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भारत का 77वां गणतंत्र दिवस, एक नहीं दो-दो चीफ गेस्ट, कौन हैं दोनों?

भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस बड़े उत्साह के साथ मना रहा है। जहां कर्तव्य पथ पर देश की सैन्य ताकत के साथ-साथ 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने का जश्न और यूरोपीय संघ के साथ बढ़ती दोस्ती की झलक दिखेगी।

Antonio Costa & Ursula von der Leyen

एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन, Photo Credit- PTI

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नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस का समारोह मनाया जा रहा है, जिसे पूरा देश देख रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपति द्वारा तिरंगा फहराने से होगी। इस बार की परेड में देश की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाई जाएगी। साथ ही परेड का मुख्य विषय ‘वंदे मातरम’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ है। गणतंत्र दिवस समारोह की एक खास बात यह है कि इस बार दो चीफ गेस्ट कार्यक्रम में शामिल होंगे।

 

इस साल का आयोजन कूटनीतिक नजरिए से भी बेहद खास है, क्योंकि यूरोपीय संघ के दो सबसे बड़े नेता, यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा,  चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर ये दोनों नेता 25 से 27 जनवरी तक भारत के दौरे पर हैं। परेड में पहली बार यूरोपीय संघ की एक विशेष टुकड़ी भी मार्च करती नजर आएगी, जो भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक है।

 

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कौन-कौन हो रहा शामिल?

पेशे से डॉक्टर उर्सुला वॉन डेर लेयेन 2019 से यूरोपीय कमीशन की कमान संभाल रही हैं। उन्होंने भारत और यूरोप की साझेदारी को 'रणनीतिक और खुला' बताया है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत और यूरोपीय संघ एक ऐतिहासिक 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' (FTA) के बेहद करीब हैं, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेड डील में से एक माना जा रहा है।

 

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा का भारत से गहरा नाता है। उनकी जड़ें भारत और मोजाम्बिक से जुड़ी हैं। पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके कोस्टा के नेतृत्व में भारत और यूरोप के बीच रक्षा संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में नया समझौता 

इस दौरे के दौरान भारत और यूरोपीय संघ एक बड़े रक्षा समझौते पर मुहर लगा सकते हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूरोपीय संघ की प्रतिनिधि काजा कैलास के बीच होने वाला यह करार एशिया में जापान और दक्षिण कोरिया के बाद अपनी तरह का तीसरा बड़ा समझौता होगा।

 

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'ग्लोबल बुद्धिस्ट समिट'

बौद्ध सम्मेलन के मेहमान परेड के 'विशिष्ट अतिथियों' में एक खास समूह शामिल होगा। वह 40 देशों के बौद्ध भिक्षु और नन है। ये सभी हाल ही में दिल्ली में हुए 'ग्लोबल बुद्धिस्ट समिट' का हिस्सा थे। इस पहल के जरिए भारत दुनिया को बुद्ध की धरती से शांति, प्रेम और दया का संदेश दे रहा है। इस के जरिए भारत एक तरफ अपनी सैन्य ताकत दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ दुनिया को शांति का रास्ता भी दिखा रहा है।


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