असम विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने 88 उम्मीदवारों की एक लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में कांग्रेस के सांसद रहे प्रद्युत बोरदोलोई का भी नाम शामिल है जो हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए हैं। उन्हें दिसपुर विधानसभा सीट से उतारा गया है। दिसपुर विधानसभा से मौजूदा विधायक अतुल बोरा ने अब प्रद्युत बोरदोलोई के खिलाफ बगावत कर दी है। उन्होंने कहा है कि अब वह मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की बात नहीं चुनेंगे। अतुल बोरा का कहना है कि अब वह या तो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे या फिर दूसरे प्रत्याशी का समर्थन करेंगे।


नगांव लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद रहे प्रद्युत बोरदोलोई ने हाल ही में अपनी सांसदी भी छोड़ दी और कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए। वह नगांव से लगातार दूसरी बार लोकसभा सांसद बने थे। उनके बीजेपी में शामिल होने के साथ ही यह तय था कि वह दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। अब बीजेपी की लिस्ट आने के बाद उनके नाम को लेकर चर्चा भी शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा विरोध दिसपुर के मौजूदा विधायक अतुल बोरा ने दर्ज कराया है। 6 बार के विधायक अतुल बोरा लगभग एक लाख वोटों के अंतर से यहां से चुनाव जीत रहे हैं ऐसे में अपना ही टिकट कटने पर वह भड़क गए हैं।

 

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क्या बोले अतुल बोरा?

 

अपना टिकट कटने पर अतुल बोरा ने कहा है, 'मैं 1985 से इस दिसपुर का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं। अपने राजनीतिक करियर में मैंने तीन मुख्यमंत्रियों को चुनाव हराया है। मैंने उम्मीद की थी कि पार्टी मेरे ट्रैक रिकॉर्ड को ध्यान में रखेगी। बीजेपी में अब काम करने का माहौल नहीं बचा है। कार्यकर्ता कनफ्यूज हैं कि कहां जाना है। पार्टी सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करती है लेकिन अब वह दूसरी पार्टी के नेताओं को लाकर टिकट बांट रही है।' 

 

प्रद्युत बोरदोलोई को आड़े हाथ लेते हुए कहा है, 'प्रद्युत बोरदोलोई एक समय पर मार्गेरीटा सीट से विधायक थे। फिर वह नगांव गए और सांसद बने। अब वह दिसपुर से लड़ना चाहते हैं। यह मार्गरीटा और नगांव के लोगों के साथ धोखा है और मुझे डर है कि यही काम दिसपुर के साथ भी हो सकता है।'

 

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आगे क्या करेंगे अतुल बोरा?

 

अपने आगे के कदम के बारे में उनका कहना है, 'मैं तीन चीजों के बारे में सोच रहा हूं। या तो मैं निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ूंगा या मैं अपना समर्थन मीरा बोर्थाकुर को दूंगा या मैं अपने फैसला रोक लूंगा। अभी के लिए मैं अपना फैसला 22 मार्च को लूंगा। मैं मुख्यमंत्री की नहीं सुनूंगा, मैं सिर्फ दिसपुर के लोगों की बात सुनूंगा। चाहे कोई पार्टी कार्यकर्ता हो या कोई आम आदमी, हर कोई चाहता है कि मैं ही फिर से उम्मीदवार बनूं। यह हैरान करने वाला फैसला है और मैं ठगा सा महसूस कर रहा हूं।'

 

असम गण परिषद के संस्थापक सदस्यों में से रहे अतुल बोरा साल 2013 में बीजेपी में शामिल हो गए थे। 2016 और 2021 में वह इसी सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतते आ रहे हैं।