वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया। उन्होंने सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए सरकारी खजाना खोल दिया है। वित्त मंत्री ने सेमीकंडक्टर के लिए 40,000 करोड़ रुपये के खर्च की घोषणा की। उन्होंने सेमीकंडक्टर मिशन की रफ्तार का फायदा उठाने के लिए 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' की घोषणा की।

 

सीतारमण ने कहा कि सेमीकंडक्टर के लिए इंडस्ट्री के रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 फुल-स्टैक इंडियन IP के लिए डिजाइन किए गए उपकरण और सामग्री बनाने पर ध्यान देगा।' सीतारमण ने अपने भाषण में कहा कि केंद्रीय बजट 2026 के लिए सरकार ने बयानबाजी के बजाय सुधारों का रास्ता चुना है। उन्होंने कहा कि देश विकसित भारत बनने की दिशा में कदम आगे भी उठाता रहेगा।

 

अगस्त, 2025 तक देश के छह राज्यों में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ 10 सेमीकंडक्टर विनिर्माण तथा पैकेजिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।

 

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AI की समीक्षा करने के लिए कमिटी की घोषणा

इसके अलावा वित्त मंत्री सीतारमण ने भारत के सर्विस सेक्टर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई टेक्नोलॉजी के असर की समीक्षा करने के लिए एक नई कमिटी की घोषणा की। उन्होंने कहा, 'युवा भारत की उम्मीदों को पूरा करने के लिए और उन्हें एक रास्ता देने के लिए, मैं एक हाई-पावर्ड एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइजेज स्टैंडिंग कमिटी बनाने का प्रस्ताव करती हूं, जो आर्थिक विकास के मुख्य कारक के तौर पर सर्विस सेक्टर में ध्यान आकर्षित करेगी।'

 

बजट पेश होने से पहले, भारत की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को उम्मीद थी कि बजट सभी सेक्टर में नवाचार और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर समेत AI इकोसिस्टम के विकास को बढ़ावा देगा और इसे अपनाने के लिए मार्केट में नकदी देगा।

 

29 जनवरी को संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्रतिष्ठा प्रौद्योगिकी दौड़ के बजाय एक आर्थिक रणनीति के तौर पर देखा है। इसमें सहयोग और साझा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए खुला मंच देगा।

उच्च प्रौद्योगिकी वाले ‘टूल रूम’ स्थापित

निर्मला सीतारमण ने कहा कि पूंजीगत वस्तुओं के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए दो स्थानों पर उच्च प्रौद्योगिकी वाले ‘टूल रूम’ स्थापित किए जाएंगे। सीतारमण ने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी परिवेश बनाने के लिए कंटेनर निर्माण को एक योजना का भी प्रस्ताव रखा।

 

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आयात पर निर्भरता होगी कम

उन्होंने कहा कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए तीन समर्पित रासायनिक पार्क भी स्थापित किए जाएंगे। यह कदम देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे व्यापक प्रयासों के बीच उठाया गया है।

 

वहीं, मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन मूल्य में करीब 30 गुना वृद्धि देखी गई जो वित्त वर्ष 2014-15 में 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 5.45 लाख करोड़ रुपये हो गई। भारत से आईफोन का निर्यात 2025 में 2.03 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। 

 

यह 2024 में एप्पल द्वारा निर्यात किए गए 1.1 लाख करोड़ रुपये के करीब दोगुना है। देश में मोबाइल फोन का उत्पादन चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक करीब 6.76 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। इसमें 30 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक या लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है।