केरल के खूबसूरत जिलों में से एक कोट्टायम चारों तरफ से अलग-अलग जिलों से घिरा है। ना तो यह समुद्र से सटा हुआ है और ना ही इसकी सीमा किसी दूसरे राज्य से लगती है। अलप्पुझा और कोट्टायम के बीच वेम्बनाड झील आ जाती है और वही दोनों की सीमा बनती है। कोट्टायम के उत्तर में एर्नाकुलम, पूर्व में इडुक्की, पश्चिम में अलप्पुझा और दक्षिण में पत्तनथिट्टा जिले आते हैं। खूबसूरत पहाड़ों से घिरा यह जिला अपने बैकवॉटर और हरियाली भरी वादियों के लिए मशहूर है।

 

मसालों और रबर के लिए मशहूर होने के चलते ही इस जिले में केरल कांग्रेस के नेताओं को अपनी उपजाऊ जमीन मिली। आज भी केरल कांग्रेस के अलग-अलग धड़े इस जिले की मिट्टी में फल-फूल रहे हैं और इसी जिले के सहारे अपनी राजनीतिक पारी खेल रहे हैं। रबर बोर्ड इसी जिले में स्थित है और इस जिले को अक्षर नगरी के नाम से भी जाना जाता है।

 

वायकॉम सत्याग्रह का केंद्र रहे इस जिले का ऐतिहासिक महत्व भी अच्छा-खासा है। इस जिले ने महात्मा गांधी से लेकर पेरियार तक और चक्रवर्ती राजगोपालाचारी से लेकर विनोबा भावे तक के संघर्षों को देखा है। इसी जिले से शुरू हुआ आंदोलन के चलते त्रावणकोर के दीवान रहे सी पी रामास्वामी अय्यर को भी हटाया गया था। रबर और मसालों की खेती के लिए मशहूर इस जिले में कमाई का मुख्य जरिया रबर की खेती, काजू की खेती और फलों की खेती है। इसके अलावा पानी भरपूर होने के चलते नारियल और धान की खेती भी खूब होती है। यहां के हजारों लोगों के विदेश में रहने के चलते नॉन रेजिडेंट इंडियन (NRI) की कमाई भी खूब आती है।

 

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राजनीतिक तौर पर देखें तो इस जिले की ज्यादातर सीटों पर लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन केरल कांग्रेस के अलग-अलग धड़ों के भरोसे रहते हैं और इसी के बलबूते ये नेता राज्य और केंद्र सरकारों में बड़े पद भी हासिल करते रहे हैं।

2021 में क्या हुआ था?

यह एक ऐसा जिला है जहां केरल कांग्रेस के अलग-अलग धड़ों के दिग्गज नेता आपस में टकराते हैं। इसी जिले से ओमान चांडी, पी सी जॉर्ज, के एम मणि जैसे दिग्गज नेता निकले और लंबे समय तक केरल विधानसभा के सदस्य रहे। अभी भी यह तय माना जाता है कि केरल में बनने वाली सरकार से एक या दो मंत्री कोट्टायम जिले से जरूर होंगे। यही वजह है कि हर सीट पर अलग-अलग दलों के नेता अलग-अलग गठबंधनों से अपनी किस्मत आजमाते रहते हैं। 2021 में भी जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला था और 9 में पांच सीटों पर लेफ्ट तो 4 पर UDF को जीत हासिल हुई थी।

विधानसभा सीटों का इतिहास

कंजिरापल्ली- इस सीट का प्रतिनिधित्व के टी थॉमस, के वी कुरियन और जॉर्ज मैथ्यू जैसे नेताओं ने लंबे समय तक किया है।  यह विधानसभा क्षेत्र कोट्टायम जिले में है लेकिन पत्तनमथिट्टा लोकसभा क्षेत्र में आती है। सत्ताधारी लेफ्ट गठबंधन की ओर से यह सीट केरल कांग्रेस (मणि) के खाते में जाती रही है। पिछले लगातार तीन चुनाव से यहां से केरल कांग्रेस (M) के एन जयराज चुनाव जीतते आ रहे हैं और चौथी बार भी वही उम्मीदवार हैं। बीजेपी ने यहां एडवोकेट जॉर्ज कुरियन को उतारा है और यूडीएफ की ओर से कांग्रेस के रॉनी बेबी यहां से उम्मीदवार हैं।

 

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पूंजर- यह विधानसभा क्षेत्र भी पत्तनमथिट्टा लोकसभा क्षेत्र में है। 2021 में हारने से पहले पी सी जॉर्ज यहां से लगातार पांच बार और कुल सात बार चुनाव जीत चुके थे। 2024 में उन्होंने अपनी पार्टी केरल कांग्रेस (जनपक्षम) का विलय बीजेपी में कर दिया और अब बीजेपी के ही उम्मीदवार हैं। पिछले बार उन्हें हराने वाले सेबेस्टियन कुलातुनकल ही एक बार फिर से लेफ्ट की ओर से केरल कांग्रेस (M) के उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने यहां से एडवोकेट सेबेस्टियन एम जे को अपना उम्मीदवार बताया है।

 

चंगनासेरी- यह विधानसभा क्षेत्र भले ही कोट्टायम जिले में है लेकिन लोकसभा क्षेत्र मावेलीकारा लगता है। यह क्षेत्र कई दशकों से केरल कांग्रेस (मणि) का गढ़ रहा है। 1980 से 2020 तक यहां के विधायक रहे सी एफ थॉमस के बाद 2021 में केरल कांग्रेस (M) ने यहां से एडवोकेट जॉम माइकिल को उतारा और वह भी जीत गए थे। एक बार फिर से वही उम्मीदवार हैं और उनके सामने केरल कांग्रेस (जोसेफ) यानी UDF की ओर से वीनू जॉब मैदान में हैं।

 

एत्तुमन्नूर- कोट्टायम लोकसभा क्षेत्र की इस विधानसभा सीट  पर पिछले तीन चुनाव से लेफ्ट का कब्जा है। दो बार के सुरेश कुरूप जीते और 2021 में यहां से वीएन वसावन को जीत हासिल हुई थी। वही एक बार फिर से लेफ्ट के उम्मीदवार हैं। वहीं, कांग्रेस ने एन सुरेश को अपना उम्मीदवार बनाया है।

 

कोट्टायम-कोट्टायम शहर की यह विधानसभा सीट अब पिछले तीन बार से कांग्रेस के कब्जे में है। टी राधाकृष्णन यहां से लगातार तीन बार चुनाव जीत चुके हैं और चौथी बार भी मैदान में हैं। केरल सरकार में मंत्री रहे राधाकृष्णन हर बार बड़ी जीत हासिल करते रहे हैं।। उन्हें चुनौती देने के लिए लेफ्ट ने एक बार फिर से के अनिल कुमार को ही मौका दिया है।

 

पुथुपल्ली- यह सीट कांग्रेस का गढ़ और पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी का क्षेत्र है। 1970 से लगातार जीतते आ रहे ओमान चांडी का अब निधन हो चुका है। अपने निधन से पहले वह लगातार 12 बार इस सीट से चुनाव जीते थे। उनके निधन के बाद उपचुनाव हुए तो कांग्रेस ने उनके बेटे चांडी ओमन को मौका दिया और वह भी  इस सीट पर आसानी से जीत गए। इस बार लेफ्ट ने चांडी ओमन के सामने जे सी थॉमस को और बीजेपी ने जी लिजिनलाल को उतारा है।

 

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पाला- यह विधानसभा क्षेत्र भी एक दिग्गज नेता और केरल कांग्रेस (मणि) बनाने वाले के एम मणि का क्षेत्र रहा है। 2019 में अपने निधन तक वह इस सीट से विधायक रहे और कुल 12 बार चुनाव जीते। उनके निधन के तुरंत बाद जब चुनाव हुए तो फिल्म अभिनेता मणि सी कप्पन ने लेफ्ट गठबंधन की ओर से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के टिकट पर जीत हासिल की थी। तब उन्हें केरल कांग्रेस (M) के जोस टॉम को हराया था लेकिन अब यह पार्टी भी लेफ्ट गठबंधन का हिस्सा बन गई है। 2020 में हुई इस घटना के बाद मणि सी कप्पन ने केरल डेमोक्रैटिक पार्टी (KDP) बनाई और UDF का हिस्सा बने गए। उन्होंने 2021 के चुनाव में लेफ्ट की ओर से उतरे केरल कांग्रेस (M) के जोस के मणि को हराकर एक बार फिर से जीत हासिल की। इस बार भी UDF की ओर से मणि कप्पन, लेफ्ट गठबंधन की ओर से जोस के मणि के बीच हाई वोल्टेज चुनाव की उम्मीद है। बीजेपी ने यहां से शॉन जॉर्ज को उतारा है। हालांकि, मणि कप्पन निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ही चुनाव लड़ रहे हैं।

 

कुदुतुरुती- इस सीट पर लगातार चार बार केरल कांग्रेस (जोसेफ) के मोन्स जोसेफ चुनाव जीतते आ रहे हैं। इस बार भी वही उम्मीदवार हैं और उनका मुकाबला केरल कांग्रेस (M)की निर्मला जिम्मी से है। पिछली बार वह बेहद कम अंतर से यह सीट जीत पाए थे इसलिए माना जा रहा है कि इस बार मोन्स जोसेफ के लिए यह चुनाव आसान नहीं होगा।

 

वायकॉम- अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर आज तक कांग्रेस को सिर्फ दो बार जीत मिली है। एक बार देश के पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायणन यहां से चुनाव जीते थे और एक बार के के बालाकृष्णन को जीत मिली थी। उनके अलावा लेफ्ट की ओर से एम के केशवन, पी नारायणन, के अजित और सी के आशा ने वायकॉम का प्रतिनिधित्व किया है। पिछले दो चुनाव से यहां से चुनाव जीत रहीं सी के आशा की जगह लेफ्ट ने पी प्रदीप को मैदान में उतारा है। उनका मुकाबला कांग्रेस के के. बिनिमोन से है। वहीं, बीजेपी ने इसी सीट से दो बार विधायक रहे के अजित को उतारकर बड़ा दांव खेला है। 

 

जिले की स्थिति
क्षेत्रफल-2208 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर-97.21%
नगर पालिका-6
ब्लॉक-11
पंचायत-71


विधानसभा सीटें- 9
LDF-5
UDF-4