वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज देश का साल 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। यह उनके जीवन का नौवां बजट है। इस बजट में मंत्रियों के वेतन, राजकीय मेहमानों पर होने वाले खर्च और पूर्व राज्यपालों पर होने वाले खर्च में बढ़ोतरी की गई है। सरकार के इन बढ़े हुए खर्चों को लेकर राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। कई आलोचकों का कहना है कि जब बाजार और आम निवेशकों पर दबाव की स्थिति हैं, तब वीआईपी खर्चों में बढ़ोतरी की क्या जरूरत है। जिसके विरोध में सरकार का कहना है कि प्रशासनिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खर्च आवश्यक हैं।
रविवार को जब बजट पेश किया जा रहा था तब शेयर बाजार धड़ाम से गिर गया। इसकी वजह से लोगों के लाखों के निवेश डूब गए । इस साल के बजट के अनुसार, मंत्रियों के वेतन, राजकीय मेहमानों और पूर्व राज्यपालों पर कुल 1102 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है, जबकि पिछले साल यह खर्च 978.20 करोड़ रुपये का था। इसके साथ ही कैबिनेट सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) जैसे महत्वपूर्ण कार्यालयों के लिए भी अलग-अलग राशि तय की गई है।
मंत्रियों पर करोड़ों का खर्च
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में मंत्रियों के खर्च में बढ़ोतरी की गई है। इस साल मंत्रियों के वेतन और भत्तों के लिए 620 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री, उनके भत्ते और यात्रा खर्च शामिल हैं, जबकि 2025-26 के बजट में यह खर्च 483.54 करोड़ रुपये था।
NSCS पर खर्च
राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) के प्रशासनिक कार्यों के लिए 256.19 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जबकि 2025-2026 में इसके लिए 279.74 करोड़ रुपये का प्रावधान था। प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइज़र के कार्यालय के लिए 65 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि 2025-2026 में यह राशि 61.32 करोड़ रुपये थी।
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PMO और सचिवालय का खर्च
कैबिनेट सचिवालय को बजट में 80 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि 2025-26 में यह राशि 78 करोड़ रुपये थी। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को 2026-27 के लिए 73.52 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वहीं 2025-2026 में पीएमओ के प्रशासनिक खर्च के लिए 68 करोड़ रुपये दिए गए थे।
मेहमानों पर खर्च
बजट के अनुसार 2026-2027 में राजकीय मेहमानों के सुख-सुविधा के ऊपर 5.76 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि 2025-2026 में यह राशि 6.20 करोड़ रुपये थी। इस साल के बजट दस्तावेजों से साफ है कि प्रशासनिक कामकाज के खर्चों पर फोकस बढ़ा है। इसमें वेतन, भत्ते, यात्रा और अन्य खर्च शामिल हैं, जिससे सरकारी संस्थानों के काम सही ढंग से हो सके।