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ट्रैक्टर, रेडियो और चारपाई वाला बजट नहीं, अब Gen Z की 'खेती' पर है जोर

इस साल के बजट को लेकर कई तरह की चर्चा हो रही है क्योंकि इसमें लोक लुभावन योजनाएं नहीं हैं। इसकी वजह है कि यह बजट इन्फ्रा और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देने वाला है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

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समय की रफ्तार बहुत तेज है और यह चीज इस साल के बजट में भी देखने को मिली। कुछ साल पहले तक जहां भारत के बजट को लोग रेडियो पर कान लगाकर सुनते थे, अब उसी बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑरेंज इकॉनमी, चिप मेकिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट देने की बात हो रही है। कभी चारपाई पर बैठकर सुना जाने वाला बजट अब यह बता रहा है कि भारत आने वाले समय में अपनी चीजें खुद बनाएगा। हाई स्पीड रेल नेटवर्क से शहरों को जोड़ा जाएगा और उन शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत भी किया जाएगा। 

 

बजट में ज्यादातर जो अलोकेशन है वह नई पीढ़ी को ध्यान में रखकर किया गया है। चाहे युवाओं को डिजाइन सिखाने के लिए इंस्टिट्यूट की बात हो, AI पर निवेश, डेटा सेंटर वाली कंपनियों को दी गई छूट हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की बात हो। बजट दिखाता है कि भारत उन क्षेत्रों में निवेश की ओर बढ़ रहा है जो आने वाले दो-तीन दशकों में भारत की नई पूंजी बन सकते हैं।

कॉन्टेंट क्रिएटर्स को क्या मिला?

 

इस जमाने में कॉन्टेंट का प्रोडक्शन और कंजम्पशन खूब हो रहा है। इसी को एनिमेशन, विजुअलर इफेक्ट, गेमिंग और कॉमिक्स यानी AVGC सेक्टर कहा जाता है। अब सरकार ने एलान किया है कि इन कॉन्टेंट क्रिएटर्स के लिए लैब स्थापित की जाएंगी। देश के 15 हजार मिडिल लेवल स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कॉन्टेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित होंगी। इन लैब्स में एनिमेशन बनाना, वीडियो प्रोडक्शन, गेम डिजाइनिंग और डिजिटल स्टोरीटेलिंग सिखाई जाएगी।  

 

यह भी पढ़ें: किसान से करदाता तक, बजट में आम आदमी को क्या मिला?

महिला शक्ति पर फोकस

 

महिलाओं को समृद्ध करने की दिशा में शी मार्ट बनाकर उन्हें स्वरोजगार से जोडने का एलान किया गया है। इसके अलावा, स्किल डेवलपमेंट पर खूब खर्च होने वाला है और इसके बजट में 62 पर्सेंट की बढ़ोतरी की गई है। इतना ही नहीं, हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाने का भी एलान किया गया है। 5 यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाने का भी एलान किया गया है। साथ ही, कॉरपोरेट मित्र काडर बनाने का एलान किया गया ताकि छोटे कारोबारी ट्रेनिंग लेकर अपने उद्योग बढ़ा सकें।

साथ ही, 10 हजार टूरिस्ट गाइड तैयार किए जाएंगे और 1.5 लाख लोगों को केयरगिवर्स की ट्रेनिंग की जाएगी। साथ ही, मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश किया जाएगा। यह दर्शाता है कि भारत अब खुद को आर्थिक तौर पर समृद्ध और स्वतंत्र बनाने की कोशिश कर रहा है। 

 

बीते कुछ समय में डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों, टैरिफ के दबाव और चीन से रिश्तों को ध्यान में रखते हुए अब भारत ने अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करने का फैसला किया है। साथ ही, इस पर भी ध्यान दिया जाएगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भारत के युवाओं पर बुरा असर न पड़े। 

 

यह भी पढ़ें: ट्रंप के टैरिफ से जिन सेक्टरों को झटका लगा, उन्हें बजट में क्या मिला?

बदलाव क्या हुआ है?

 

पूर्व में आए ज्यादातर बजट में नई-नई योजनाओं का एलान होता था और लोकलुभावन योजनाओं का एलान भी होता था। पहली बार ऐसा देखा गया कि बजट में एक भी बड़ी या प्रत्यक्ष लाभ वाली योजना का एलान नहीं किया गया। यहां तक कि जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, उनके लिए भी किसी खास पैकेज या ऐसी किसी योजना का एलान नहीं हुआ जिनके जरिए मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की जाए।

 

भारत की इकॉनमी की रफ्तार रोकने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि वह बहुत सारी चीजों के लिए आयात पर निर्भर है। तेल और गैस जैसी चीजें तो ऐसी हैं जो भारत में नहीं हैं या कम हैं। ऐसे में उनको छोड़कर भारत उन चीजों की मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दे रहा है जिनके लिए भारत को मोटी रकम चुकानी पड़ती है। साथ ही, यह भी कोशिश की जा रही है कि इन सेक्टरों में मैन्युफैक्चरिंग मजबूत करने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी पैदा किए जाएं और भारत की बड़ी वर्क फोर्स का फायदा लिया जा सके।

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