आज के दौर में हम सभी किसी न किसी तरह से बिजनेस की दुनिया से जुड़े हुए हैं। चाहे हम किसी मॉल में शॉपिंग कर रहे हों, किसी ऐप से खाना ऑर्डर कर रहे हों या अपनी पसंदीदा कोल्ड ड्रिंक खरीद रहे हों हर जगह पर्दे के पीछे बिजनेस का एक बड़ा खेल चल रहा होता है। अक्सर न्यूज में या सोशल मीडिया पर हम कुछ ऐसे शब्द सुनते हैं जो सुनने में तो बहुत हाई-प्रोफाइल लगते हैं लेकिन असल में उनका मतलब हमारी रोजमर्रा की लाइफ से जुड़ा होता है। 

 

इन शब्दों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि इनके पीछे छिपी चालाकी या रणनीति को जानकर आप एक स्मार्ट ग्राहक और समझदार निवेशक बन सकते हैं। जब आप इन शब्दों का असली मतलब समझ लेते हैं, तो आप बाजार की उस भाषा को डिकोड कर पाते हैं जिसे बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती हैं। यह जानकारी आपको न केवल चर्चाओं में आगे रखेगी, बल्कि बाजार के उतार-चढ़ाव को देखने का आपका नजरिया भी पूरी तरह बदल देगी।

 

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1. Upselling (अपसेलिंग)

यह एक ऐसी सेल्स तकनीक है जिसमें दुकानदार आपको आपके बजट से थोड़ा महंगा या प्रीमियम सामान खरीदने के लिए प्रेरित करता है। जैसे जब आप छोटा बर्गर मांगते हैं और काउंटर पर खड़ा व्यक्ति आपसे कहता है कि 'सिर्फ 20 रुपये में इसे बड़ा करवा लीजिए', तो वह 'अपसेलिंग' कर रहा होता है।

2. Exit Strategy (एग्जिट स्ट्रैटेजी)

इसका मतलब है किसी बिज़नेस से बाहर निकलने का रास्ता। जब कोई इंसान किसी कंपनी में पैसा लगाता है, तो वह पहले से सोच कर रखता है कि भविष्य में वह अपनी हिस्सेदारी बेचकर अपना मुनाफा कैसे और कब निकालेगा। जैसे कंपनी को किसी बड़ी कंपनी के हाथों बेच देना या उसे शेयर बाजार में उतार देना ताकि निवेशक अपना पैसा मुनाफे के साथ वापस पा सकें। सरल भाषा में कहें तो, 'बिजनेस से कमाई करके बाहर निकलने का प्लान।'

3. Cannibalization (कैनिबलाइजेशन)

जब कोई कंपनी अपना ही एक नया प्रोडक्ट बाजार में लाती है और वह नया प्रोडक्ट उसी कंपनी के पुराने और अच्छे चल रहे प्रोडक्ट की बिक्री को कम करने लगता है, तो इसे 'कैनिबलाइजेशन' कहते हैं। यानी कंपनी का नया सामान उसके पुराने सामान के ही ग्राहकों को अपनी ओर खींच लेता है।

4. Network Effect (नेटवर्क इफेक्ट)

इसका मतलब है कि किसी चींज को जितने ज्यादा लोग इस्तेमाल करेंगे, उसकी वैल्यू उतनी ही बढ़ती जाएगी। जैसे-जैसे किसी ऐप पर यूजर्स बढ़ते हैं, वह ऐप और भी पावरफुल हो जाता है और फिर नए कॉम्पिटिटर के लिए उस कंपनी को हराना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

5. Zero-Sum Game (जीरो-सम गेम)

बिजनेस में यह उस स्थिति को कहते है जहां एक का फायदा पूरी तरह से दूसरे के नुकसान पर टिका होता है यानी अगर एक पक्ष ने कुछ जीता है, तो दूसरे ने पक्का कुछ खोया होगा। इसमें पूरा लाभ और हानि का जोड़ हमेशा 'जीरो' रहता है।

6. First-Mover Advantage (फर्स्ट-मूवर एडवांटेज)

जो कंपनी किसी नए आइडिया को दुनिया में सबसे पहले लेकर आती है, उसे जो शुरुआती बढ़त और नाम मिलता है, उसे ही 'फर्स्ट-मूवर एडवांटेज' कहते हैं। यह कंपनी को बाजार में अपनी पकड़ बनाने का सबसे पहला और सुनहरा मौका देता है।

7. Economies of Scale (इकोनॉमीज ऑफ स्केल)

यह सीधा सा हिसाब है कि आप जितनी बड़ी मात्रा में सामान बनाएंगे, उसे बनाने का खर्च उतना ही कम होता जाएगा। इसी वजह से बड़ी कंपनियां बहुत सस्ता सामान तैयार कर लेती हैं, जिसे छोटी कंपनियां टक्कर नहीं दे पातीं।

8. Moat (मोर्ट)

बिजनेस में 'मोर्ट' का मतलब है कंपनी की वह सबसे बड़ी ताकत जो उसे उसके कॉम्पिटिटर्स से बचाकर रखती है। यह ब्रांड का नाम भी हो सकता है या कोई ऐसी खास तकनीक जो किसी और के पास न हो। यह कंपनी के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है।

9. Customer Lifetime Value- CLV (कस्टमर लाइफटाइम वैल्यू)

कंपनियां अब सिर्फ यह नहीं देखतीं कि आपने आज उनसे क्या खरीदा, बल्कि वह यह हिसाब लगाती हैं कि आप आने वाले सालों में उनसे जुड़कर उन्हें कुल कितना मुनाफा देंगे। इसी आधार पर वे अपने खास ग्राहकों को स्पेशल डिस्काउंट देती हैं।

 

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10. Friction (फ्रिक्शन)

बिजनेस में फ्रिक्शन का मतलब है कि वे सारी रुकावटें जो एक ग्राहक को सामान खरीदने से रोकती हैं। जैसे पेमेंट फेल होना, ऐप का स्लो चलना या बहुत ज्यादा जानकारी मांगना। कंपनियां हमेशा कोशिश करती हैं कि उनकी सर्वीस इतनी आसान हो कि ग्राहक बिना किसी रुकावट के शॉपिंग कर सके।