उत्तर प्रदेश के रायबरेली में रहने वाले विमल कुमार ने UPSC परीक्षा में 107वीं रैंक हासिल की है। बेहद साधारण परिवार से आने वाले विमल कुमार की इस सफलता से पूरे गांव में जश्न का माहौल है। रिजल्ट आने के बाद गांव में विमल कुमार का भव्य स्वागत किया गया है। उनके सम्मान में करीब 7 किलोमीटर लंबा जुलूस निकाला गया है। इस जुलूस में 12 कारें, डीजे और 50 से ज्यादा बाइकें शामिल थीं।
गांव के लोग जगह-जगह उन्हें रोककर फूल और माला पहना रहे है। जुलूस को पूरा होने में करीब दो घंटे का समय लगा। जैसे-जैसे काफिला आगे बढ़ता गया, उसमें और भी लोग शामिल होते गए। लोग अपने गांव के बेटे की सफलता का जश्न मनाते हुए नजर आ रहे है।
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मजदूरी और खेती की कमाई से बेटे को पढ़ाया
विमल कुमार रायबरेली के खीरो ब्लॉक के चांदेमऊ गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता रामदेव ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। इसके साथ ही वे बंटाई पर खेती भी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति लंबे समय तक बहुत कमजोर रही है। बेटे की सफलता पर पिता रामदेव भावुक हो गए। उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा कि मजदूरी करके बच्चों को पढ़ाया है। आज बेटे की सफलता ने उनकी मेहनत को सार्थक कर दिया है।
पूरे परिवार के सहयोग से विमल बने IAS
रामदेव के परिवार में तीन बेटे और दो बेटियां हैं। विमल कुमार सबसे छोटे बेटे हैं। परिवार के लोग बताते हैं कि आर्थिक तंगी के बावजूद विमल की पढ़ाई कभी नहीं रुकी। पूरे परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया है। विमल के बड़े भाई अजीत कुमार भी मजदूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि परिवार की हालत अच्छी नहीं थी लेकिन सभी ने मिलकर विमल कुमार को पढ़ने का मौका दिया है।
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विमल कुमार का घर उनके संघर्ष की कहानी भी बताता है। घर आधा पक्का और आधा कच्चा है। कुल पांच कमरे हैं। इनमें से सिर्फ दो ही पक्के हैं। घर के बाहर दो भैंसें बंधी हैं। पास में चारा काटने की मशीन और भूसा रखा है। हाल ही में घर के सामने वाले हिस्से का प्लास्टर कराया गया है। परिवार के एक सदस्य विदेश में काम करते हैं। इससे घर की आर्थिक स्थिति में थोड़ी सुधार आई है।
गांव के प्राइमरी स्कूल से IIT दिल्ली तक
विमल की पढ़ाई गांव के प्राइमरी स्कूल चांदेमऊ से शुरू हुई है। बाद में उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय महाराजगंज में हुआ। वहां से उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई की है। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए केरल गए। फिर उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली पहुंचे। साल 2020 में विमल ने IIT दिल्ली से बीटेक की डिग्री हासिल की है। इसके बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की।
नवोदय में डीएम से मिली प्रेरणा
विमल कुमार ने किसी बड़े कोचिंग संस्थान में दाखिला नहीं लिया। उन्होंने ज्यादातर तैयारी ऑनलाइन क्लास और सेल्फ स्टडी से की है। वे बताते हैं कि गांव में रहकर पढ़ाई करने से खर्च कम हुआ है। इससे परिवार पर आर्थिक दबाव नहीं पड़ा है। विमल कुमार को IAS बनने की प्रेरणा स्कूल के दिनों में मिली है। नवोदय विद्यालय में पढ़ाई के दौरान एक बार जिले की डीएम स्कूल आई थीं। उनका व्यक्तित्व देखकर विमल प्रभावित हुए थे। उसी दिन उन्होंने तय किया कि वे भी IAS बनेंगे।
चार बार असफलता के बाद पांचवें प्रयास में बने IAS
UPSC की तैयारी आसान नहीं थी। विमल कुमार को कई बार असफलता मिली है। उन्होंने 2021 से 2025 तक लगातार पांच बार परीक्षा दी है। पहले चार प्रयासों में वे इंटरव्यू तक पहुंचे। लेकिन अंतिम चयन में नहीं हो पाया। विमल बताते हैं कि 2024 में इंटरव्यू में सिर्फ 12 नंबर कम होने से उनका सिलेक्शन नहीं हो पाया था। उस समय उन्हें काफी निराशा हुई थी। विमल कुमार ने हार नहीं मानी। उन्होंने एक बार फिर पूरी मेहनत से तैयारी की। पांचवें प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल कर ली। इस बार विमल कुमार को 107वीं रैंक मिली है।
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अनुशासन और मेहनत से मिली सफलता
विमल कुमार का कहना है कि सफलता के लिए अनुशासन बहुत जरूरी है। नियमित पढ़ाई और समय का सही उपयोग ही सफलता की कुंजी है। वे कहते हैं कि कठिन परिस्थितियां इंसान को मजबूत बनाती हैं। अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत जारी रहे तो सफलता जरूर मिलती है। विमल की सफलता से गांव के लोग बेहद खुश हैं। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि विमल ने पूरे गांव का नाम रोशन किया है।
