भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को एलान किया है कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा। रबीआई की रेपो रेट में कोई बदलाव न होने की वजह से गाड़ी, घर और लोन की EMI पर कोई असर नहीं पडे़गा। अगस्त और अक्टूबर में मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया था। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।
मुद्रास्फीति अभी भी अपने टॉलरेंस लेवल से नीचे बनी हुई है, लेकिन RBI ने सावधानी बरतते हुए रेट को स्थिर रखा है। RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार एलान किया कि 4 से 6 फरवरी तक चली मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक में 6 सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर ही बनाए रखने का फैसला किया।
रेपो रेट, 5.25% पर स्थिर रहेगा। RBI के मुताबिक पिछले साल फरवरी से अब तक कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती हुई है। यह दर करीब 1.25 फीसदी है। साल 2019 के बाद सबसे तेज रेट कट साइकिल रही है। दिसंबर में हुई पिछली बैठक में 25 बेसिस पॉइंट्स कटौती की गई थी।
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भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2027 में दूसरी बार लगातार 7% से ज्यादा GDP ग्रोथ की उम्मीद है। रुपया पिछले 7 सालों में सबसे बड़ी उछाल दिखा रहा है।
RBI के नए अनुमान क्या हैं?
वित्त वर्ष 2027 के पहले क्वार्टर में अप्रैल-जून 2026 में GDP ग्रोथ 6.9 फीसदी रह सकता है। पहले 6.7 प्रतिशत का अनुमान जताया गया था। महंगाई दर 3.9 फीसदी रह सकती है, पहले 4 फीसदी अनुमान जताया गया था।
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RBI ने क्यों नहीं बदला रेपो रोट?
महंगाई कम है और आर्थिक रफ्तार तेज चल रही है लेकिन RBI अब सतर्क हो गया है। हाल के व्याार समझौतों ने इसे और बेहतर किया है। यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के साथ डील से अर्थव्यवस्था बेहतर दिशा में आगे बढ़ रही है। दुनिया में अभी वैश्विक अस्थिरता की वजह से तनाव है। इसलिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने स्थिरता बनाए रखने का फैसला किया है। यह फैसला बाजार की उम्मीदों के मुताबिक है। ब्लूमबर्ग के सर्वे में शामिल 39 इकोनॉमिस्ट्स में से ज्यादातर ने यही अनुमान लगाया था।
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आपके लिए फायदे की खबर क्या है?
लोन लेने वालों के लिए अच्छी खबर है कि EMI में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, लेकिन ज्यादा कटौती की उम्मीद कम हो गई है। RBI ने कहा है कि महंगाई और आर्थिक विकास के बैलेंस पर ध्यान रखेगा प्राथमिकता है।
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रेपो रेट क्या है?
रेपो वह ब्याज दर है, जिस पर कॉमर्शियल बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। आरबीआई ने मौद्रिक नीति के रुख को तटस्थ बनाए रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।
आरबीआई ने अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए GDP ग्रोथ रेट के अनुमान को ऊपर की ओर संशोधित कर 6.9 प्रतिशत और 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। वहीं महंगाई दर का अनुमान चालू वित्त वर्ष के लिए 2.1 प्रतिशत रखा गया है।
