असम, केरल और पुडुचेरी में कल विधानसभा चुनाव में कल बंपर वोटिंग हुई। केरल में अबकी बार 78.03 फीसद मतदान दर्ज किया गया। पिछली बार यहां 74.06 फीसद मतदान हुआ था। इसके अलावा असम में भी पिछले चुनाव से 3.17 प्रतिशत ज्यादा मतदान हुआ। पुडुचेरी में 30 सीटों पर कुल 89.83 फीसद मतदान रिकॉर्ड किया गया। केरल में बढ़ा हुआ वोटिंग प्रतिशत कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के लिए राहत की खबर बताया जा रहा है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे लेफ्ट सरकार को झटका लग सकता है और कांग्रेस को फायदा होगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केरल में बंपर वोटिंग के पीछे तीन मुख्य वजह रही हैं। इनमें पहली वजह सीएम पिनरई विजयन के खिलाफ एंटी इन्कम्बेंसी, दूसरी सीपीआईएम में सेकंड लाइन लिडरशिप का ना होना है। तीसरी वजह सबरीमाला मुद्दे को माना जा रहा है। इस मंदिर में सोना चोरी बड़ा मुद्दा बना हुआ है और इससे लोग खासकर महिलाएं काफी ज्यादा नाराज हैं।
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कांग्रेस के लिए क्यों ग्रीन सिग्नल?
केरल में जब-जब चुनाव में वोटिंग बढ़ी है तो सत्ता बदली है। कांग्रेस पार्टी और यूडीएफ गठबंधन बढ़े हुए वोट प्रतिशत से उत्साहित है। केरल में कुल 14 जिलें हैं और दो जिलों में 80 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है। कोझिकोड जिले में सबसे ज्यादा 80 फीसदी वोटिंग हुई है और सबसे कम 70.76 प्रतिशत पथनमथिट्टा में हुई है। पिछले कुछ चुनावों से देखा गया है कि अगर वोटिंग प्रतिशत बढ़ा है तो सत्ता में परिवर्तन हुआ है। पिछले कई चुनावों का ट्रैक यही कहता है। इसलिए कांग्रेस उत्साहित है।
यूडीएफ के गढ़ में हुआ ज्यादा मतदान?
केरल में इस बार 14 में से 10 जिलों में 70 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है। उत्तरी केरल के कन्नूर, कोझिकोड, मलप्पुरम और वायनाड में 77 फीसदी से 80 फीसदी तक वोटिंग हुई। इन सभी जिलों में कांग्रेस पार्टी को मजबूत माना जा रहा है और यहां पारंपरिक रूप से कांग्रेस मजबूत रही है। इसके अलावा इस बार दक्षिण केरल के जिलों तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा में भी मतदान 75 फीसदी से ज्यादा रहा है। पहले इन जिलों में 60-68 फीसदी वोट होते थे।
बीजेपी ने कांग्रेस को फायदा पहुंचाया?
इस बार सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले मलप्पुरम में भी जबरदस्त वोटिंग देखने को मिली है। यह जिला कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ का गढ़ रहा है और कांग्रेस इस बढ़े हुए वोट प्रतिशत को अपने पक्ष में बता रही है। इसके अलावा कोझिकोड और कन्नूर जैसे मुस्लिम इलाकों में भी जमकर वोटिंग हुई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुस्लिम मतदाताओं का भारी संख्या में वोट करना बीजेपी के बढ़ते प्रभाव का असर और राष्ट्रीय राजनीति में बीजेपी की पकड़ भी हो सकता है। बीजेपी के प्रभाव के कारण मुस्लिम कांग्रेस और यूडीएफ के पक्ष में मतदान करने के लिए निकले।
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4 मई को नतीजे
अभी सभी उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद है। जनता ने मुहर लगा दी है और 4 मई को पता चल जाएगा कि किस पार्टी के लिए जनता ने वोट किया है। चुनाव आयोग के आधिकारिक शेड्यूल के अनुसार, 4 मई को केरल समेत सभी पांच राज्यों के नतीजे घोषित होंगे। अभी पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में वोटिंग नहीं हुई है।
