केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण ने संसद में साल 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया है। वित्त मंत्री के बजट में अर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, कॉमर्स, कृषि और गंभीर बीमारियों पर जोर दिया गया है। सरकार ने एक्सपोर्ट से जुड़े कई नियमों में बड़ा बदलाव किया है, अमेरिकी टैरिफ की चुनौतियों से उबरने के लिए बजट में व्यापार को लेकर उदारता दिखाई गई है। तमिलनाडु और दूसरे तटीय राज्यों की कॉमर्शियल फसलों के लिए वित्त मंत्री ने कई योजनाओं का एलान किया है। निर्मला सीतरामण ने दूसरे राज्यों को क्या सौगात दी है, इसकी जुड़ी जानकारियां भी सामने आ रही हैं।
सरकार ने अनुमान जताया है कि देश की विकास दर करीब 7 फीसदी रहेगी। सरकार ने डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं, नागरिकों को लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं, सार्वजनिक निवेश, मौद्रिक स्थिरता, राजकोषीय घाटा, संरचनात्मक सुधार को लेकर ध्यान दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के जवाब में वित्त मंत्री ने अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर ध्यान देने की बात कही है। केंद्रीय राज्यों को क्या ग्रांट मिला है, आइए जानते हैं-
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केंद्र सरकार के बजट में राज्यों को क्या मिला?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों को वित्त आयोग के सुझावों के मुताबिक साल 2026-27 (FY 27 यानी अप्रैल 2026 से मार्च 2027 तक) के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया है। ये पैसे वित्त आयोग ग्रांट्स के नाम से दिए जाते हैं। ये केंद्र से राज्यों को मिलने वाली अतिरिक्त मदद होती है। ग्रामीण निकायों, शहरी स्थानीय निकायों और आपदा प्रबंधन के लिए यह राशि जारी हुई है। गांव पंचायतों, नगर निगम, नगर पालिका और बाढ़, सूखा और भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने के लिए राज्यों को आर्थिक मदद दी गई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया है कि 17 नवंबर 2025 को, 16वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपी थी। अब संविधान के अनुच्छेद 281 के तहत सरकार को आयोग की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट संसद में पेश की जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एलान किया है कि सरकार ने राज्यों को दिए जाने वाले हिस्से को 41 फीसदी पर ही रखने की बात मान ली है। वित्त आयोग ने यह सिफारिश की थी।
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वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा, 'आयोग की सिफारिश के अनुसार, मैंने वित्त आयोग अनुदान के रूप में FY 2026-27 के लिए राज्यों को ₹1.4 लाख करोड़ दिए हैं। इनमें ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय और आपदा प्रबंधन अनुदान शामिल हैं।'
कर्ज से कैसे निपटेगी सरकार?
केंद्रीय बजट में सरकार ने कर्ज को काबू में रखने की कोशिश की है, जिससे ब्याज पर कम पैसे जाएं और विकास कार्यों पर ज्यादा खर्च हो सके। लक्ष्य है कि साल 2030-31 तक केंद्र सरकार का कर्ज GDP का 50 फीसदी रह जाए। साल 2025-26 में संशोधित अनुमान के मुताबिक कर्ज GDP का 56.1% फीसदी है। 2026-27 के बजट में अनुमान जताया गया है कि कर्ज GDP का 55.6 फीसदी तक पहुंच सकता है। यह थोड़ा कम हो रहा है।
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राजकोषीय घाटे का क्या हुआ?
निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार ने 2021-22 में वादा किया था कि 2025-26 तक फिस्कल डेफिसिट GDP के 4.5 फीसदी से नीचे आएगा वह पूरा हो गया है। साल 2025-26 में यह 4.4 फीसीद पर है। अब 2026-27 में इसे और कम करके 4.3 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। वित्त मंत्री के बयान से यह साफ है कि अब सरकार उधार कम ले रही है, कर्ज का बोझ धीरे-धीरे घट रहा है। इससे आगे चलकर ब्याज कम चुकाना पड़ेगा और विकास पर ज्यादा सरकार ध्यान दे सकेगी। 2025-26 के संशोधित अनुमान बताते हैं कि सरकार सरकार की कमाई, बिना उधार के करीब 34 लाख करोड़ रुपये है। कुल खर्च करीब 49.6 लाख करोड़ रुपये है। इसमें कैपिटल खर्च सड़क, रेल, फैक्ट्री जैसे क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा।