर 78,529 पर आ गया, जो पिछले एक साल का निचला स्तर है। वहीं निफ्टी 477 अंकों की गिरावट के साथ 24,389 के स्तर पर बंद हुआ।

 

बीएसई में लिस्टेड कंपनियों की कुल वैल्यू 2 मार्च के 456.17 लाख करोड़ रुपये से घटकर 446.47 लाख करोड़ रुपये रह गई।

तेल की कीमतों में लगी आग

अमेरिका और इजराइल का ईरान पर किए गए हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। ब्रेंट क्रूड 82.5 प्रति डॉलर बैरल के पार पहुंच गया है। सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर है, अगर यहां रुकावट आती है तो तेल और भी महंगा हो सकता है।

 

यह भी पढ़ें: होर्मुज बंद, महंगा हो रहा कच्चा तेल, डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ेंगे या नहीं?

इन शेयरों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर

बाजार में शेयर बेचने का दौर लगभग हर सेक्टर में दिखा। प्रमुख कंपनियों जैसे लार्सन एंड टुब्रो (L&T), इंडिगो, अडानी पोर्ट्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में 3 से 6 प्रतिशत तक की गिरावट आई। हालांकि, आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियों जैसे इन्फोसिस और एचसीएल टेक ने थोड़ी मजबूती दिखाने की कोशिश की।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय घबराहट में आकर फैसले नहीं लेने चाहिए। वहीं कुछ लोगों को मानना है कि इस समय महंगाई सबसे बड़ा जोखिम है लेकिन लंबे समय के निवेशकों के लिए यह अच्छे शेयरों को धीरे-धीरे खरीदने का मौका भी हो सकता है। फिलहाल बाजार की नजरें वैश्विक हालातों पर टिकी हैं।


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap