भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच ट्रेड डील हो गई है। इसी को यूरोपियन कमीशन (EC) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 'मदर ऑफ ऑल द डील्स' बता रही हैं। यूरोपियन यूनियन के नेताओं और भारत ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर दस्तखत कर दिए हैं। इस फैसले से यूरोप के 27 देशों के साथ भारत का कारोबार सस्ता हो जाएगा। सस्ता का मतलब यह है कि इन देशों में अगर भारत के कारोबारी अपना सामान बेचेंगे तो कम टैक्स देना पड़ेगा। साथ ही, अगर भारत के कारोबारी इन देशों से आयात करेंगे तब भी कम टैक्स लगेगा। नतीजा यह होगा कि कई चीजें सस्ती हो जाएंगी। इसके अलावा, भारत और यूरोप के देशों में लाखों नौकरियां भी पैदा होंगी।
रोचक बात है कि यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने के लिए साल 2007 में बातचीत शुरू हुई थी। बात नहीं बनी और साल 2013 में यह बातचीत ही रोक दी गई थी। दोबारा यह बातचीत साल 2022 में शुरू हुई और अब जाकर नतीजे पर पहुंची है। इस औपचारिक समझौते के बाद कुछ ही समय में यह तय हो जाएगा कि किन चीजों पर कितना टैक्स लगेगा, उसके बाद ही ये फैसले लागू किए जा सकेंगे। माना जा रहा है कि इसे लागू होने में कम से कम 6 महीने लग सकते हैं क्योंकि यूरोपियन यूनियन और भारत कानूनी स्तर पर भी इसकी जांच करेंगे।
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मंगलवार को भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन में यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मेजबानी की। बता दें कि एंटोनियो कोस्टा और वॉन डेर लेयेन ने सोमवार को कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की थी।
नेताओं ने क्या-क्या कहा?
इस मौके पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, 'आज यूरोप और भारत इतिहास रच रहे हैं। हमने अब तक का सबसे बड़ा समझौता कर लिया है। हमने दो अरब लोगों का एक मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाया है जिससे दोनों पक्षों को लाभ होगा। यह महज शुरुआत है। हम अपने रणनीतिक संबंधों को और भी मजबूत बनाएंगे।'
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इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आज ग्लोबल ऑर्डर में बड़ी उथल-पुथल है, ऐसे में भारत और यूरोपियन यूनियन की साझेदारी अंतरराष्ट्रीय सिस्टम में स्थिरता को मजबूती देगी। इस संदर्भ में हमने यूक्रेन, पश्चिमी एशिया, इंडो पेसिफिक सहित कई वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। मैल्टी लैटरलिज्म और इंटरनेशनल नॉर्म्स का सम्मान हमारी साझी प्राथमिकता है। हम एकमत हैं कि आज के चैलेंज का समाधान करने के लिए ग्लोबल इंस्टिट्यूशन्स का समाधान अनिवार्य है।'
FTA का असर क्या होगा?
भारत के ज्यादातर उत्पादक राज्य यूरोप के देशों के साथ कारोबार करते हैं। भारत और यूरोप के बीच केमिकल, टेक्सटाइल्स, फर्नीचर, समुद्री उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट, मिनरल्स, लेदर, गहनों, कृषि उत्पाद, चाय, मसाले, प्लास्टिक और फार्मा-मेडिकल डिवाइसेज का कारोबार बड़े स्तर पर होता है।
अब चर्चा है कि इस डील से कारों के दाम में भारी गिरावट आ सकती है। मौजूदा वक्त में यूरोप में बनी कार अगर भारत के लोग खरीदते हैं तो उन्हें 70 से 110 पर्सेंट तक टैक्स देना पड़ता है यानी जितने की कार हो सकती है, उससे लगभग दोगुनी दाम पर भारत आती है। नए समझौते के मुताबिक, यह टैक्स 40 पर्सेंट आ जाएगा जिससे कारों के दाम में गिरावट होगी। यूरोपीय कार ब्रांड में मुख्य रूप से BMW, ऑडी, मर्सेडीज और वॉल्वो शामिल हैं। योजना है कि आने वाले समय में इसे और कम किया जाए और 10 प्रतिशत तक लाया जाए।
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भारत और यूरोप के बीच टेक्सटाइल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स का कारोबार खूब होता है। मौजूदा वक्त में कपड़ों और उससे जुड़े कच्चे माल पर यूरोपियन यूनियन में 10 प्रतिशत ड्यूटी लगती है। नए समझौतों के तहत इसे भी कम किया जाएगा। इसका असर होगा कि यूरोप में बांग्लादेश और वियतनाम के उत्पादों की तुलना में भारत के उत्पाद सस्ते हो जाएंगे। इसी तरह यूरोप से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक आइटम और मशीनों पर लगने वाला टैक्स भी कम किया जाएगा, जिससे भारत के ग्राहकों को फायदा होगा।
कितना कारोबार होता है?
अगर आंकड़ों को देखें तो साल 2024-24 में यूरोपियन यूनियन के भारत का कारोबार 136.53 बिलियन डॉलर (तकरीबन 12 लाख करोड़ रुपये) का कारोबार था। इसमें निर्यात लगभग 76 अरब डॉलर और आयात लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर का था। यानी भारत में बनने वाली चीजों के लिए सबसे बड़ा मार्केट यूरोप के देश ही हैं।
अगर सिर्फ सर्विस सेक्टर की बात करें तो साल 2024 में भारत ने यूरोपियन यूनियन के साथ 83.10 बिलियन डॉलर का कारोबार किया। मुख्य रूप से इसमें टेलीकम्युनिकेशन और आईटी सर्विसेज शामिल थीं। भारत दुनियाभर में जितना निर्यात करता है, उसमें से 17 प्रतिशत निर्यात यूरोपियन यूनियन के देशों में होता है।
