भारत ने समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाने के लिए एक ऐतिहासिक शुरुआत की है। Adani Ports (APSEZ) ने देश का पहला 'पोर्ट ऑफ रिफ्यूज' (Port of Refuge) सिस्टम चालू किया है। यह सिस्टम समुद्र के बीच संकट में फंसे जहाजों के लिए एक सुरक्षित ठिकाने की तरह काम करेगा। इस कदम से भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए इतनी आधुनिक व्यवस्था है।
'पोर्ट ऑफ रिफ्यूज' का मतलब है एक ऐसी सुरक्षित जगह, जहां मुसीबत में फंसा जहाज शरण ले सके। अगर समुद्र में अचानक तूफान आ जाए, जहाज का इंजन फेल हो जाए या उसमें आग लग जाए, तो वह जहाज यहां आकर रुक सकता है। यहां उसे न केवल रुकने की जगह मिलेगी, बल्कि मरम्मत की सुविधा और चालक दल को बचाने की मदद भी दी जाएगी। पहले ऐसी कोई पक्की व्यवस्था न होने से बड़े हादसों का डर बना रहता था।
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किन पोर्ट्स को चुना गया?
इस खास काम के लिए भारत के दो बड़े किनारों को चुना गया है। पश्चिमी तट पर महाराष्ट्र का 'दीघी पोर्ट' है। जो अरब सागर के जहाजों की देखभाल करेगा। वहीं पूर्वी तट ओडिशा का गोपालपुर पोर्ट है, जो बंगाल की खाड़ी में आने वाले तूफानों के दौरान जहाजों को सहारा देगा। ये दोनों पोर्ट मिलकर भारत के समुद्री रास्तों को चारों तरफ से सुरक्षित बनाएंगे।
व्यापार में कैसे होगा फायदा?
भारत का ज्यादातर जरूरी सामान जैसे तेल और गैस समुद्र के रास्ते ही आता है। जब विदेशी कंपनियों को पता चलेगा कि भारत के पास संकट के समय मदद के लिए सुरक्षित पोर्ट मौजूद हैं, तो उनका भरोसा बढ़ेगा। इससे भारत के रास्तों पर जहाजों की आवाजाही बढ़ेगी और देश की कमाई में भी इजाफा होगा। यह वैसा ही है जैसे हाईवे पर सुरक्षित पार्किंग और रिपेयरिंग की दुकान होने से गाड़ियां वहां ज्यादा चलती हैं।
प्रदूषण से मिलेगी सुरक्षा
अगर तेल से भरा कोई बड़ा जहाज समुद्र में डूब जाता है, तो उसका तेल पानी में फैलकर मछलियों और पर्यावरण को तबाह कर देता है। इस नए सिस्टम की मदद से खराब हुए जहाज को डूबने से पह ले ही पोर्ट पर लाया जा सकेगा। इससे समुद्र का पानी गंदा होने से बचेगा और समुद्री जीव भी सुरक्षित रह सकेंगे। यह दिखाता है कि भारत अब पर्यावरण को लेकर कितना गंभीर है।
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भविष्य की क्या है तैयारी?
दुनिया के विकसित देशों में यह सिस्टम पहले से चल रहा है और अब भारत भी इस रेस आ गया है। आने वाले समय में देश के और भी कई बंदरगाहों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे भारत दुनिया का एक ऐसा सुरक्षित 'शिपिंग हब' बन जाएगा, जहां से व्यापार करना सबसे आसान और भरोसेमंद होगा। यह छोटी सी शुरुआत भविष्य में भारत को ग्लोबल लीडर बनाएगी।
