केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने बोर्ड एग्जाम के लिए इवैल्यूएशन के पुराने तरीके को बदलकर एक बड़ा कदम उठाया है। 2026 के बोर्ड एग्जाम से, क्लास 12 की आंसर शीट अब पेन और पेपर के बजाय डिजिटल तरीके से जांच की जाएंगी। बोर्ड, ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू कर रहा है। आपको बता दें कि 2026 के बोर्ड एग्जाम 17 फरवरी से शुरू होने वाले हैं।

 

बोर्ड ने साफ किया है कि डिजिटल इवैल्यूएशन सिर्फ क्लास 12 के लिए 2026 में शुरू किया जाएगा। अभी के लिए, क्लास 10 की आंसर शीट का इवैल्यूएशन पुराने तरीके, यानी फिजिकल मोड से ही होता रहेगा। डिजिटल सिस्टम से रिजल्ट के बाद वेरिफिकेशन के लंबे प्रोसेस में भी आसानी होने की उम्मीद है।

 

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यह ध्यान देने वाली बात है कि सीबीएसई हर साल लगभग 46 लाख स्टूडेंट्स के लिए एग्जाम कंडक्ट करता है। यह डिजिटल रिफॉर्म न सिर्फ एनवायरनमेंट फ्रेंडली है, बल्कि मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम में भी एक बड़ा माइलस्टोन है।

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?

ऑन-स्क्रीन मार्किंग, आंसर शीट चेक करने का एक डिजिटल प्रोसेस है। स्टूडेंट्स की आंसर शीट स्कैन करके एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड की जाती हैं। फिर टीचर अपने कंप्यूटर या लैपटॉप से ​​लॉग इन करते हैं, स्क्रीन पर जवाब पढ़ते हैं, और वहीं पर मार्क्स देते हैं। इस तरीके से कॉपियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती और जांच की प्रक्रिया भी तेज हो जाती है।

क्या हैं इसके फायदे?

9 फरवरी को स्कूल प्रिंसिपल को जारी एक सर्कुलर के मुताबिक, इस डिजिटल सुधार का मुख्य मकसद इवैल्यूएशन प्रोसेस में इंसानी गलती को कम करना और ट्रांसपेरेंसी बढ़ाना है। सीबीएसई एग्जामिनेशन कंट्रोलर संयम भारद्वाज ने कहा कि इस सिस्टम के लागू होने से मार्क्स की टोटलिंग में होने वाली गलतियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। यह सॉफ्टवेयर-बेस्ड प्रोसेस न सिर्फ सही इवैल्यूएशन पक्का करेगा बल्कि रिजल्ट भी जल्दी घोषित करने में मदद करेगा।

 

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इस नए सिस्टम से टीचर्स को भी काफी फायदा होगा। टीचर्स अब अपने स्कूल की कंप्यूटर लैब से ही आंसर शीट्स को इवैल्यूएट कर पाएंगे। इससे उनका आने-जाने का समय और खर्च कम होगा। इसके अलावा, विदेश में सीबीएसई से जुड़े स्कूलों के टीचर्स भी इस प्लेटफॉर्म के जरिए इवैल्यूएशन प्रोसेस में हिस्सा ले पाएंगे। बोर्ड का मानना ​​है कि इससे इवैल्यूएशन में टीचर्स की ज्यादा भागीदारी पक्की होगी।