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ट्रंप के टैरिफ से जिन सेक्टरों को झटका लगा, उन्हें बजट में क्या मिला?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ से भारत के कई सेक्टरों को निशाना बनाने की कोशिश की। मगर ज्यादा कुछ प्रभाव नहीं दिखा है। अब बजट 2026 में केंद्र सरकार ने इन सेक्टरों को कितना धन आवंटित किया है, आइये जानते हैं।

Finance Minister Nirmala Sitharaman and Donald Trump.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और डोनाल्ड ट्रंप। ( Photo Credit: PTI/Social Media)

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अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत का निर्यात बढ़ रहा है। 2024 की तुलना में 2025 में करीब 19.4 फीसद निर्यात वृद्धि हुई। पिछले साल नवंबर महीने में अमेरिका को भारत का निर्यात 22 फीसद बढ़कर 7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह सब ट्रंप के 50 फीसद टैरिफ के बाद हुआ। भारत का सबसे मजबूत निर्यात इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में रहा है। 

 

ट्रंप के टैरिफ ऐलान के वक्त आशंका जताई गई थी कि कृषि, कपड़ा, वाहन और कलपुर्जा, आभूषण-रत्न और झींगा उद्योग प्रभावित होंगे। यही अनुमान लगाया गया था कि माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में आइये जानते हैं कि इन सेक्टरों को बजट 2026 में कितनी धनराशि मिली?

 

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एमएसएमई: केंद्रीय बजट में सरकार ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) पर खास फोकस किया है। 10,000 करोड़ रुपये का एक ग्रोथ फंड बनाया जाएगा। यह फंड एक गेम चेंजर साबित होगा।  इसके अलावा सरकार इस सेक्टर को सप्लाई चेन से जोड़ेगी। रोजगार और निर्यात पर मुख्य फोकस किया जाएगा। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय को कुल 24566 करोड़ रुपये का बजट मिला है।

 

समुद्री उत्पाद: भारत करीब 7.45 अरब डॉलर के समुद्री उत्पाद निर्यात करता है। इनमें झींगे की हिस्सेदारी लगगभग 66 फीसद है। वहीं भारत ने अपने कुल झींगा निर्यात में करीब 40 फीसद अमेरिका भेजता है। अनुमान जताया गया था कि अमेरिकी टैरिफ से यह सेक्टर प्रभावित हो सकता है, लेकिन भारत ने चीन को अपना निर्यात बढ़ाया है। इससे अमेरिका से होने वाले नुकसान की भरपाई करने में काफी मदद मिली। वहीं बजट में अबकी बार मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय को कुल 8915 करोड़ रुपये का बजट मिला है। इसमें अकेले मत्स्य पालन विभाग को 2761 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

 

कपड़ा उद्योग: अमेरिकी टैरिफ से कपड़ा उद्योग को भारी नुकसान की आशंका जताई गई थी। विश्लेषकों का अनुमान था कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के कपड़े भारत की जगह ले सकते हैं। हालांकि यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार समझौते से यह भरपाई पूरी की जा सकती है। यहां पाकिस्तान और बांग्लादेश की चिंता बढ़ गई है। उन्हें लगता है कि भारत कपड़ों के कारण उन्हें यूरोपीय बाजार छोड़ना पड़ सकता है। भारत अपने कुल वस्त्र और परिधान निर्यात में करीब 30 फीसद अमेरिका भेजता है। बजट में केंद्र सरकार ने कपड़ा सेक्टर पर खास फोकस किया है। कपड़ा मंत्रालय को कुल 5279.01 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।

 

कलपुर्जे: भारत हर साल करीब 7 अरब डॉलर के ऑटो कलपुर्जे निर्यात करता है। अमेरिका के बाद 20 फीसद कलपुर्जे यूरोपीय संघ को बेचे जाते हैं। अबकी बजट में सरकार ने हेवी इंडस्ट्रीज को 7939 करोड़ रुपये का वजट आवंटित किया है। 

 

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कृषि क्षेत्र: बजट में कृषि क्षेत्र को कुल 140528 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है। कृषि और किसान कल्याण विभाग को 130561 और कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग 9967 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। भारत अमेरिका को करीब 5.8 करोड़ रुपये के कृषि उत्पाद निर्यात करता है। आशंका जताई गई थी कि टैरिफ का भारत के किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। लागत कम करने के लिए किसानों को करीब 1.70 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी दी जाएगी। 

 


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