बिहार के रणवीर सेना के पूर्व अध्यक्ष ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती इस वक्त चर्चा में हैं क्योंकि उनकी पोती यूपीएससी एग्जाम में पास हो गई है। ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती का नाम आकांक्षा सिंह है, जिन्होंने यूपीएससी एग्जाम में 301वां रैंक हासिल किया है। आकांक्षा के रिजल्ट से ब्रह्मेश्वर मुखिया का परिवार बेहद खुश है।
आकांक्षा सिंह बिहार के भोजपुर जिले के आरा में रहती है। आकांक्षा के यूपीएससी एग्जाम पास करने की वजह से वह काफी चर्चा में आ गई हैं। यूपीएससी का रिजल्ट 6 मार्च को ही आ गया था, तब से ही आकांक्षा के घर में खुशी का माहौल है। आकांक्षा ने रिजल्ट आने के बाद बताया है कि उनके दादा ब्रह्मेश्वर मुखिया उनके लिए प्रेरणा स्रोत है। जानकारी के लिए बता दें कि ब्रह्मेश्वर मुखिया की 2012 में हत्या हुई थी।
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ब्रह्मेश्वर मुखिया बने आकांक्षा के प्रेरणा का स्रोत
आकांक्षा ने यूपीएससी में 301वां रैंक हासिल करने के बाद अपनी खुशी जाहिर की है। आकांक्षा ने अपनी सफलता का श्रेय दादा ब्रह्मेश्वर मुखिया को दिया है। आकांक्षा ने बताया है कि जब से उनका जन्म हुआ था, तब से वह पूछती थीं कि उनके दादा कौन हैं और कहां हैं। लेकिन उनके घरवालों ने दादा के बारे में कुछ नहीं बताया था। फिर जब आकांक्षा बड़ी हुईं, तब उन्हें पता चला कि उनके दादा ब्रह्मेश्वर मुखिया कई सालों से जेल में बंद थे।
आकांक्षा ने बताया है कि दादा ब्रह्मेश्वर मुखिया कई साल तक समाज की भलाई के लिए जेल में कैद रहे, जिस वजह से परिवार को कई साल तक संघर्ष में जीना पड़ा। हालांकि, परिवार और दादा का संघर्ष आकांक्षा के जीवन में प्रेरणा का स्रोत बना, जिस वजह से वह यूपीएससी एग्जाम पास कर पाईं है।
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ब्रह्मेश्वर मुखिया कौन हैं?
रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया बिहार के भोजपुर जिले से थे। बिहार में 1990 के दौर में किसानों और नक्सली संगठनों के बीच मतभेद चल रहा था। उसी दौर में लगभग 1994 में ब्रह्मेश्वर मुखिया ने रणवीर सेना की स्थापना की थी। इस सेना ने बिहार के किसानों के साथ मिलकर नक्सली संगठनों के खिलाफ मुठभेड़ की थी।
इन मुठभेड़ों में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। जिस वजह से ब्रह्मेश्वर मुखिया को कानूनी कार्रवाई के तहत जेल की सजा मिली थी। 2011 में ब्रह्मेश्वर मुखिया जेल से सजा काटकर बाहर निकले थे। हालांकि, 2012 में ब्रह्मेश्वर मुखिया पर गोली चलाकर उनकी हत्या कर दी गई थी।