जिन विरासतों को संवारने के लिए जोर लगा रही सरकार, उनमें है क्या?
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एलान किया है कि देश की धरोहरों के विकास के लिए 15 पुरातात्विक स्थलों के विकास के लिए सरकार बजट आवंटित कर रही है।

लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, आदिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस। Photo Credit: ASI
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को देश का आम बजट 2025-26 पेश किया है। उन्होंने एलान किया है कि उनकी सरकार, देश के पुरातात्विक महत्व के 15 स्थलों को विकसित करने के लिए बजट आवंटित कर रही है। वित्त मंत्री ने जिन स्थलों का जिक्र किया है, उनमें हड़प्पा सभ्यता से लेकर प्रचीन महाभारत तक के स्थल जुटे हैं, जिनके विकास की रूपरेखा अब तैयार हो सकती है। वित्त मंत्री ने इन पर्यटन स्थलों के लिए नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड बनाने का प्रस्ताव दिया है।
15 पुरातत्व स्थलों में राखीगढ़ी से लेकर सारनाथ तक का जिक्र है। ज्यादातर स्थल बौद्ध कालीन हैं। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो सभ्यताओं से जुड़े स्थल भी इस लिस्ट में शामिल हैं। सरकार इन्हें सांस्कृतिक स्थल के तौर पर विकसित करना चाहती है। इन स्थलों के बारे में बताने के लिए गाइड नियुक्त होंगे, रोड कंस्ट्रक्शन को बेहतर किया जाएगा, खुदाई की जाएगी।
यह भी पढ़ें: ट्रैक्टर, रेडियो और चारपाई वाला बजट नहीं, अब Gen Z की 'खेती' पर है जोर
निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री:-
मैं लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, आदिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस सहित 15 पुरातात्विक स्थलों को जीवंत और बेहतर अनुभवों के लिए सांस्कृतिक स्थलों के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव रखती हूं। खोदी गई जगहों को क्यूरेटेड वॉकवे के जरिए से जनता के लिए खोला जाएगा। कंजर्वेशन लैब, व्याख्या केंद्रों और गाइडों की मदद के लिए कौशल विकास पर जोर देंगे, टेक्नोलॉजी पर जोर किया जाएगा।
यह भी पढ़ें: किसान से करदाता तक, बजट में आम आदमी को क्या मिला?
जिन जगहों पर जोर दिया जा रहा है, उनमें क्या है?
- लोथल: गुजरात के भाल इलाके में प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता का एक हिस्सा छूट गया है। बंदगाह के इस शहर में सिंधु घाटी सभ्यता की एक नगरी लोथल थी। करीब 2400 ईसा पूर्व का यह शहर अपनी बेहतरीन स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्धा है। यहां एक विशाल गोदीबाड़ा है, जो दुनिया का सबसे पुराना कृत्रिम बंदरगाह माना जाता है। यह साबरमती नदी की पुरानी धारा के जरिए अरब सागर से जुड़ा था। इस रास्ते मेसोपोटामिया और मिस्र के साथ व्यापार होता था। लोथल में खुदाई के दौरान कारखाना, तांबे की वस्तुएं, मुहरें और शतरंज जैसा दिखने वाला खेल मिला नजर आया। यहां नालियों की बेहतरीन व्यवस्था थी। 1954 में भारतीय पुरातत्वविद् एस आर राव ने इसे खोजा था।
लोथल। Photo Credit: indiacinehub.gov.in/ - धौलावीरा: यह प्राचीन स्थल गुजरात के कच्छ में खादिर बेट द्वीप पर है। यह सिंधु घाटी सभ्यता का पांचवा सबसे बड़ा शहर था। यह कच्छ के रण के बीच में है। यहां मानसर और मनहर नाम दी दो नदियां बहती हैं। यहां एक दुर्ग, एक निचला नगर और विशाल पत्थर जैसी दीवारें मिलीं हैं। यहां एक साइन बोर्ड जैसी आकृति भी है। सिंधु लिपि में कुछ लिखा भी है। यहां सफेद बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल भी हुआ है। इस शहर को जगतपति जोशी ने 1967-68 में वैश्विक पहचान दी थी। यह शहर भी युनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शुमार है।
धौलावीरा। Photo Credit: gujarattourism.com - राखीगढ़ी: यह पुरातत्व स्थल हरियाणा के हिसार में है। सिंधु घाटी सभ्यता के निशान भी यहां मिलते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां सरस्वती और दृशद्वती नदियां कभी रही होंगी। यह हड़पप्पा सभ्यता के सबसे बड़े शहरों में से एक है। इसका विस्तार 350 से 500 हेक्टेयर में फैला है। राखीगढ़ी का उत्खनन साल 1997-1999 के बीच में जोर पकड़ा। तब पुरातत्वविद्न अमरेन्द्र नाथ के निर्देशन में इसे वैश्विक पहचान मिली। यहां पक्की ईंटों के घर हैं, नालियां हैं, नालियों के निकलने का बेहतर तंत्र है। अनाज रखने के लिए कोठार भी यहां हैं। मिट्टी के बर्तन, टेराकोटा की चूड़ियां और पत्थरों के रत्न भी यहां मिले हैं। यहां कंकाल भी मिले, जिन पर शोध हो रहा है।
राखीगढ़ी। Photo Credit: Haryana Tourism - आदिचनल्लूर: यह स्थल,तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में है। यहां से ताम्रपर्णी नदी गुजरती है। दक्षिण भारत की प्राचीन सभ्यताओं की झलक यहां मिलती है। यहां मिट्टी के कलशों में मृतकों के अवशेष मिले थे, जो 1000 से 600 ईसा पूर्व के थे। लोहे के हथियार, तांबे और दूसरे धातुओं के औजार मिले थे। इस सभ्यता के लोगों को धातु विज्ञान का ज्ञान था। यहां व्यवस्थित सामाजिक व्यवस्था थी। कुछ विद्वान इसे तमिल संस्कृति का केंद्र मानते हैं। साल 1876 में यहां विस्तृत पड़ताल एंड्रयू जेगर ने की थी।
आदिचनल्लूर। Photo Credit: www.tnarch.gov.in - सारनाथ: वाराणसी के पास यह शहर, आध्यात्मिक और एतिहासिक विरासत का केद्र है। यहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद पहला उपदेश दिया था। यहां का स्तूप, वैश्विक आकर्षण का केंद्र है। सम्राट अशोक द्वारा बनवाया गया 'सिंह चतुर्मुख स्तंभ' यहीं से मिला था। यह भारत का राष्ट्रीय चिह्न है। यह नगरी, बौद्ध और जैन संस्कृतियों का केंद्र है। यहां आक्रांता मोहम्मद गोरी ने भीषण तबाही मचाई थी। साल 1905 में पुरातत्व विभाग ने यहां व्यापक खुदाई शुरू की थी। दुनियाभर के बौद्ध और जैन अनुयायियों का ध्यान यहां गया। यह भी यूनेस्को तहर विश्व धरोहर घोषित हो चुका है।
सारनाथ। Photo Credit: PTI - हस्तिनापुर: हस्तिनापुर महाभारत कालीन शहर है। यह कुरु वंश की राजधानी कही जाती है। साल 1950 से 1952 के बीच यहां बी लाल की अगुवाई में उत्खनन की शुरुआत हुई थी। यहां 1200 से 800 ईसा पूर्व की सांस्कृतिक झलक मिली। वैदिक कालीन भारत के भी यहां प्रमाण मिले। यहां बाढ़ आने के साक्ष्य भी मिले हैं। यहां पांडवों का टीला भी मिला है। अब यहां कई बड़े जैन मंदिर बन गए हैं।
महाभारत कालीन यह शहर, अब जैन संस्कृति का केंद्र बन गया है। Photo Credit: UP Tourism - लेह महल: लद्दाख में लोग इसे ल्हाचेन पाल्कर के नाम से भी जानते हैं। यह लेह शहर में हैं और एक पुराना शाही महल है। साल 1600 ईस्वी में इस महल का निर्माण नामग्याल राजवंश के राजा सेंगगे नामग्याल ने कराया था। यह महल, भारत और तिब्बत की सांस्कृतिक एकता को भी दिखाता है। इसो छोटा पोताला पैलेस भी कहते हैं। पोताला पैलेस, ल्हासा में है। यह महल, 9 मंजिला ऊंचा है। ऊपरी मंजिल पर शाही परिवार रहता है, नीचली मंजिलों पर पशु और अनाज भंडार थे। पत्थर, मिट्टी और लकड़ी से बना यह महल, देखने में बहुत सुंदर है। 19वीं शताब्दी में डोगरा सेनाओं ने यहां कब्जा कर लिया था। अब यह महल, ASI के संरक्षण में है।
लेह महल। Photo Credit: incredibleindia.gov.in
यह भी पढ़ें: बिना किसी एलान के भी बजट के जरिए चुनावी राज्यों को कैसे साध सकती है बीजेपी?
और क्या खास होगा?
केंद्र सरकार ने यूनियन बजट 2026-27 में पर्यटन, संस्कृति और विरासत को बड़ा बढ़ावा दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा है कि भारत को वैश्विक पर्यटन हब बनाने पर जोर दिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर में ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी सुधारी जाएगी। प्राकृति ट्रेल्स और हाइकिंस साइट्स को सुधारने पर सरकार जोर देगी। ओडिशा, कर्नाटक, केरल के समुद्री कछुआ प्रजनन के लिए मशहूर जगहों पर टर्टल ट्रेल्स विकसित किया जाएगा।
इन ट्रेल्स का मकसद पर्यटकों को प्रकृति के प्रति जागरूक करना और दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण है। जिन जगहों पर प्रवासी पक्षी आते हैं, वहां बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स तैायर किए जाएंगे। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की कई झीलों में पर्यटन के अवसर बढ़ने वाले हैं। सरकार बौद्ध सर्किट पर जोर दे रही है। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में मंदिर-मठों का संरक्षण किया जाएगा, तीर्थयात्रा केंद्र बनाए जाएंगे।
यह भी पढ़ें: ट्रंप के टैरिफ से जिन सेक्टरों को झटका लगा, उन्हें बजट में क्या मिला?
सरकार क्या नया कर रही है?
15 पुरातात्विक स्थलों का विकास सरकार करेगी। संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वृहद योजनाएं बनाई जाएंगी। 10,000 टूर गाइड्स को IIMs के साथ विश्वस्तरीय 12-सप्ताह की ट्रेनिंग दी जाएगी। नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी में अपग्रेड किया जाएगा। सरकार
नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड का सभी पर्यटन स्थलों का डिजिटल दस्तावेजीकरण होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि बजट से पर्यटन सेक्टर को नई दिशा मिले।
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap



