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ये 10 शब्द आपको बिजनेस का मास्टर बना देंगे, जानें कैसे करना है प्रयोग?

बिजनेस की दुनिया में इस्तेमाल होने वाले इन 10 जरूरी शब्दों को समझें। ये जानकारी आपको स्टार्टअप और प्रोफेशनल मीटिंग्स में एक स्मार्ट लीडर की तरह पेश करेगी।

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आजकल हर कोई अपना खुद का काम या बिजनेस शुरू करना चाहता है लेकिन इस फील्ड में आने पर हमें कई ऐसे शब्द सुनने को मिलते हैं जो काफी उलझा देने वाले होते हैं। अक्सर मीटिंग्स या ऑफिस की बातचीत में लोग कुछ ऐसी अंग्रेजी शब्दावली का इस्तेमाल करते हैं जिनका असली मतलब हमें पता नहीं होता। अगर आप भी नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं या किसी स्टार्टअप से जुड़ना चाहते हैं, तो इन शब्दों को समझना आपके लिए बहुत जरूरी है ताकि आप किसी भी बातचीत में पीछे न रहें।

 

इन 10 जरूरी बिजनेस टर्म्स की जानकारी आपको किसी भी इन्वेस्टर या पार्टनर के सामने मजबूती से अपनी बात रखने में मदद करेगी। जब आप प्रोफेशनल लेवल पर काम करते हैं, तो इन्हीं शब्दों के सही इस्तेमाल से आपके काम की वैल्यू तय होती है। इससे न केवल आपका काम करने का तरीका बेहतर होगा, बल्कि आप अपने बिजनेस से जुड़े बड़े फैसले भी ज्यादा सटीकता से ले पाएंगे। आइए जानते हैं कि वे 10 शब्द जो हर नए बिजनेसमैन और स्टार्टअप फाउंडर के लिए जानना बेहद जरूरी है।

 

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1.बूटस्ट्रैपिंग (Bootstrapping)

 

जब कोई व्यक्ति किसी बाहरी मदद या बैंक लोन के बिना अपनी खुद की बचत से काम शुरू करता है, तो उसे बूटस्ट्रैपिंग कहते हैं। इसका मतलब है कि आप अपने दम पर धीरे-धीरे काम को बढ़ा रहे हैं और फिलहाल कंपनी पर पूरा कंट्रोल आपका ही है।

 

2.वैल्यू प्रोपोजीशन (Value Proposition)

 

इसका मतलब है कि आपका प्रोडक्ट या सर्विस दूसरों से कैसे अलग और बेहतर है। ग्राहक आपके पास ही क्यों आए और उसे आपसे क्या खास फायदा मिलेगा, उसे हम वैल्यू प्रोपोजीशन कहते हैं। यही खूबी आपको बाजार की होड़ में आगे रखती है।

 

3.बर्न रेट (Burn Rate)

 

एक महीने में कंपनी अपने ऑपरेशंस चलाने के लिए अपनी जेब से जितना पैसा खर्च कर रही है, उस रफ्तार को बर्न रेट कहा जाता है। इसे ट्रैक करना इसलिए जरूरी है ताकि आपको पता रहे कि आपके पास मौजूद फंड कितने समय तक चलने वाला है।

 

4.पिवट (Pivot)

 

जब पुराना आईडिया या काम करने का तरीका सही नतीजे नहीं देता और मालिक अपनी पूरी रणनीति या बिजनेस मॉडल को बदल देता है, तो उसे पिवट कहते हैं। मार्केट की डिमांड के हिसाब से रास्ता बदलना ही बिजनेस में पिवट कहते है।

 

5.स्केलेबिलिटी (Scalability)

 

इसका मतलब है कि आपके बिजनेस में भविष्य में बड़ा होने की कितनी क्षमता है। अगर आप काम को छोटे लेवल से बढ़ाकर बहुत बड़े स्तर तक ले जा सकते हैं, और उससे आपकी कमाई भी तेजी से बढ़ सकती है, तो वह बिजनेस स्केलेबल माना जाता है।

 

6.कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट (Customer Acquisition Cost)

 

एक नए ग्राहक को अपने साथ जोड़ने के लिए आप जो कुल खर्च (जैसे विज्ञापन, सेल्स या मार्केटिंग) करते हैं, उसे यह नाम दिया गया है। यह खर्च जितना कम होगा, कंपनी का नेट मुनाफा उतनी ही ज्यादा बढ़ता जाएगा।

 

7.चर्न रेट (Churn Rate)

 

यह उन ग्राहक का प्रतिशत है जो एक तय समय के बाद आपकी सर्विस का इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं। अगर लोग आपको छोड़कर जा रहे हैं, तो चर्न रेट बढ़ जाता है। बिजनेस की स्टेबिलिटी के लिए इसे कम रखना जरूरी होता है।

 

8.रनवे (Runway)

 

कंपनी के पास जो कैश बचा है, उससे वह बिना किसी नई कमाई या निवेश के कितने महीनों तक अपना खर्च निकाल सकती है, उस समय को रनवे कहते हैं। इससे यह तय होता है कि आपके पास नया फंड जुटाने के लिए कितना वक्त है।

 

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9.मिनिमम वायबल प्रोडक्ट (Minimum Viable Product)

 

किसी बड़े और मंहगे प्रोजेक्ट को सीधे लॉन्च करने के बजाय उसका एक बेसिक मॉडल तैयार करने को एमवीपी (MVP) कहते है। इससे यह पता चलता है कि लोग आपके आईडिया को असल में पंसद कर रहे हैं या नहीं, ताकि बाद में किसी बड़े आर्थिक नुकसान से बचा जा सके और सही सुधार किए जा सकें।

 

10.क्लॉबैक (Clawback)

 

यह एक ऐसा शब्द है जो बहुत कम लोग जानते हैं। क्लॉबैक का मतलब है कि अगर कंपनी को बाद में पता चलता है कि किसी कर्मचारी या एग्जीक्यूटिव को जो बोनस दिया गया वह गलत तरीके से दे दिया गया है, तो कंपनी उस पैसे को वापस मांग सकती है। यह एग्रीमेंट का एक खास हिस्सा होता है।

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