महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ी हलचल हुई है। कांग्रेस पार्टी ने बारामती विधानसभा उपचुनाव (By-poll) से अपने उम्मीदवार का नाम वापस लेने का फैसला किया है। पार्टी का यह कदम सुनेत्रा पवार के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है, क्योंकि अब वह इस सीट से 'निर्विरोध' यानी बिना किसी विरोध के चुनाव जीत सकती हैं। कांग्रेस ने यह फैसला इसलिए लिया ताकि चुनाव लड़ने की जरूरत ही न पड़े और सुनेत्रा पवार सर्वसम्मति से चुनी जा सकें।
कांग्रेस ने अपने इस फैसले के पीछे महाराष्ट्र की पुरानी राजनीतिक परंपरा और सभ्यता का हवाला दिया। महाराष्ट्र की राजनीति में यह रिवाज रही है कि अगर किसी बड़े नेता के निधन की वजह से उपचुनाव होता है और उनके परिवार का ही कोई सदस्य चुनाव लड़ रहा है तो दूसरी पार्टियां सम्मान के तौर पर अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं करती। इस बार बारामती की यह सीट अजीत पवार के निधन के बाद खाली हुई और इसी परंपरा का मान रखते हुए कांग्रेस ने पीछे हटने का मन बनाया।
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आकाश मोरे का नाम हुआ वापस
कांग्रेस ने पहले इस सीट के लिए आकाश मोरे को अपना प्रत्याशी घोषित किया था और चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर ली थी। नामांकन की आखिरी प्रक्रिया के दौरान पार्टी हाईकमान और राज्य इकाई के नेताओं के बीच गहरी चर्चा हुई। इस चर्चा के बाद पार्टी ने तय किया कि सहानुभूति और परंपरा के इस माहौल में चुनाव लड़ना सही नहीं होगा, जिसके बाद आकाश मोरे का पर्चा वापस ले लिया गया।
सुनेत्रा पवार के लिए बड़ी राहत
अजीत पावर की पत्नी सुनेत्रा पवार के लिए अब चुनावी राह पूरी तरह आसान हो गई है। कांग्रेस के मैदान से हटने कि बाद अब उनके सामने कोई भी बड़ा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा है। इस फैसले से महायुति गठबंधन (बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी) काफी अच्छी स्थिति में आ गया है, क्योंकि अब उन्हें प्रचार और वोटिंग की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी।
जब शुरुआत में कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया था, तब राजनीति के जानकारों और बड़े नेताओं के बीच इस फैसले को लेकर काफी चर्चा और विरोध हुआ था। कई लोगों ने इस बात को गलत बताया और पार्टी की खूब बुराई की थी कि वे महाराष्ट्र के संस्कारों के खिलाफ जा रहे हैं। पार्टी के अंदर भी इसे लेकर दो गुट बन गए थे। आखिरकार, लोगों की नाराजगी और सहानुभूति की लहर को देखते हुए कांग्रेस ने अपना इरादा बदल दिया।
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क्या होगा अगला कदम
अब जब कांग्रेस मैदान से हट चुकी है तो बारामती उपचुनाव का पूरा समीकरण बदल गया है। चुनाव आयोग अब नामांकन पत्रों की जांच के बाद यह देखेगा कि क्या कोई और उम्मीदवार दौड़ में है। यदि कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं रहता तो सुनेत्रा पवार की निर्विरोध जीत की घोषणा जल्द ही कर दी जाएगी। इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि राजनीति में कड़वाहट के बीच भी रिश्तों और परंपराओं की जगह बची हुई है।
