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मैन्युफैक्चरिंग पर जोर, AI और कॉन्टेंट का शोर, आसान भाषा में समझिए पूरा बजट

निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए आने वाले कुछ दशकों की एक तस्वीर पेश की है। इस तस्वीर में यह दिख रहा है कि आने वाले समय में भारत मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देगा।

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बजट भाषण के दौरान निर्मला सीतारमण, Photo Credit:

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2026-27 के लिए बजट पेश कर दिया है। इस बजट में वित्त मंत्री ने आयुर्वेद जुड़े संस्थान बनाने का एलान किया तो कॉन्टेंट क्रिएटर्स की भी बल्ले-बल्ले करवा दी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े एलान भी किए गए और मैन्युफैक्चरिंग पर भी जोर दिया गया। निर्मला सीतारमण ने कहा कि उन्होंने साल 2020-21 का बजट पेश करते हुए कहा था राजकोषीय घाटा कम करेंगी और अब यह 4.4 पर्सेंट तक पहुंचने वाला है। निर्मला सीतारमण ने बायो फार्मा मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने की दिशा में काम करने का भी एलान किया है।

 

हाई स्पीड रेल नेटवर्क बनाकर देश की इकॉनमी को रफ्तार देने, वाटरवे मजबूत करने और नए वाटरवे बनाने, कंटेनर मार्केट को मजबूत करने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करने, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए 40 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का भी एलान किया गया है। 

साल 2026-27 के बजट की अहम बातें

 

ऑरेंज इकॉनमी पर जोर: देश में कॉन्टेंट क्रिएटर्स को बढ़ावा देने के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलज, मुंबई के जरिए 15 हजार मिडिल स्कूलों, 5 हजार डिग्री कॉलेज में कॉन्टेंट क्रिएटर लैब स्थापित की जाएंगी। 

 

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विदेशी संपत्ति का खुलासा करने पर राहत: छात्रों, टेक्निकल प्रोफेशनल्स और अन्य छोटे टैक्स पेयर्स को अब विदेशी संपत्ति का खुलासा करने पर राहत दी जाएगी। पहले अपीलीय प्राधिकारी के सामने अपील की अवधि के लिए जुर्माने की राशि पर टैक्सपेयर्स पर कोई ब्याज नहीं देना होगा, चाहे परिणाम कुछ भी हो।

 

मैन्युफैक्चरिंग पर जोर: कैपिटल गुड्स की मैन्युफैक्चरिंग के लिए दो जगहों पर हाई-टेक टूल रूम बनाए जाएंगे। 6 कोर एरिया पर ध्यान दिया जाएगा। इनके तहत चैंपियन MSME बनाए जाएंगे, लेगेसी इंडस्ट्रियल सेक्टर को रिवाइव किया जाएगा और सात अहम सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई जाएगी, इन्फ्रा सेक्टर में जोर दिया जाएगा और सिटी इकनॉमिक रीजन विकसित किए जाएंगे। 

 

कंटेनर इंडस्ट्री: कंटनेर मैन्युफैक्चरिंग करके दुनियाभर के देशों से मुकाबले के लिए इस सेक्टर पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपये अगले 5 साल में खर्च किए जाएंगे।

 

यह भी पढ़ें: 3 कर्तव्य, 6 कोर एरिया, बजट से समझिए भारत का विजन क्या है?

 

केमिकल पार्क: भारत केमिकल का आयात खूब करता है। अब इसका घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए 3 डेडिकेटेड केमिकल पार्क बनाए जाएंगे।

 

इलेक्ट्रॉनिक्स: टीवी, फ्रिज और एसी जैसे उपकरणों के क्षेत्र में आयात ज्यादा होने के चलते भारत की कोशिश इसका आयात घटाने की है। इसी को ध्यान में रखते हुए 40 हजार करोड़ रुपये रखे गए हैं ताकि देश में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई जा सके।

 

क्रिटिकल मिनरल्स: देश के उन राज्यों में क्रिटिकल मिनरल के संस्थान बनाए जाएंगे जहां इनकी मात्रा ज्यादा है। निर्मला सीतारमण ने कहा है कि ओडिशा, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में ये संस्थान बनाए जाएंगे। 

 

बायो फार्मा मैन्युफैक्चरिंग: भारत दवाओं के क्षेत्र में भी खूब आयात करता है। कैंसर, डायबिटीज और अन्य ऑटो इम्यून बीमारियों के बढ़ते मामलों के चलते इन दवाओं का आयात बढ़ा है जिसका असर देश की इकॉनमी पर पड़ता है। ऐसे में अब देश में बायो फार्मा शक्ति मिशन शुरू करके मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए अगले 5 साल में 10 हजार करोड़ खर्च किए जाएंगे।

 

सेमीकंडक्टर मिशन: निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 ने इस सेक्टर की क्षमताएं बढ़ाई हैं , ऐसे में हम इंडिया सेमीकंडर्टर मिशन 2.0 शुरू कर रहे हैं ताकि इस सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई जाए और इस क्षेत्र में भारत को मजबूत किया जा सके। अप्रैल 2025 में 22,919 करोड़ के साथ शुरू की गई इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत पहले ही उम्मीद से दोगुना निवेश के वादे आ चुके हैं। अब हम इसे बढ़ाकर 40 हजार करोड़ कर रहे हैं।

 

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CER: सिटी इकनॉमिक रीजन (CER) के लिए अगले 5 साल में 5 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत शहरों को मजबूत किया जाएगा। धार्मिक शहरों को भी विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

 

इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती: निजी इस्तेमाल की जाने वाली चीजों पर लगने वाली कस्टम्स ड्यूटी में कटौती की गई है। अभी तक 20 प्रतिशत ड्यूटी लगती थी, जिसे अब 10 पर्सेंट कर दिया गया है। कैंसर से जुड़ी 17 दवाओं को कस्टम्स ड्यूटी से फ्री कर दिया गया है। 7 और दुर्लभ बीमारियों को ऐसी लिस्ट में शामिल किया जाएगा, जिन पर छूट दी जाती है।

 

आयुर्वेद: आयुर्वेद पर हो रही रिसर्च को बढ़ाने के लिए ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद बनाए जाएंगे। 

 

मेडिकल टूरिजम: मेडिकल टूरिजम को बढ़ावा देने के लिए 5 रीजनल मेडिकल हब बनाए जाएंगे।


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