इडुक्की: केरल कांग्रेस के धड़ों की लड़ाई, LDF को कैसे हरा पाएगा UDF?
इडुक्की जिले में LDF की स्थिति मजबूत तो है लेकिन इस बार UDF ने भी अपनी रणनीति में बदलाव करके वापसी की तैयारी की है। पिछली बार 5 में से सिर्फ 1 सीट पर UDF को जीत मिली थी।

इडुक्की जिला, Photo Credit: Khabargaon
केरल के सबसे खूबसूरत जिलों में से एक का नाम इडुक्की है। नदियों, नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सैंक्चरी, पहाड़ और तमाम प्राकृतिक संसाधनों के लिए मशहूर यह जिला अपने मसालों, हिल स्टेशनों और बिजली उत्पादन के लिए जाना जाता है। पूरे केरल को मिलने वाली बिजली में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी इसी जिले की है। मसालों के भरपूर उत्पादन के लिए ही इस जिले को 'केरल का स्पाइस गार्डन' भी कहा जाता है। यही वजह है कि जिले में कारोबार का अच्छा माहौल है और इसी कारोबारी माहौल ने यहां केरल कांग्रेस को पनपने का मौका दिया था।
साल 1972 में कोट्टायम जिले से अलग होकर बने इस जिले के नाम का अर्थ है कंठ। इसी जिले में साल 1664 में डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने मसालों का कारोबार शुरू किया था। आज भी यह जिले हाई क्वालिटी की काली मिर्च, लौंग और दालचिनी के निर्यात के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में पाइनएपल और केले की जबरदस्त खेती होती है। यह उन चुनिंदा जिलों में भी शामिल हैं जो समुद्र तट पर न होकर भी रबर की खेती के लिए जाने जाते हैं।
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राजनीतिक स्तर पर देखें तो यह जिला किसानों, मसालों के कारोबार से जुड़े लोगों और उन्हीं की राजनीति पर केंद्रित रहा है। यही वजह है कि केरल कांग्रेस के कई धड़े इस जिले में फलते-फूलते रहे हैं। मुख्य रूप से सीरियन क्रिश्चियन और नायरों की आबादी वाला यह जिला कृषि और कारोबार आधारित मुद्दों पर ही वोट करता आ रहा है।
2021 में क्या हुआ था?
लेफ्ट ने इस जिले में अपनी सहयोगी पार्टियों को मौका दिया था और कुछ सीटों पर खुद भी उतरी थी। इसका नतीजा यह हुआ था कि 5 में से 4 सीटों पर लेफ्ट गठबंधन को जीत मिली थी और कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा था। हालांकि, इस जिले की कुछ सीटों पर मामला बेहद करीबी होता है ऐसे में अगर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनता है तो यहां उसे 2 से 4 सीटों पर जीत भी मिल सकती है। मुख्य रूप से यह जिला केरल कांग्रेस के अलग-अलग धड़ों के टकराव का क्षेत्र बनता रहा है।
विधानसभा सीटों का इतिहास
थोड़ापुझा- इडुक्की जिले और इडुक्की लोकसभा क्षेत्र में ही आने वाली यह विधानसभा सीट लंबे समय से केरल कांग्रेस के अलग-अलग धड़ों के कब्जे में रहे ही। 1970 से यहां सिर्फ दो नेता पी टी थॉमस और पी जे थॉमस ही चुनाव जीतते हैं। लगभग हर चुनाव में पार्टी का नाम बदला लेकिन नेता वही रहे। पिछले चार चुनाव से यहां से जीतते रहे पी जे जोसेफ ने दो बार केरल कांग्रेस (M), एक बार केरल कांग्रेस (जोसेफ) और आखिर में फिर केरल कांग्रेस (जोसेफ) के टिकट पर जीते हैं। इस बार उन्होंने चुनावी राजनीति से संन्यास ले लिया है और इस सीट पर उनके बेटे ए जे जोसेफ को उतारा गया है। उनके सामने लेफ्ट की ओर से केरल कांग्रेस (M) के सायरियाक चजिकदन मैदान में हैं।
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देवीकुलम- अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह विधानसभा सीट भी इडुक्की लोकसभा क्षेत्र में ही आती है। साल 20006 से ही यहां से लेफ्ट लगातार जीतती आ रही है। इसी सीट से लगातार तीन बार लेफ्ट के टिकट पर विधायक रहे एस राजेंद्रन इस बार बीजेपी के उम्मीदवार हैं। एक बार अयोग्य साबित होने और फिर अयोग्यता पर रोक लगने के बावजूद लेफ्ट ने ए राजा को ही फिर से उम्मीदवार बनाया है। यहां से कांग्रेस ने एफ राजा को उतारा है।
उदमबनचोला- लंबे समय से इस सीट पर जीत रहे लेफ्ट ने इस बार अपने पुराने विधायक की वापसी कराई है। 2001 से 2016 तक इसी सीट से विधायक रहे के के जयचंद्रन की जगह दो बार एम एम मणि यहां से चुनाव जीते थे। अब एम एम मणि की जगह पर फिर से के के जयचंद्रन को लाया गया है। उन्हें चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने सेनापति वेणु को मैदान में उतारा है। पिछले पांच चुनाव से यहां कांग्रेस लेफ्ट से हारती आ रही है।
पीरूमेड- इस सीट पर कुछ चुनाव में कांग्रेस ने जरूर जीत हासिल की है लेकिन ज्यादातर बार यहां लेफ्ट ही जीतती आ रही है। एक बार फिर से लेफ्ट ने अपना उम्मीदवार बदला है। लगातार तीन चुनाव जीतने वाली ई एस बिजीमोल की जगह साल 2021 में वजहूर सोमन को टिकट दिया था। इस बार उनकी जगह पर के सलीमकुमार को उतारा गया है। कांग्रेस ने इस सीट पर सायरियाक कुमार को टिकट दिया है। पिछली बार वह सिर्फ 1835 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थे। बीजेपी ने यहां से वी रतीश को टिकट दिया है।
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इडुक्की- इडुक्की की सीट पर केरल कांग्रेस (M) लगातार चुनाव जीतती आ रही है। पिछले 7 में से 6 बार केरल कांग्रेस (M) को ही जीत मिली है। लगातार पांच बार रोशी ऑगस्टिन यहां से चुनाव जीत रहे हैं और छठी बार भी वही मैदान में उतरे हैं। कांग्रेस ने इस बार यह सीट अपने खाते में रखी है और यहां से रॉय के पॉलोज को उतारा है।
जिले की स्थिति
क्षेत्रफल-4612 वर्ग किलोमीटर
ब्लॉक-8
ग्राम पंचायत-52
नगर पालिका-2
विधानसभा सीटें- 5
UDF-1
LDF-4
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