logo

मूड

ट्रेंडिंग:

NCC कैडेट से IAS तक का सफर, राजेश्वरी सुवे ने कैसे हासिल की USPC में दूसरी रैंक?

मदुरै की राजेश्वरी सुवे एम ने यूपीएससी 2025 में ऑल इंडिया दूसरी रैंक हासिल किया है। लगातार चार असफलताओं के बाद भी हार न मानने वाली राजेश्वरी फिलहाल तमिलनाडु में डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं।

UPSC AIR 2 Rajeshwari Suve

UPSC AIR 2 राजेश्वरी सुवे

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2025 का परिणाम 6 मार्च को घोषित किया गया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं मदुरै की राजेश्वरी सुवे एम ने दूसरी रैंक प्राप्त की। राजेश्वरी तमिलनाडु के मदुरै जिले के वाडीपट्टी की रहने वाली हैं। उनके पिता छोटा सा बिजनेस करते हैं और उनकी मां प्रोफेसर हैं। राजेश्वरी की यह सफलता अचानक नहीं मिली है। उन्होंने करीब सात साल तक लगातार मेहनत और तैयारी करने के बाद यह उपलब्धि हासिल की है।

 

राजेश्वरी के लिए यह सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। उन्होंने 2018 में चेन्नई से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। इंजीनियर होने के नाते उनकी पढ़ाई ने तैयारी में मदद तो की लेकिन यूपीएससी का कठिन सिलेबस उनके लिए ज्यादा बड़ी चुनौती थी। वे लगातार चार बार इस परीक्षा में शामिल हुईं लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। बावजूद इसके, उन्होंने हार मानने के बजाय हर असफलता से कुछ नया सीखा और अपने पांचवें प्रयास में देश भर में दूसरा स्थान हासिल किया।

 

यह भी पढ़ें: पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बरी राम रहीम, क्या था 24 साल पुराना केस?

डिप्टी कलेक्टर के तौर पर कार्यरत

हैरानी की बात यह है कि यूपीएससी का यह बड़ा परिणाम आने से पहले ही राजेश्वरी प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बन चुकी थीं। वह डिंडिगुल के जिला कलेक्टर कार्यालय में डिप्टी कलेक्टर (ट्रेनिंग) के पद पर तैनात थीं। इस नौकरी के दौरान उन्होंने जमीन स्तर पर सरकारी योजनाओं को लागू करना और लोगों की समस्याओं को समझना सीखा। इसी का फायदा उन्हें इंटरव्यू और मेन्स परीक्षा में भी मिला।

सोशियोलॉजी को बनाया विषय

अपनी तैयारी के लिए राजेश्वरी ने सोशियोलॉजी को अपने ऑप्शनल विषय के रुप में चुना। उनका मानना था कि समाज की बुराइयों, संस्थाओं और शासन व्यवस्था को समझने के लिए यह विषय सबसे बेहतर है। यह विषय आगे के प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर समाज की गहरी समझ विकसित करने और उनके लिए इस सर्विस में काम के दौरान काफी मददगार साबित होगा। 

राजेश्वरी ने क्या कहा?

राजेश्वरी सुवे एम ने कहा, 'मैं थोड़ी हैरान थी। मेरे लिए यह एक लंबा सफर रहा है क्योंकि मैंने 2018 में ग्रेजुएशन किया था। यह सात साल का सफर रहा है। इस एग्जाम में मुझे तमिलनाडु सरकार की नान मुधलवन स्कीम की गाइडेंस ने बहुत मदद की जिसके कारण यह मुमकिन हुआ है। मैं पहले बैच की बेनिफिशियरीज में से एक थी। 2024 में, मुझे उन लोगों में चुना गया जिन्हें प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू के लिए फाइनेंशियल मदद दी गई थी।'

 

यह भी पढ़ें: UPSC टॉपर अनुज अग्निहोत्री किस्मत को क्यों मानते हैं सफलता का राज?


एक इंटरव्यू में उन्होंने  यह भी बताया कि कॉलेज के दिनों में वे NCC कैडेट थीं। वहीं से उनके मन में वर्दी पहनने का जुनून पैदा हुआ। फिलहाल उनका चयन डिप्टी कलेक्टर के पद के लिए हुआ है लेकिन उनका सपना वर्दी वाली नौकरी करना है। इसलिए अब वह IPS अधिकारी बनकर सेवा करना चाहती हैं।


राजेश्वरी सुवे एम की मां डॉ. एस नागरानी ने कहा, 'मैं इसे बता नहीं सकती कि मैं कितनी ज्यादा खुश हूं। मैं उन सभी को इसके लिए धन्यवाद देना चाहती हूं जो उसके पीछे थे। यह सफर लगभग आठ साल का रहा है। वह बहुत मेहनती है। उसे दूसरी रैंक मिली। यह सच में उसके लिए बहुत बड़ी अचीवमेंट है।'

Related Topic:#UPSC

और पढ़ें